उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया कि सपा के भीतर ही ऐसे लोग मौजूद हैं जो पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं. राजभर ने यहां तक कहा कि 'विभीषण' अखिलेश यादव के साथ ही हैं और वही उनकी 'लंका' में आग लगाने का काम करेंगे.
राजभर ने कहा, 'अरे अखिलेश यादव जी, अभी राम गोपाल यादव जी की सिर्फ चिट्ठी का जिक्र किया हूं. खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट के पापियों का नाम लिख दूंगा तो भूचाल आ जाएगा. समूचा उत्तर प्रदेश जानता है कि लाल टोपी वाले भ्रष्टचारियों का मास्टरमाइंड कौन है? और किसे बचाने के लिए रामगोपाल यादव समझौता और सौदा कर रहे हैं, सब मालूम है.'
सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि वे अपनी पार्टी के सांसदों और विधायकों की बैठक बुलाएं और उनके हाथ में गीता तथा कुरान देकर शपथ दिलाएं. ऐसा करने पर पार्टी के अंदर की सच्चाई सामने आ जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि सभी जनप्रतिनिधियों से सच बोलने की शपथ ली जाए तो कई महत्वपूर्ण बातें उजागर हो सकती हैं.
'अखिलेश यादव दूसरों की चिंता करने में लगे हैं'
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव दूसरों की चिंता करने में लगे हैं, जबकि उन्हें अपनी पार्टी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के भीतर ही ऐसे लोग हैं जो पार्टी को कमजोर कर रहे हैं और भविष्य में इसका असर देखने को मिलेगा.
अपने बयान में राजभर ने उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें उन पर राजनीतिक लाभ के लिए पैसा लेने का आरोप लगाया जाता रहा है. उन्होंने कहा कि उनके घर पर किसी को धन-दौलत नहीं मिलेगी, बल्कि केवल सामान्य किसान परिवार का जीवन दिखाई देगा. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पिछड़े, शोषित और वंचित वर्गों की आवाज उठाना है.
गठबंधन टूटने की वजह बताई
ओम प्रकाश राजभर ने सपा से अपना पुराना राजनीतिक संबंध याद करते हुए कहा कि गठबंधन टूटने की वजह भी उन्होंने बताई थी. उनके मुताबिक, उन्होंने अखिलेश यादव से जमीनी राजनीति पर ध्यान देने और जनता के बीच अधिक समय बिताने की सलाह दी थी, लेकिन बात नहीं बन सकी और दोनों दलों का रास्ता अलग हो गया.
राजभर ने कहा कि वर्तमान में वह भाजपा के साथ मिलकर पिछड़े और वंचित वर्गों के हितों के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़े तो समाजवादी पार्टी का विलय सुभासपा में कर दिया जाए और वह अखिलेश यादव को कोई न कोई जिम्मेदारी दे देंगे.
ओम प्रकाश राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. अब सभी की नजर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है.
समर्थ श्रीवास्तव