लखनऊ यूनिवर्सिटी में लाला बारादरी मस्जिद बंद करने के खिलाफ NSUI ने किया प्रोटेस्ट

लखनऊ यूनिवर्सिटी में लाला बारादरी मस्जिद में ताला लगाए जाने के विरोध में एनएसयूआई ने प्रदर्शन किया. वहीं, एबीवीपी ने कहा है कि अगर नमाज़ हुई तो हनुमान चालीसा पाठ किया जाएगा.

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लखनऊ यूनिवर्सिटी में मस्जिद का गेट बंद करने के बाद शुरू हुआ विवाद (Photo- Screengrab) लखनऊ यूनिवर्सिटी में मस्जिद का गेट बंद करने के बाद शुरू हुआ विवाद (Photo- Screengrab)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 24 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:14 AM IST

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) के सदस्यों ने लखनऊ यूनिवर्सिटी के अंदर एक जगह को कथित तौर पर बंद करने को लेकर प्रोटेस्ट किया. छात्रों का दावा  है कि संबंधित जगह पर मुस्लिम छात्र कई सालों से नमाज़ पढ़ रहे हैं. NSUI कांग्रेस पार्टी की छात्र शाखा है.

RSS से जुड़ी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के एक पदाधिकारी ने कहा कि अगर लखनऊ यूनिवर्सिटी के अंदर आगे नमाज़ पढ़ी जाती है, तो वे भी यूनिवर्सिटी में हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे.

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NSUI की UP यूनिट के वाइस प्रेसिडेंट आर्यन मिश्रा ने सोमवार को कहा कि लखनऊ यूनिवर्सिटी के अंदर लाल बारादरी मस्जिद में शनिवार को ताला लगा दिया गया, जहां मुस्लिम छात्र कई सालों से नमाज़ पढ़ रहे हैं.

'कई साल से नमाज़ पढ़ते हैं...'

आर्यन मिश्रा ने कहा कि रविवार शाम को, मुसलमानों ने NSUI के वॉलंटियर्स की निगरानी में नमाज़ पढ़ी. लोग कई सालों से नमाज़ पढ़ रहे हैं और यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने मस्जिद पर ताला लगा दिया. उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम छात्र मस्जिद में नमाज़ पढ़ते हैं, जबकि हिंदू छात्र गेट नंबर 1 के पास एक मंदिर में प्रार्थना करते हैं.

यह भी पढ़ें: लखनऊ यूनिवर्सिटी में लाल बरादारी मस्जिद बंद... छात्रों के विरोध के बीच पुलिस तैनात

क्या है पूरा मामला? 

हाल ही में लखनऊ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ऐतिहासिक लाल बारादरी इमारत और उसमें स्थित मस्जिद के गेट को सील कर बैरिकेडिंग लगा दी. छात्र नेताओं और मुस्लिम छात्रों ने इस कार्रवाई के खिलाफ परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया. प्रशासन के एक्शन के जवाब में छात्रों ने बैरिकेडिंग गिरा दी और मस्जिद के बाहर ही नमाज पढ़ी. इस दौरान सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए हिंदू छात्रों ने नमाजियों के पीछे ढाल बनकर सुरक्षा घेरा बनाया.

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लाल बारादरी करीब 200 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत है, जिसका निर्माण 1800 ईस्वी में नवाब नसीरुद्दीन हैदर ने कराया था. यह इमारत विश्वविद्यालय की स्थापना से भी पुरानी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है.

छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के इस प्राचीन मस्जिद वाले हिस्से को बंद कर दिया. अचानक हुई कार्रवाई से नाराज छात्र बड़ी संख्या में बारादरी मस्जिद के सामने प्रोटेस्ट किए.

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