'परिवार, आत्मनिर्भरता और समाज की एकता...', मथुरा में RSS की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में मोहन भागवत का संदेश

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मथुरा में राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में हिन्दू एकता, सामाजिक सौहार्द, आत्मनिर्भरता और पारिवारिक मूल्यों पर जोर दिया. उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ सूत्र के कार्यान्वयन पर बल दिया, जिसे पिछले साल विजयादशमी के दिन तय किया गया था.

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मथुरा में RSS बैठक के दौरान हिंदू एकता और सामाजिक समरसता पर बोले मोहन भागवत (Photo: PTI) मथुरा में RSS बैठक के दौरान हिंदू एकता और सामाजिक समरसता पर बोले मोहन भागवत (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:07 AM IST

राष्‍ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुई बैठक में हिन्दू एकता, सामाजिक सौहार्द, आत्मनिर्भरता और पारिवारिक मूल्यों पर खात तौर से बल दिया. इस दौरान उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ सूत्र को लागू करने पर भी ज़ोर दिया, जिसका निर्णय पिछले साल विजयादशमी के दिन RSS के शताब्दी समारोह के मौके पर लिया गया था.

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भागवत रविवार को मथुरा पहुंचे और केशव धाम में तीन दिन तक चलने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में भाग ले रहे हैं. इसके बाद वे वृंदावन में सात दिन रहेंगे. बैठक के दौरान सदस्यों को विभिन्न समूहों में बांटकर क्षेत्रीय और उद्देश्य आधारित लक्ष्यों पर चर्चा कराई गई.

बैठक में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, लेकिन ‘लव जिहाद’ और बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों पर फिलहाल कोई गहन चर्चा नहीं हुई है. संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, अभी मुख्य फोकस संगठनात्मक लक्ष्यों और सामाजिक मुद्दों पर है.

यह भी पढ़ें: वृंदावन में RSS की राष्ट्रीय कार्यकारी कमेटी की मीटिंग, मोहन भागवत मथुरा पहुंचे

शनिवार सुबह मोहन भागवत वृंदावन के चंद्रोदया मंदिर का निरीक्षण करेंगे, जिसका निर्माण अभी जारी है. यह पूरा होने पर विश्व का सबसे ऊंचा मंदिर कहलाएगा. इसके बाद वह संत सुदामा दास जी के वृंदावन आगमन की 100वीं वर्षगांठ के समारोह का उद्घाटन करेंगे. सुदामा कुटी आश्रम के प्रशासन के अनुसार, इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी आमंत्रित किया गया है.

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इस बैठक में हिन्दू एकता और समाज में सद्भाव बनाए रखने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर खास ध्यान दिया गया है, जो आज के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

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