विकास बना 'जाहिद' तो लोकेश बना 'सलीम', 'गजवा-ए-हिंद' की खौफनाक साजिश का भंडाफोड़

उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) ने मेरठ से संचालित एक ऐसे आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जिसके तार दुबई और पाकिस्तान से जुड़े हैं. जांच में सामने आया है कि दुबई में बैठा आकिब इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है, जिसने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसाया.

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पाक हैंडलर्स ने आतंकियों को निर्देश दिया था कि इस बार शहादत नहीं, दहशत चाहिए. (Photo- ITG) पाक हैंडलर्स ने आतंकियों को निर्देश दिया था कि इस बार शहादत नहीं, दहशत चाहिए. (Photo- ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 05 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:07 AM IST

उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) की गिरफ्त में आए आतंकी शाकिब से हुई पूछताछ में एक हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है.  यह बात सामने आई है कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स ने भारत में दहशत फैलाने के लिए इस बार अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है. एटीएस की गिरफ्त में आए शाकिब को सीधे निर्देश मिले थे कि इस बार न तो 'शहादत' देनी है और न ही सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ना है, बल्कि हिंदू युवकों को ढाल बनाकर अपने मंसूबों को अंजाम देना है.

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जांच में सामने आया है कि दुबई में बैठा आकिब इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है, जिसने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसाया. इस मामले में एटीएस ने मेरठ के साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, और गौतमबुद्धनगर के विकास (रौनक) व लोकेश (पपला पंडित) को गिरफ्तार किया है.

हिंदू युवकों को अरबाब नाम के शख्स के जरिए जोड़ा गया था. शाकिब ने न केवल इनका ब्रेनवॉश किया, बल्कि भारी पैसों का लालच देकर उन्हें देश विरोधी गतिविधियों के लिए तैयार किया. पहचान छिपाने के लिए शाकिब ने इन्हें कोड नेम भी दिए थे.

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लोकेश का कोड नेम 'सलीम' रखा गया था. विकास का कोड नेम 'जाहिद' रखा गया था. शाकिब इस मॉड्यूल का मास्टरमाइंड था, लेकिन वह रेकी (जासूसी) के लिए लोकेश का सहारा लेता था. लोकेश के हिंदू होने का फायदा उठाकर उसे आसानी से हिंदू धार्मिक स्थलों और संवेदनशील जगहों पर भेजा जाता था, जहां उस पर किसी को शक नहीं होता था और न ही कोई पूछताछ की जाती थी. इस तरह आतंकियों ने सुरक्षा घेरे में सेंध लगाने के लिए 'पहचान' को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया.

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एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मुताबिक, आकिब लंबे समय से विदेश में बैठकर यह मॉड्यूल चला रहा है. वह इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर AK-47 और अन्य ऑटोमैटिक हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट करता था. इन तस्वीरों का इस्तेमाल युवाओं को प्रभावित करने, उनका ब्रेनवॉश करने और उन्हें पैसों का लालच देकर उकसाने के लिए किया जाता था. आकिब ने ही मेरठ के साकिब उर्फ डेविल का संपर्क पाकिस्तानी हैंडलर्स से कराया था.

गूगल लोकेशन और संवेदनशील जगहों की रेकी
पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह मॉड्यूल केवल योजना नहीं बना रहा था, बल्कि जमीन पर सक्रिय था. पाकिस्तानी हैंडलर्स सीधे साकिब को गूगल लोकेशन भेजते थे. इसके बाद साकिब अपने साथियों के साथ उन जगहों पर जाकर वीडियो बनाता और वापस भेजता था. बदले में उन्हें मोटी रकम ट्रांसफर की जाती थी.

इस गिरोह ने प्रदेश के कई रक्षा प्रतिष्ठानों और कैंट इलाकों की रेकी कर उनके वीडियो तैयार किए थे. इतना ही नहीं, जांच में संकेत मिले हैं कि राज्य के कुछ नामचीन हिंदुत्ववादी और धार्मिक नेता भी इनके निशाने पर थे, जिनकी सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी जुटाई जा रही थी. सुरक्षा एजेंसियों के शिकंजे से बचने और लंबे समय तक अंडरग्राउंड रहकर हमले करने की ट्रेनिंग दी गई थी. शाकिब, लोकेश, विकास और अरबाब मिलकर देश में बड़े पैमाने पर दहशत फैलाने की साजिश रच रहे थे.

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एटीएस को आशंका है कि इस मॉड्यूल से और भी लोग जुड़े हैं, जो अलग-अलग शहरों में हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे थे. एटीएस अब इस मॉड्यूल की फंडिंग, उनके मोबाइल डेटा और संभावित ठिकानों की गहराई से पड़ताल कर रही है. 
 

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