उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने मंगलवार को एक अर्जी दाखिल की. उन्होंने किसान आंदोलन से जुड़े मामले में 30 अप्रैल को आने वाले फैसले को टालने की मांग की है. उनकी वकील अनुसूया चौधरी के अनुसार, अर्जी में कहा गया है कि शिकायतकर्ता को अदालत द्वारा 'अतिरिक्त अवसर' दिया गया है, इसलिए बचाव पक्ष को भी पर्याप्त समय मिलना चाहिए. इसी आधार पर फैसले की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया गया है.
इस मामले में शिकायतकर्ता अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा का कहना है कि सुनवाई पूरी हो चुकी है और 3 अप्रैल को अंतिम दलीलें भी सुनी जा चुकी हैं. पहले अदालत ने 16 अप्रैल को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी, लेकिन कुछ दस्तावेज पेश किए जाने के बाद इसे बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया.
अब बचाव पक्ष का तर्क है कि जब शिकायतकर्ता को अतिरिक्त समय दिया गया है, तो आरोपी को भी बराबरी का मौका मिलना चाहिए. यह मामला किसान आंदोलन के दौरान कंगना रनौत द्वारा दिए गए बयान से जुड़ा है, जिसके बाद आगरा की अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई थी.
कंगना रनौत के बारे में
कंगना रनौत भारतीय फिल्म उद्योग की एक प्रमुख अभिनेत्री और राजनेता हैं. वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखती हैं. हाल के वर्षों में उन्होंने राजनीति में कदम रखते हुए भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर सक्रिय भूमिका निभाई है. अभिनय के साथ-साथ कंगना फिल्म निर्माण और निर्देशन में भी हाथ आजमा चुकी हैं. हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से आने वाली कंगना ने बिना किसी 'गॉडफादर' के फिल्म जगत में कदम रखा और 'क्वीन', 'तनु वेड्स मनु' और 'मणिकर्णिका' जैसी फिल्मों से अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया.
अभिनय के अलावा, कंगना अपनी बेबाकी और निडरता के लिए भी जानी जाती हैं. उन्होंने फिल्म उद्योग में 'नेपोटिज्म' (भाई-भतीजावाद) जैसे गंभीर विषयों पर बहस छेड़ी.
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