ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि भाजपा में दो विचारधाराएं स्पष्ट दिख रही हैं, जहां एक पक्ष 'अत्याचारी' है और दूसरा बटुकों का सम्मान कर डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रहा है. मुख्यमंत्री द्वारा उनकी पदवी पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए शंकराचार्य ने कहा, 'हमने योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का समय दिया है, जिसमें से 20 दिन बीत चुके हैं; इसके बाद हम घोषित करेंगे कि वह असली हिंदू हैं या नकली.'
आजतक ने पूरे मामले को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से ख़ास बातचीत की है. आइए जानते हैं उन्होंने पूरे विवाद पर क्या कहा है.
सवाल: प्रयागराज की घटना को एक महीना हो चुका है. उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सौ बटुकों को घर बुलाकर सम्मान किया है. आप इसे कैसे देखते हैं?
जवाब: इस पूरे मामले के कई पहलू हैं. पहला, यह साफ दिख रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर दो तरह की सोच है. एक कठोर रवैया अपनाने वाली और दूसरी जो उस कठोरता के पक्ष में नहीं है. दूसरा, जिस घटना को लेकर विवाद हुआ, उसका व्यापक प्रभाव पड़ा है और उससे राजनीतिक दलों में चिंता है. जो लोग हठधर्मी नहीं हैं, वे नुकसान की भरपाई की कोशिश कर रहे हैं. दिखावे के लिए ही सही, अगर बटुकों को सम्मान दिया गया और उन्हें संदेश दिया गया कि कोई विरोध करने वाला है तो कोई सम्मान करने वाला भी है, तो यह सकारात्मक कदम है.
सवाल: समाजवादी पार्टी कह रही है कि डिप्टी सीएम समर्थन में हैं लेकिन मुख्यमंत्री अपमान कर रहे हैं. क्या सरकार के भीतर मतभेद हैं?
जवाब: समाजवादी पार्टी और बीजेपी दोनों राजनीतिक दल हैं. वे राजनीतिक दृष्टि से सोचते और बोलते हैं. हम धर्माचार्य राजनीति के आधार पर प्रतिक्रिया नहीं देते. उनका आपसी मामला है, वे आपस में निपटें.
सवाल: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर कोई स्वयं को शंकराचार्य नहीं कह सकता. आप इस बयान को कैसे देखते हैं?
जवाब: उन्होंने विधानसभा में उदाहरण दिया था कि जैसे हर कोई स्वयं को मुख्यमंत्री या नेता प्रतिपक्ष नहीं कह सकता, वैसे ही हर कोई स्वयं को शंकराचार्य नहीं कह सकता. यह सिद्धांत सही है. लेकिन जो विधि-विधान से अभिषिक्त होकर उस पद पर बैठा है, वह स्वयं को शंकराचार्य कहेगा ही. सिद्धांत को वास्तविक पदधारी पर लागू नहीं किया जा सकता.
सवाल: क्या आपको लगता है कि सरकार आपको शंकराचार्य मानने को तैयार नहीं है?
जवाब: यह राजनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय है. हम विधि-विधान से अभिषिक्त हैं. जो परंपरा के अनुसार शंकराचार्य पद पर बैठा है, उसे स्वयं को शंकराचार्य कहने का अधिकार है.
सवाल: समाजवादी पार्टी भी धर्माचार्यों के उत्पीड़न का मुद्दा उठा रही है. क्या यह सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए है?
जवाब: अगर कोई राजनीतिक लाभ के लिए भी सही प्रश्न उठा रहा है तो उसमें बुराई क्या है? जो राजनीतिज्ञ है, वह राजनीतिक लाभ के लिए ही काम करेगा. सवाल यह है कि मुद्दा सही है या गलत. अगर मुद्दा सही है तो उसे उठाना गलत नहीं कहा जा सकता.
सवाल: आपने गोरक्षा को लेकर चालीस दिन का अल्टीमेटम दिया है. आगे क्या होगा?
जवाब: हमने चालीस दिन का समय इसलिए दिया कि यदि कोई सुधार करना चाहे तो कर ले. बीस दिन बीत चुके हैं, बीस दिन शेष हैं. समय पूरा होने के बाद स्थिति स्पष्ट की जाएगी.
सवाल: आपने कहा कि अगर कोई व्यक्ति संत का वेश धारण कर समाज को भ्रमित करे तो उसे उजागर करना कर्तव्य है. क्या आप किसी विशेष व्यक्ति की ओर इशारा कर रहे हैं?
जवाब: हमारा कहना सिद्धांत का है. अगर कोई कालनेमी या छद्म रूप धारण कर संत बनकर समाज में प्रवेश करे, तो समाज को सावधान करना धर्माचार्य का कर्तव्य है. यदि कोई हिंदू धर्म की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है, तो उसे बताना हमारा दायित्व है.
साहिल जोशी