'अपनी कंपनी लाहौर में खोल लो...', लेंसकार्ट विवाद पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री

प्रयागराज में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने लेंसकार्ट पर जमकर हमला बोला. कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शास्त्री ने कहा कि कंपनी अपने कर्मचारियों को तिलक, सिंदूर और मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने से रोकती है. कंपनी को “लाहौर जाकर अपना कारोबार करना चाहिए.”

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प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री. (File Photo: ITG) प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री. (File Photo: ITG)

रवीश पाल सिंह

  • प्रयागराज,
  • 22 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:01 PM IST

प्रयागराज में एक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने लेंसकार्ट कंपनी के मालिक पर जमकर भड़के और उन्हें लाहौर जाने की सलाह दे डाली. कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने ने कहा कि ‘एक कंपनी है उसका नाम लेंसकार्ट है. उसने अपने वर्करों को बोला है कि हमारे यहां कोई तिलक लगा के नहीं आ सकता, मंगलसूत्र पहन के नहीं आ सकता, सिंदूर लगा के नहीं आ सकता. अरे... नकटा, तू अपनी कंपनी लाहौर में खोल ले, भारत में काहे को मर रहा है. 

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धीरेंद्र शास्त्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि लेंसकार्ट जैसी कंपनियां हिंदू समाज की भावनाओं और विचारधारा को आहत करती हैं, इनका बहिष्कार होना चाहिए. उन्हें लाहौर जाना चाहिए. इन्हें भारत में व्यापार करने का अधिकार नहीं है. 

ऐसे शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा विवाद कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ था. इस दस्तावेज़ में दावा किया गया था कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए कुछ धार्मिक प्रतीकों- जैसे बिंदी, तिलक और कलावा- पर रोक लगाई है.

विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के सह-संस्थापक पीयूष बंसल ने सार्वजनिक रूप से सफाई दी. उन्होंने कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज़ पुराना और भ्रामक है, जिसे पहले ही हटा दिया गया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि लेंसकार्ट अपने कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार का धार्मिक भेदभाव नहीं करता और सभी को अपनी आस्था के अनुसार पहनावे की पूरी स्वतंत्रता है.

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लेंसकार्ट के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं लोग
इसके बावजूद यह मुद्दा थमता नजर नहीं आ रहा है. सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग कंपनी के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और बहिष्कार की मांग कर रहे हैं. कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं. भोपाल में कुछ संगठनों ने लेंसकार्ट के स्टोर्स के बाहर प्रदर्शन किया और कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की.

फिलहाल यह मामला धार्मिक भावनाओं, कॉर्पोरेट नीतियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच असंतुलन का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है. अब देखना यह होगा कि कंपनी और संबंधित पक्ष इस विवाद को शांत करने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं?

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