CM योगी का बांग्लादेश से आए 331 परिवारों को तोहफा, मिला जमीन का मालिकाना हक

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आज बांग्लादेश से आए 331 परिवार को भूमि अधिकार का पत्र वितरण किया गया. यह पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद सौंपा. साथ ही मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत लाभार्थियों को उनके आवास की चाबियां भी प्रदान की गईं.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (File Photo. ITG) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (File Photo. ITG)

aajtak.in

  • लखीमपुर खीरी,
  • 11 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:58 PM IST

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में शनिवार को बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को संक्रमणीय/असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण किया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण किया. साथ ही 213 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण भी किया. साथ ही, मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत लाभार्थियों को उनके आवास की चाबियां भी प्रदान की गईं. 

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आजादी के बाद से इन परिवारों को नहीं मिली थी जमीन

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक बांग्लादेश से आए हिंदू परिवारों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला था. लखीमपुर खीरी में जहां बंगलादेश के लोग बसे हैं, जिनको जमीन का हक दिया है, उस मियांपुर गांव का नाम बदलकर रविंदर नगर करने का ऐलान किया गया है. उन्होंने कहा कि थारू परिवारों को अब तक कभी मालिकाना हक नहीं मिला था, सरकार ने पहली बार उनका अधिकार सुनिश्चित किया. थारू समाज खुद को महाराणा प्रताप का वंशज मानता है, उनकी जयंती से पहले उन्हें अधिकार दिए गए.

पूर्व की सरकारों ने इन परिवारों को बसाया, लेकिन उन्हें कानूनी अधिकार नहीं दिए. स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े परिवारों को भी जमीन का हक प्रदान किया गया. बांग्लादेश से आए विस्थापित परिवारों को भी भूमि स्वामित्व अधिकार दिए जा रहे हैं. 1947 और 1971 के विस्थापित लगभग 1000 परिवारों को भूमि आवंटित की जा रही है, जिसे उनका अधिकार बताया गया.

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पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा गया कि उसने अपने कर्मों से भारत का विभाजन कराया और वहां जातियों को अधिकार नहीं मिले. बांग्लादेश और पाकिस्तान में अत्याचार झेल चुके परिवारों की पैतृक संपत्ति पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं.  आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी. जिसके तहत विभाजन के समय पाकिस्तान से विस्थापित होकर राज्य के चार ज़िलों में बसे 12000 से ज़्यादा परिवारों को ज़मीन का मालिकाना हक दिया जाएगा.

योग्य परिवारों को एक एकड़ तक की ज़मीन पर मालिकाना हक मिलेगा, बशर्ते कि वह ज़मीन सीलिंग सीमा के अंदर न हो और खलिहान, चरागाह या तालाब जैसी श्रेणियों में न आती हो. वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि यह फ़ैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया. खन्ना ने कहा कि कैबिनेट ने 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) 2026' के तहत 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006' में संशोधनों को मंज़ूरी दे दी है.

खन्ना ने बताया कि इस संशोधन के तहत इन परिवारों को ज़मीन का मालिकाना हक देने के लिए धारा 76(1) में नए प्रावधान जोड़े गए हैं. मंत्री ने कहा कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान पलायन करके पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर ज़िलों में बसे 12,380 परिवारों को इस कदम से फ़ायदा होगा. खन्ना के अनुसार लाभार्थियों में वे लोग शामिल हैं जो 'नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019' के तहत भारतीय नागरिकता के योग्य हैं, साथ ही अनुसूचित जनजाति समुदायों से जुड़े परिवार या विभिन्न योजनाओं के तहत पुनर्वासित किए गए परिवार भी इसमें शामिल हैं.

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इस प्रकार है पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों की आबादी 

ज़िलावार ब्योरा देते हुए मंत्री ने बताया कि लखीमपुर खीरी में ऐसे 2,350 परिवार हैं, पीलीभीत में 4,000, बिजनौर में 3,856 और रामपुर में 2,174 परिवार हैं. 

उन्होंने कहा कि ये परिवार, जो लगभग 70 वर्षों से राज्य में रह रहे हैं, ज़मीन का मालिकाना हक न होने के कारण काफ़ी मुश्किलों का सामना कर रहे थे; इनमें खेती के लिए बैंक से कर्ज़ लेने और सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेचने में आने वाली दिक्कतें भी शामिल थीं.

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