ईरान पर हमलों के बाद बाराबंकी जिले में बेचैनी का माहौल है. जिले के कई छात्र और इस्लामिक स्कॉलर इस समय ईरान के धार्मिक और शैक्षणिक केंद्र क़ुम में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. हमले के बाद से इन लोगों से संपर्क प्रभावित हो गया है, जिससे उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
जानकारी के मुताबिक, बाराबंकी के करीब एक दर्जन से अधिक छात्र और मौलाना कुम शहर में मौजूद हैं. इनमें मौलाना जफर अब्बास उर्फ फैजी, मौलाना आबिद हुसैन काजमी, मौलाना अली मेहदी रिजवी, मौलाना सैयद काशिफ रिजवी जैदपुरी सहित कई नाम शामिल हैं. इनके साथ उनके परिवार के कुछ सदस्य भी वहीं पर हैं, जिनमें बच्चे और रिश्तेदार शामिल बताए जा रहे हैं.
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हमले के बाद शुरुआती समय में कुछ लोगों से संपर्क हो पाया था, लेकिन धीरे-धीरे बातचीत पूरी तरह बंद हो गई. इस स्थिति ने परिजनों की चिंता को और बढ़ा दिया है. बाराबंकी के रहने वाले मौलाना जफर फैजी के भाई मौलाना अब्बास मेंहदी 'सदफ' ने बताया कि हमले के तुरंत बाद उनकी अपने भाई से बात हुई थी.
उन्होंने बताया कि हमले के बाद भाई से बात हुई थी. उन्होंने कहा कि कुम शहर के बॉर्डर पर हमला हुआ है, लेकिन फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं और लोग सामान्य रूप से आ-जा रहे हैं. हालांकि इसके बाद से संपर्क नहीं हो पाया, जिससे परिवार परेशान है.
इसी तरह कटरा मोहल्ले के मौलाना अली मेहदी भी कुम में मौजूद हैं. उनके परिवार वालों ने भी संपर्क टूटने की बात कही है. कई अन्य परिवार भी इसी स्थिति से गुजर रहे हैं, जहां उन्हें अपनों की सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है.
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परिवारों की चिंता यह है कि लोग मस्जिदों में इकट्ठा होकर अपने परिजनों की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं. जगह-जगह सामूहिक प्रार्थनाएं की जा रही हैं. अधिवक्ता दिलकश रिजवी ने बताया कि शुरुआत में कुछ लोगों से बात हुई थी, लेकिन अब संपर्क पूरी तरह टूट गया है. परिवार बेहद तनाव में हैं.
सरकार से गुहार- ईरान में फंसे लोगों को जल्द लाया जाए वापस
स्थानीय लोगों ने सरकार से अपील की है कि ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. लोगों का कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए स्थिति और बिगड़ सकती है, इसलिए समय रहते कार्रवाई जरूरी है.
इस पूरे घटनाक्रम ने बाराबंकी में डर और अनिश्चितता का माहौल बना दिया है. हर घर में सिर्फ एक ही सवाल है- क्या उनके अपने सुरक्षित हैं? फिलहाल सभी की नजरें सरकार और हालात पर टिकी हैं, जबकि परिजन लगातार दुआ कर रहे हैं कि उनके अपने सुरक्षित लौट आएं.
सैयद रेहान मुस्तफ़ा