‘कानून व्यवस्था नहीं संभाल सकते तो पद छोड़ दें’, संभल नमाज मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के संभल जिले में रमज़ान के दौरान गाटा नंबर 291 पर मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक आदेश को खारिज कर दिया है. याचिकाकर्ता मुनाजिर खान ने मस्जिद में नमाज पर प्रतिबंध लगाने को अनुचित ठहराया था.

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संभल नमाज विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी (Photo: PTI) संभल नमाज विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी (Photo: PTI)

पंकज श्रीवास्तव

  • प्रयागराज,
  • 15 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:59 AM IST

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की एक मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. यह मामला संभल के निवासी मुनाजिर खान द्वारा दायर याचिका पर सुना गया, जिसमें उन्होंने रमज़ान के दौरान गाटा नंबर 291 पर नमाज अदा करने से रोके जाने का आरोप लगाया. याचिकाकर्ता के अनुसार, उक्त स्थान पर मस्जिद मौजूद है और यहां लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति मिलनी चाहिए.

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राज्य सरकार ने अपनी दलील में कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए नमाजियों की संख्या सीमित की गई थी और केवल 20 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी. 

वहीं याचिकाकर्ता का तर्क था कि रमज़ान के महीने में बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ने आते हैं, इसलिए यह संख्या प्रतिबंधित करना अनुचित है. राज्य सरकार ने यह भी बताया कि राजस्व अभिलेखों में गाटा नंबर 291 का नाम मोहन सिंह और भोजराज सिंह के नाम दर्ज है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कहा कि कानून का पालन सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है. यदि प्रशासन को यह लगता है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से बाहर ट्रांसफर की मांग करनी चाहिए.

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कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि इबादत किसी निजी संपत्ति पर हो रही है, तो इसके लिए राज्य सरकार से अनुमति लेना आवश्यक नहीं होता. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की है. इस निर्णय से यह साफ हुआ कि धार्मिक गतिविधियों पर अनुचित प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा और प्रशासन को संतुलित निर्णय लेना होगा.

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