यूपी के संभल में तैनात सीओ कुलदीप कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह जुमे की नमाज को लेकर सख्त हिदायत देते नजर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग ईरान के समर्थन में प्रोटेस्ट करेंगे या सड़क पर अराजकता फैलाएंगे उनका पुलिस 'बढ़िया इलाज' करेगी. साथ ही सीओ ने कहा कि जिन लोगों को ईरान के नाम पर छाती पीटनी है, वो सीधे ईरान ही चले जाएं. फिलहाल, सीओ कुलदीप कुमार के इस बयान के बाद सियासी माहौल गरम हो गया है. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी सीओ के बयान की तीखी आलोचना की है. उन्होंने दो टूक कहा कि ये मुल्क किसी के बाप का नहीं है जो हमें कहीं जाने के लिए बोले.
देश सीओ के बाप का है क्या?
आपको बता दें कि एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मैंने भी संभल सीओ के वीडियो को देखा है. इसमें वह पीस कमेटी की बैठक में मुसलमानों को थाने में बुलाते हैं और उनको ईरान का नाम लेकर धमकाते हैं. क्या ये देश उनके (सीओ) बाप का है? देश संविधान से चलेगा या किसी की जुबान से?
बकौल ओवैसी- संभल के सीओ बेंजामिन नेतन्याहू की जुबान बोल रहे हैं. क्या गारंटी है कि कल को इजरायल के समर्थन में रैली निकलेगी तो वो उसे रोक देंगे. उल्टे जय-जय के नारे लगाएंगे. देश में बोलने की आजादी है, कानून भी है, फिर क्यों किसी के हक छीने जा रहे हैं.
ट्रंप और नेतन्याहू पर बरसे ओवैसी
वहीं, ईरान युद्ध और पीएम पर बोलते हुए AIMIM प्रमुख ने कहा- "भारत इस तरह से व्यवहार क्यों कर रहा है? देश के प्रधानमंत्री को ईरान पर हुए हमले की निंदा करनी चाहिए थी. पीएम को दोहा, दुबई, बहरीन और कुवैत में हुई घटनाओं की निंदा करनी चाहिए थी. आप जाकर ट्रंप और नेतन्याहू के साथ क्यों बैठ गए? क्या यही हमारी विदेश नीति है? हमने अस्सी सालों से तटस्थ रुख बनाए रखा है. भारत हमेशा फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता से खड़ा रहा है. किसी भी संप्रभु राष्ट्र पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. हमने भी पाकिस्तान पर हमला किया था. लोग पूछ सकते हैं: वह कैसे उचित था? UN चार्टर का अनुच्छेद 51 हमें ऐसा करने का अधिकार देता है. लेकिन ट्रंप और नेतन्याहू ने ईरान पर हमला क्यों किया?"
'ईरान की चिंता है तो वहीं जाओ'
आपको बता दें कि बीते दिनों पीस कमेटी की बैठक में संभल के सीओ ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि ईरान और इजरायल के झगड़े में जिसे ज्यादा दिक्कत हो रही है, वह जहाज में बैठकर ईरान चला जाए और वहीं से लड़ाई लड़े. सीओ ने साफ कहा था कि अलविदा जुमा की नमाज के दौरान किसी भी देश के विरोध में नारेबाजी या काली पट्टी बांधकर विरोध जताना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
सड़कों पर नमाज न पढ़ने की हिदायत देते हुए सीओ ने कहा था कि मस्जिद के बाहर एक भी व्यक्ति सड़क पर नमाज नहीं पढ़ेगा. अगर कोई कानून व्यवस्था को पलीता लगाने की कोशिश करेगा, तो उसे मुकदमा लिखकर जेल भेजा जाएगा.
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