एआई के दौर में जहां यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में ऑफिस जॉब सीमित हो सकती हैं, वहीं ब्लू कॉलर जॉब यानी मेहनत और हुनर पर आधारित कामों की कमाई अब लोगों को चौंका रही है. हाल ही में एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें एक बढ़ई को सिर्फ 45 मिनट के काम के लिए 900 रुपये मिलने की बात सामने आई. इस घटना ने सोशल मीडिया पर ऐसी नौकरियों की कमाई को लेकर नई बहस छेड़ दी.
इसी चर्चा के बीच अब ई-रिक्शा चालकों की कमाई भी सुर्खियों में आ गई है. साल 2015 के बाद से भारत की सड़कों पर ई-रिक्शा तेजी से बढ़े हैं. उन्होंने न सिर्फ लोगों के सफर को आसान बनाया है, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी बने हैं.
वायरल वीडियो में एक इंफ्लुएंसर ने खुद एक दिन ई-रिक्शा चलाकर इसकी कमाई का पूरा हिसाब सामने रखा. वीडियो के मुताबिक, सिर्फ 4 घंटे में करीब 90 सवारियां बैठीं, जिनसे 10 से 20 रुपये तक किराया लिया गया. इससे यह समझ में आया कि छोटे-छोटे किराए भी मिलकर बड़ी कमाई में बदल सकते हैं.
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पूरे दिन यानी करीब 12 घंटे तक रिक्शा चलाने के बाद कुल कमाई 3200 रुपये बताई गई. हालांकि इसमें से खर्च भी निकाला गया, जिसमें 400 रुपये रिक्शा किराया और 120 रुपये पार्किंग के देने पड़े. इन खर्चों के बाद उस दिन की शुद्ध कमाई करीब 2700 रुपये रही.
इतनी है कमाई!
अगर इसी गणित को आगे बढ़ाया जाए, तो महीने की कमाई लगभग 81,000 रुपये और साल भर की कमाई करीब 9.72 लाख रुपये तक पहुंचती है. यह आंकड़ा सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोग हैरान रह गए और इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं.
हालांकि वीडियो में एक जरूरी पहलू का जिक्र नहीं किया गया—बैटरी चार्जिंग का खर्च. कई यूजर्स ने इस पर सवाल उठाए और कहा कि असली मुनाफा समझने के लिए इस खर्च को जोड़ना भी जरूरी है.
वहीं कुछ लोगों ने इस पूरे मामले पर हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी. एक यूजर ने मजाक में लिखा कि लगता है अब हर कोई उनसे ज्यादा कमा रहा है.
यह वायरल वीडियो सिर्फ कमाई का आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ी सोच को सामने लाता है. यह दिखाता है कि जिन कामों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, उनकी कमाई भी कई बार उम्मीद से कहीं ज्यादा हो सकता है.
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