बेंगलुरु आकर ठेला लगाने का सोचा था... अब इनकी जॉब भी सेफ नहीं, वीडियो वायरल

बेंगलुरु में एक सब्जी विक्रेता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें वह सिर पर आई फोन जैसा डिवाइस बांधकर AI ट्रेनिंग के लिए डेटा इकट्ठा करता दिखाई दे रहा है. दावा किया जा रहा कि उसे इस काम के लिए 350 रुपये प्रति घंटा मिलते हैं और उसकी महीने की कमाई 1 लाख रुपये से ज्यादा हो सकती है.

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यही डेटा बाद में मशीनों और रोबोट्स को ट्रेन करने में इस्तेमाल किया जाता है. ( Photo: Insta/@vai.bhaaavvv) यही डेटा बाद में मशीनों और रोबोट्स को ट्रेन करने में इस्तेमाल किया जाता है. ( Photo: Insta/@vai.bhaaavvv)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:23 AM IST

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तेजी से लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है. अब एआई सिर्फ बड़े ऑफिस या टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर आम लोगों के कामकाज पर भी दिखाई देने लगा है. हाल ही में बेंगलुरु का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसने लोगों को काफी हैरान किया. इस वीडियो में एक सब्जी बेचने वाला व्यक्ति अपने माथे पर एआई जैसा डिवाइस बांधे नजर आया. दावा किया गया कि वह एआई ट्रेनिंग के लिए रियल वर्ल्ड डेटा इकट्ठा करने का काम कर रहा है और इसके बदले उसे हर महीने 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई हो रही है.

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यह वीडियो इंस्टाग्राम पर वैभव नाम के एक यूजर ने शेयर किया. उन्होंने बताया कि वह अपनी स्कूटी से जा रहा था, तभी उसकी नजर एक सब्जी विक्रेता पर पड़ी जिसने सिर पर मोबाइल फोन और मेमोरी कार्ड वाला एक खास उपकरण बांध रखा था. यह देखकर वह रुक गया और उस व्यक्ति से बात की. जब उसने पूछा कि वह ऐसा क्यों कर रहा है, तो जवाब मिला कि वह AI कंपनियों के लिए डेटा इकट्ठा कर रहा है. आसान भाषा में समझें तो AI को इंसानों की तरह काम करना सिखाने के लिए उसे असली दुनिया की तस्वीरें, वीडियो और एक्टिविटी का डेटा चाहिए होता है. यही डेटा बाद में मशीनों और रोबोट्स को ट्रेन करने में इस्तेमाल किया जाता है.

आखिर क्या होता है रियल वर्ल्ड डेटा?
AI को इंसानों की तरह समझदार बनाने के लिए उसे असली दुनिया से जुड़ी जानकारी दी जाती है. इसमें वीडियो, तस्वीरें, लोगों की गतिविधियां और रोजमर्रा के काम शामिल होते हैं. इसी डेटा की मदद से मशीनें और रोबोट सीखते हैं कि इंसान कैसे चलते हैं, चीजों को कैसे पहचानते हैं और अलग-अलग परिस्थितियों में कैसे काम करते हैं. सब्जी विक्रेता का काम भी कुछ ऐसा ही बताया गया, जहां वह अपने आसपास की गतिविधियों को रिकॉर्ड करके AI सिस्टम को ट्रेन करने में मदद कर रहा था.

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वीडियो शेयर करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उस सब्जी विक्रेता को इस काम के लिए 350 रुपये प्रति घंटा मिलते हैं. अगर वह रोज 10 घंटे काम करता है, तो उसकी एक दिन की कमाई लगभग 3500 रुपये बनती है. इसी हिसाब से महीने की कमाई 1 लाख रुपये से भी ज्यादा हो सकती है. इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं. कुछ लोगों ने इसे भविष्य का नया रोजगार बताया, तो कुछ लोगों ने इसे चिंता की बात कहा.

सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस
कई यूजर्स का कहना था कि आज लोग एआई कंपनियों के लिए डेटा इकट्ठा करके अच्छी कमाई कर रहे हैं, लेकिन भविष्य में यही AI और रोबोट उनकी नौकरियां छीन सकते हैं. कुछ लोगों ने उदाहरण दिया कि जैसे एयरपोर्ट पर पहले कर्मचारी चेक-इन करते थे, लेकिन अब मशीनें यह काम करने लगी हैं. एक यूजर ने लिखा कि आज टेलर, दुकानदार और छोटे काम करने वाले लोग एआई के लिए डेटा दे रहे हैं, लेकिन बाद में मशीनें उन्हीं की जगह ले सकती हैं. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि टेक्नोलॉजी के साथ नए अवसर भी आते हैं और लोगों को बदलते समय के साथ खुद को तैयार करना चाहिए.

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यह पूरा मामला दिखाता है कि एआई अब सिर्फ टेक्नोलॉजी की चीज नहीं रहा, बल्कि आम लोगों के जीवन और रोजगार पर भी असर डालने लगा है. जहां एक तरफ इससे नए कमाई के मौके बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लोगों के मन में भविष्य को लेकर डर और सवाल भी बढ़ रहे हैं.

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