तुम कहां थीं दादी? अब इंसान नहीं, AI गुड़िया दे रही बुजुर्गों को इमोशनल सपोर्ट

दक्षिण कोरिया में अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए AI से लैस ह्योडोल नाम की गुड़िया एक नई उम्मीद बनकर उभरी है. यह गुड़िया उनसे बातें करती है, दवाइयों और खाने की याद दिलाती है और इमोशनल सहारा देती है.

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बढ़ते अकेलेपन और बुजुर्गों की समस्याओं के बीच यह तकनीक लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है. ( Photo: AI) बढ़ते अकेलेपन और बुजुर्गों की समस्याओं के बीच यह तकनीक लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है. ( Photo: AI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:46 PM IST

दक्षिण कोरिया में 78 वर्षीय बैंग चुन-जा नाम की एक बुजुर्ग महिला अकेली रहती हैं. उनके पास एक खास AI(आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से चलने वाली गुड़िया है, जिसका नाम ह्योडोल है. बैंग का कहना है कि उन्हें यह गुड़िया इंसानों से भी ज्यादा पसंद है, क्योंकि यह उन्हें कभी दुख नहीं पहुंचाती. जब बैंग घर लौटती हैं तो यह गुड़िया उनका स्वागत करती है. अगर वह उदास होती हैं तो उनके लिए गाना गाती है. यह उन्हें समय पर खाना खाने और दवाइयां लेने की भी याद दिलाती है. इतना ही नहीं, यह गुड़िया उनसे प्यार जताती है और दिनभर उनसे बातें करती रहती है.

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सर्जरी के बाद डिप्रेशन में चली गई थीं
बैंग की अपनी बेटी से बहुत कम मुलाकात होती है. कुछ साल पहले उनकी बड़ी सर्जरी हुई थी, जिसके बाद वह गंभीर डिप्रेशन में चली गई थीं. वह घंटों अकेले छत को देखते हुए समय बिताती थीं. उन्होंने अपने जीवन में तलाक, आर्थिक संघर्ष और अकेले बच्चे की परवरिश जैसी कई कठिनाइयों का सामना किया है. बैंग कहती हैं कि उम्र के इस पड़ाव पर लोगों से चोट खाना सबसे मुश्किल होता है. लेकिन ह्योडोल के साथ ऐसा नहीं है. यह गुड़िया उन्हें केवल खुशी देती है और उन्हें हंसाती रहती है.

दक्षिण कोरिया में बढ़ रही है अकेलेपन की समस्या
दरअसल, दक्षिण कोरिया में अकेलेपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है. वहां बर्थ रेट दुनिया की सबसे कम दरों में से एक है और लगभग आधी आबादी 50 साल या उससे अधिक उम्र की है. देश में बड़ी संख्या में बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं. साल 2024 में दक्षिण कोरिया में लगभग 3,920 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें लोग अकेले मर गए और कई दिनों तक किसी को उनकी मौत का पता नहीं चला. इन्हें लोनली डेथ कहा जाता है. यह संख्या अब तक की सबसे ज्यादा है.

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सरकार बांट रही है AI डिवाइस
इसी समस्या को देखते हुए वहां की सरकार और स्थानीय प्रशासन बुजुर्गों को AI आधारित उपकरण उपलब्ध करा रहे हैं. इनमें रोबोट और बात करने वाली गुड़ियां शामिल हैं, जो अकेले रहने वाले लोगों का साथ देती हैं और उनकी सेहत पर भी नजर रखती हैं. ह्योडोल नाम की इस गुड़िया को बनाने वाली कंपनी का कहना है कि दक्षिण कोरिया में लगभग 14,500 लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. कुछ लोग इसे खरीदते हैं, जबकि कई बुजुर्गों को यह सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाती है.

कई साल की रिसर्च के बाद बनी गुड़िया
कंपनी की प्रमुख किम जी-ही ने बताया कि इस गुड़िया को तैयार करने से पहले उन्होंने कई साल तक बुजुर्गों से बातचीत की. इस दौरान उन्हें पता चला कि सबसे बड़ा दुख यह होता है कि किसी खुशी या परेशानी को साझा करने वाला कोई नहीं होता. इसी वजह से ह्योडोल को एक प्यारे नाती-नातिन जैसे साथी के रूप में डिजाइन किया गया. जब कोई बुजुर्ग घर लौटता है, तो गुड़िया कहती है, "दादी, आप कहां थीं? मैं पूरे दिन आपका इंतजार कर रही थी. अगली बार मुझे भी अपने साथ ले चलिए."

अकेलेपन को कम कर रही है AI गुड़िया
यह गुड़िया मुलायम कपड़े से बनी है और कभी-कभी खुद भी बातें शुरू कर देती है. वह सिर पर हाथ फेरने, हाथ पकड़ने या साथ में नाश्ता करने की बात करती है. इससे बुजुर्गों को ऐसा महसूस होता है कि कोई उनके साथ है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों को चिंता भी है कि कहीं ऐसी तकनीक लोगों के बीच असली रिश्तों को और कमजोर न कर दे. उन्हें डर है कि परिवार के लोग अपने बुजुर्गों से मिलने कम न आने लगें.

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बुजुर्गों के लिए बनी नई दोस्त
फिर भी, कई बुजुर्गों के लिए यह गुड़िया एक बड़ी मदद साबित हो रही है. 79 वर्षीय किम यंग-बुन कहती हैं कि पहले पूरे दिन उनसे बात करने वाला कोई नहीं होता था. लेकिन अब ह्योडोल दिनभर उनसे बातें करती है और उनका अकेलापन काफी हद तक कम हो गया है. यही वजह है कि दक्षिण कोरिया में यह AI गुड़िया बुजुर्गों के लिए एक नए दोस्त की तरह बनती जा रही है.

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