स्टेशन नहीं, जन्नत है! न प्लेटफॉर्म, न दुकानें! ट्रेन की खिड़की से दिखता है 'दूधसागर'

गोवा और कर्नाटक की सीमा पर स्थित दूधसागर स्टेशन भारत के सबसे अनोखे रेलवे पड़ावों में से एक है. यहां कोई प्लेटफॉर्म या बाजार नहीं है, बल्कि ट्रेन की पटरियों के ठीक बगल में देश का सबसे भव्य चार मंजिला झरना बहता है. क्यों यह जगह फोटोग्राफर्स और एडवेंचर लवर्स की पहली पसंद बनी हुई है.

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ट्रेन की पटरियों के ठीक बगल में गिरता दूधसागर झरना (Photo: ITG) ट्रेन की पटरियों के ठीक बगल में गिरता दूधसागर झरना (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 24 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:02 AM IST

अक्सर ट्रेन के सफर में खिड़की के बाहर दौड़ती हरियाली आंखों को सुकून देती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ट्रेन अचानक अपनी रफ्तार कम कर दे और सामने दूध जैसा सफेद एक विशाल झरना पूरी शान से गिरता हुआ दिखे? गोवा और कर्नाटक की सीमा पर मौजूद दूधसागर का इलाका यात्रियों को बिल्कुल ऐसा ही अविस्मरणीय अनुभव देता है. तो चलिए जानते हैं उस अनोखे रेलवे सेक्शन के बारे में, जहां ट्रेनें यात्रियों को उतारने के लिए नहीं, बल्कि कुदरत के इस करिश्मे का दीदार कराने के लिए धीमी होती हैं.

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घने जंगलों के बीच स्थित दूधसागर रेलवे स्टेशन आम स्टेशनों जैसा नहीं है. यहां न तो प्लेटफॉर्म की चहल-पहल है और न ही दुकानों की कतारें. इसकी असली पहचान है रेलवे ट्रैक के ठीक बगल से गिरता चार मंजिला दूधसागर झरना. जब मानसून में यह झरना पूरे उफान पर होता है, तो गिरते पानी की गूंज और ट्रेन की गड़गड़ाहट मिलकर ऐसा नजारा रचती है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है. यही वजह है कि यह जगह ट्रैवलर्स, एडवेंचर लवर्स और फोटोग्राफर्स के बीच खासा लोकप्रिय है.

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कैसे पहुंचें 'दूध का सागर' देखने?

दूधसागर वॉटरफॉल तक पहुंचने का सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित रास्ता गोवा के कुलेम (Kulem) रेलवे स्टेशन से शुरू होता है. नॉर्थ या साउथ गोवा से पैसेंजर ट्रेन लेकर आप आसानी से कुलेम पहुंच सकते हैं. कुलेम स्टेशन से आगे जाने के लिए वन विभाग द्वारा संचालित जीप सफारी सबसे भरोसेमंद विकल्प है. यह सफारी घने जंगल और कच्चे रास्तों से होकर जाती है और लगभग 45 मिनट का रोमांचक सफर कराती है. इतना ही नहीं, जीप झरने के बिल्कुल नीचे नहीं, बल्कि नजदीकी तय प्वाइंट पर उतारती है, जहां से 10–15 मिनट पैदल चलकर झरने तक पहुंचा जाता है. यहां आपको सीमित समय के लिए रुकने की अनुमति मिलती है, जहां से आप इसकी भव्यता को निहार सकते हैं और फोटो क्लिक कर सकते हैं. लिहाजा, अपनी ट्रिप की प्लानिंग करते समय मौसम और प्रशासनिक नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

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इस खूबसूरत नजारे के साथ सावधानी भी बेहद जरूरी है. दूधसागर झरने के आसपास का इलाका वन्यजीव अभयारण्य में आता है, इसलिए रेलवे ट्रैक पर पैदल चलना पूरी तरह प्रतिबंधित है. कुलेम से झरने तक करीब 11 किलोमीटर का रेल मार्ग संकरी सुरंगों और घने जंगलों से गुजरता है, जहां पैदल सफर जानलेवा साबित हो सकता है. दरअसल, ट्रेन आने पर पटरी के किनारे सुरक्षित खड़े रहने की जगह भी बहुत कम होती है.
 

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