राजगीर की वादियों में 'वीरायतन'... झांकियों में झलकती है जैन परंपरा की कहानियां और इतिहास

बिहार के राजगीर में पहाड़ियों की गोद में बसा वीरायतन संग्रहालय जैन विरासत की अनोखी झलक पेश करता है. मूर्तियों से लेकर इतिहास तक, जानिए क्यों राजगीर की सैर में इस जगह का खास महत्व है.

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वैभवगिरि पहाड़ी के नीचे स्थित बेहद शांत जगह है वीरायतन (Photo: bihar.gov.in) वैभवगिरि पहाड़ी के नीचे स्थित बेहद शांत जगह है वीरायतन (Photo: bihar.gov.in)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:20 PM IST

बिहार का राजगीर एक ऐसी जगह है, जहां पुराने जमाने की ढेरों कहानियां आज भी हवाओं और पहाड़ों में बसी हुई हैं. इसी ऐतिहासिक शहर में वैभवगिरि पहाड़ी के नीचे एक बहुत ही सुंदर म्यूजियम है, जिसका नाम है वीरायतन. यह सिर्फ पुरानी चीजों को जमा करने का ठिकाना नहीं है, बल्कि इसे देखकर आप जैन धर्म के इतिहास को करीब से समझ सकते हैं.

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आसपास का माहौल इतना शांत है कि कदम रखते ही मन खुश हो जाता है. आखिर इस म्यूजियम में ऐसा क्या खास है जो इसे इतना मशहूर बनाता है.

क्यों खास है यह म्यूजियम?

जैसे ही आप इस म्यूजियम के अंदर जाएंगे, आपको सैकड़ों ऐसी झांकियां दिखेंगी जो जैन तीर्थंकरों के जीवन के बारे में बताती हैं. इन झांकियों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये इतनी जीवंत हैं कि लगता है बोल पड़ेंगी. इन्हें बनाने के लिए धातु और लकड़ी का इस्तेमाल कर उनके भावों और मुद्राओं पर बारीक काम किया गया है. यहां जैन धर्म से जुड़ी कई पुरानी वस्तुएं और पेंटिंग्स भी देखने को मिलती हैं, जिनकी प्रदर्शनी यहां लगती रहती है.

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राजगीर का जैन धर्म से बहुत पुराना और गहरा नाता है. यह शहर 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जीवन का एक अहम हिस्सा रहा है और वीरायतन म्यूजियम इसी गौरवशाली इतिहास को आज की पीढ़ी से जोड़ने का काम करता है. म्यूजियम के अंदर पुरानी किताबें, हाथ से बनी शानदार पेंटिंग्स और जैन मंदिरों के छोटे-छोटे सुंदर मॉडल रखे गए हैं. इन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सैकड़ों साल पहले लोगों का रहन-सहन और उनकी सोच कैसी रही होगी. पूरी प्रदर्शनी को इतने सलीके से सजाया गया है कि हर बात आसानी से समझ आ जाती है.

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संस्कृति के साथ सेवा की मिसाल

वीरायतन सिर्फ इतिहास दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की सेवा के लिए भी पहचाना जाता है. यही वजह है कि वीरायतन को नालंदा की एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है, जहां 24 तीर्थंकरों के जीवन का अनूठा चित्रण देखने को मिलता है. म्यूजियम के पास ही 'नेत्र ज्योति सेवा मंदिरम' नाम का एक अस्पताल चलाया जा रहा है.

इस सेंटर में मोतियाबिंद जैसी आंखों की बीमारियों का इलाज एकदम आधुनिक मशीनों से होता है. अनुभवी डॉक्टरों की टीम या तो बिल्कुल मुफ्त या फिर बहुत ही कम खर्च में आंखों के ऑपरेशन करती है. साफ है कि इस जगह पर हमारी पुरानी संस्कृति को बचाने के साथ-साथ इंसानियत की सेवा भी बखूबी की जा रही है.

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घूमने के लिए सही समय

अगर आप यहां घूमना चाहते हैं, तो अक्टूबर से मार्च के बीच का समय सबसे बेस्ट है. इस मौसम में यहां घूमना काफी आरामदायक रहता है. यह म्यूजियम सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है. सबसे अच्छी बात यह है कि बुजुर्गों और सेना से रिटायर हुए जवानों के लिए यहां कोई टिकट नहीं लगता, उन्हें बस अपना आईडी कार्ड दिखाना होता है. अगर आप ट्रेन से आ रहे हैं तो राजगीर स्टेशन सबसे पास है और हवाई जहाज से आने वालों के लिए गया और पटना का एयरपोर्ट सबसे नजदीक है.

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