छोटी उम्र से ही लोग पूरी दुनिया की सैर करने का सपना देखने लगते हैं, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे ही यह सपना महज एक सपना बनकर ही रह जाता है. कभी पैसे तो कभी टाइम की वजह से लोग वर्ल्ड टूर नहीं कर पाते हैं और उनकी इच्छा उनके मन में ही दब जाती है. मगर क्या आप जानते हैं कि भारत के बिहार के छोटे से जिले में रहने वाले लड़के ने वो कमाल कर दिखाया है, जिसकी लोग महज कल्पना ही कर पाते हैं.
जहां ज्यादातर लड़के-लड़कियां 24 साल की उम्र में अपने करियर की फिक्र करते हैं. नौकरी ढूंढने या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे होते हैं, वहीं बिहार के शुभम कुमार ने एक ऐसा काम कर दिखाया है जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया. भागलपुर के बीच बसे एक छोटे से गांव मुंगेर से निकलकर शुभम ने 24 साल की उम्र में दुनिया के 197 देशों की यात्रा पूरी कर ली.
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि शुभम का यह सफर किसी अमीर परिवार, बड़े सपोर्ट सिस्टम या विदेशी पासपोर्ट की मदद से नहीं हुआ. एक मिडिकल क्लास फैमिली से आने वाले शुभम के पिता सरकारी स्कूल में टीचर हैं और गांव की आम जिंदगी, छोटे घर और सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े है, लेकिन इन सबके बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया.
17 साल की उम्र में शुरू किया सफर
साल 2018 में शुभम ने सिर्फ 17 साल की उम्र में अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया था, उन्होंने आसान हिंदी में लोगों को बजट ट्रैवल, वीजा और यात्रा से जुड़ी जानकारी देना शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने लोगों के बीच अपनी खास जगह बना ली, उनकी खासियत यह थी कि वो बिल्कुल साधारण अंदाज में अपनी बातें लोगों के सामने रखते थे, जिससे छोटे शहरों और गांवों के लोग उनसे जुड़ा हुआ महसूस करते थे.
शुभम ने अपने इस शानदार सफर की शुरुआत नेपाल से की थी, जहां भारत से आसानी से पहुंचा जा सकता है. इसके बाद शुभम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और फिर उन्होंने रूस, थाईलैंड, लाओस और फिर कई अन्य देशों की जर्नी की. जब उन्होंने स्टार्ट किया था तो वो महज 10 से 12 हजार रुपये महीने में अपना ट्रैवल मैनेज करते थे.
हालांकि शुरूआत में उनके पास पैसों की कमी थी और इस वजह से वो कई जगह हिचहाइकिंग करते थे, यानी रास्ते में मिलने वाले लोगों से लिफ्ट लेकर सफर तय करते थे. इतना नहीं दूसरे देश में अपने रहने और खानपान के लिए वो वॉलंटियर बनकर काम भी करते थे, ताकि उनका खर्च भी बच पाए.
इक्वाडोर में क्यों नहीं मिली एंट्री
शुभम का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. कई बार वीजा की दिक्कतें आईं, कई बार मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा. एक बार तो इक्वाडोर में उन्हें सिर्फ इसलिए लगभग एंट्री नहीं मिली क्योंकि उनके पासपोर्ट में खाली पन्ने नहीं बचे थे.
शुभम सिर्फ घूमने नहीं जाते थे, बल्कि वो वहां के लोकल लोगों की जिंदगी की झलक भी अपने चैनल के जरिए लोगों को दिखाते थे. वहां के बाजार, आम लोगों के घर, स्थानीय संस्कृति और डेली लाइफ में आने वाली दिक्कतों के बारे में भी बताते थे. शुभम का 197वां देश ब्राजील था, अपने इस सफर के बारे में उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में भी बताया था.
जासूसी का लगा आरोप
कम बजट में ट्रैवल करना कभी-कभी जानलेवा भी हो सकता हैऔर ऐसा ही गैबॉन में शुभम के साथ भी हुआ था. जहां उन पर जासूसी के आरोप लग गए थे, तो मोजाम्बिक में वो विरोध-प्रदर्शनों के बीच फंस गए. वो आम लोगों के बीच बैठा करते थे और उनकी भाषा न समझ आने पर सिर्फ इशारों के जरिए उनको अपनी बात समझाया करते थे.फ्रांस की राजधानी पेरिस के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन का नजारा देखकर वो शॉक्ड रह गए, जहां उनको दीवारों पर भगवान शिव-पार्वती, माता दुर्गा और हिंदू भगवान के पोस्टर लगे दिखाई दिए.
भारतीयों के लिए वीजा फ्री हैं ये छोटे-छोटे देश
शुभम जब फिजी से वापस लौट रहे थे, जिसे उन्होंने मिनी इंडिया बताया. उस दौरान उन्होंने बताया कि भारतीय पासपोर्ट पर 62 देश वीजा फ्री हैं, लेकिन वो देश मैप पर भी आपको जब ही नजर आते हैं, जब आप उनको जूम करके देखते हैं.
भारतीय पासपोर्ट धारक दुनिया के लगभग 62 देशों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल के साथ सफर कर सकते हैं. अफ्रीका में मॉरीशस, सेशेल्स, सेनेगल, ट्यूनीशिया, केन्या, रवांडा, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे, एशिया में नेपाल, भूटान, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, श्रीलंका, कजाकिस्तान, मकाऊ, ईरान, कतर, ओमान, जॉर्डन, लाओस, कंबोडिया.
ओशिनिया में आने वाले फिजी, वानुअतु, कुक आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया, नीयू, पलाऊ, समोआ के साथ कैरबियन और अमेरिका के बारबाडोस, डोमिनिका, ग्रेनाडा, हैती, जमैका, मोंटसेराट, ट्रिनिडाड और टोबैगो, बोलीविया, अल सल्वाडोर शामिल है.
शुभम ने साबित कर दिखाया है कि अपने सपने को पूरा करने के लिए जेब में पैसों से ज्यादा जुनून जरूरी होता है और उसी के बदौलत वो बिना इंग्लिश जाने ही आज 197 देशों को देख चुके हैं.
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