बेहोश होने के पांच मिनट पहले ही सैमसंग की ये घड़ी देगी वॉर्निंग, कंपनी का बड़ा दावा

सैमसंग ने एक बड़ा दावा किया है. कंपनी ने कहा है कि Galaxy Watch6 यूजर को बेहोश होने से पांच मिनट पहले वॉर्निंग दे सकती है. इसके लिए कंपनी ने यूनिवर्सिटी और हॉस्पिटल के साथ मिल कर इसका ट्रायल किया है और 80% सटीक बताया है.

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Galaxy Watch6 Galaxy Watch6

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 08 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:13 PM IST

स्मार्टवॉच अब सिर्फ कदम गिनने, हार्ट रेट देखने या कॉल उठाने का डिवाइस नहीं रह गई है. धीरे-धीरे ये छोटी सी घड़ी हेल्थ मॉनिटरिंग मशीन में बदलती जा रही है. साउथ कोरियन टेक कंपनी Samsung ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी दिखाई है जो आने वाले समय में बड़ी हेल्थ इमरजेंसी को पहले ही पकड़ सकती है.

सैमसंग का दावा है कि उसकी Galaxy Watch बेहोश होने यानी फेंटिंग एपिसोड का संकेत पहले ही पहचान सकती है. Samsung ने साउथ कोरिया के Chung-Ang University ग्वांगम्योंग हॉस्पिटल के साथ मिलकर एक स्टडी की है.

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बेहोश होने से 5 मिनट पहले बता देगी घड़ी

इस रिसर्च में Galaxy Watch6 का इस्तेमाल किया गया और दावा किया गया कि यह घड़ी बेहोश होने की स्थिति को करीब 5 मिनट पहले तक पहचान सकती है. असल में यह टेक्नोलॉजी Vasovagal Syncope यानी VVS पर काम करती है.

यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें अचानक हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर तेजी से गिर जाता है और इंसान बेहोश हो सकता है. कई बार यह तनाव, दर्द, डर या लंबे समय तक खड़े रहने की वजह से भी होता है. आमतौर पर लोग कुछ सेकंड या मिनट में ठीक हो जाते हैं, लेकिन अचानक गिरने से सिर में चोट, फ्रैक्चर या दूसरी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं. 

सैमसंग की इस स्टडी में 132 मरीजों को शामिल किया गया. इन लोगों पर क्लीनिकल टेस्ट किए गए और Galaxy Watch6 ने उनके शरीर के बायोसिग्नल्स को ट्रैक किया.

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इसके बाद AI मॉडल ने हार्ट रेट और बॉडी पैटर्न को समझकर फेंटिंग के संकेत पहचानने की कोशिश की. कंपनी का दावा है कि सिस्टम ने करीब 84.6 प्रतिशत सटीकता के साथ बेहोश होने की स्थिति का अनुमान लगाया. 

घड़ी को कैसे पता चलता है कि इंसान बेहोश होने वाला है?

काम करने का तरीका भी दिलचस्प है. Galaxy Watch में PPG सेंसर लगा होता है. यह सेंसर बॉडी में ब्लड फ्लो और हार्ट रिदम को ट्रैक करता है. इसके साथ HRV यानी Heart Rate Variability डेटा भी लिया जाता है.

आसान भाषा में समझें तो यह आपके दिल की धड़कनों के बीच होने वाले छोटे-छोटे बदलाव को पढ़ता है. फिर AI एल्गोरिद्म इन पैटर्न्स को समझकर खतरे का अंदाजा लगाता है. 

अगर यह टेक्नोलॉजी असली दुनिया में बड़े स्तर पर काम करती है, तो इसका फायदा उन लोगों को सबसे ज्यादा हो सकता है जिन्हें बार-बार चक्कर आने या अचानक बेहोश होने की समस्या होती है.

मान लीजिए कोई इंसान सड़क पर चल रहा है, गाड़ी चला रहा है या सीढ़ियों के पास खड़ा है और घड़ी पहले ही अलर्ट दे दे कि शरीर में कुछ गड़बड़ हो रही है, तो वह खुद को सुरक्षित जगह पर ले जा सकता है या मदद मांग सकता है.

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में बेहद फायदेमंद होगा ये फीचर

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Samsung इस टेक्नोलॉजी को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की दिशा में बड़ा कदम बता रही है. यानी बीमारी या हादसे के बाद इलाज करने के बजाय पहले ही चेतावनी देना. यही वजह है कि अब वियरेबल डिवाइसेज सिर्फ फिटनेस गैजेट नहीं, बल्कि हेल्थ कोच बनते जा रहे हैं. 

Galaxy Watch में पहले से कई हेल्थ फीचर्स मौजूद हैं. इसमें हार्ट रेट मॉनिटरिंग, बल्ड ऑक्सीजन ट्रैकिंग, स्लीप एपनिया और इरेगुलर हार्टबीट डिटेक्शन जैसे फीचर्स मिलते हैं. कुछ मार्केट्स में ECG और बल्ड प्रेशर मॉनिटरिंग भी दिया जाता है. अब फेंटिंग प्रेडिक्शन जैसी टेक्नोलॉजी जुड़ने से स्मार्टवॉच का रोल और बड़ा हो सकता है. 

हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. अभी यह फीचर आम यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है. फिलहाल यह रिसर्च स्टेज में है और सैमसंग ने यह नहीं बताया है कि इसे कब तक Galaxy Watch में रोलआउट किया जाएगा.

कंपनी अभी मेडिकल संस्थानों के साथ और रिसर्च करना चाहती है. इसके अलावा स्मार्टवॉच हेल्थ फीचर्स को लेकर हमेशा एक बहस भी रहती है. कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि वियरेबल डिवाइस मददगार जरूर हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर का विकल्प नहीं माना जा सकता.

हाल की कुछ स्टडी में यह भी सामने आया कि कई स्मार्टवॉच कुछ हेल्थ डेटा में गलती कर सकती हैं, खासकर अलग-अलग बॉडी टाइप्स और स्किन टोन्स में एक्यूरेसी बदल सकती है. 
 

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