फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोंं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की आलोचना की है. उन्होंने नई दिल्ली में चल रहे AI समिट के दौरान सोशल मीडिया कंपनियों और उनके टेक्नोलॉजी एग्जीक्यूटिव्स पर खुद को फ्री स्पीच का फर्जी चैंपियन दिखाने का आरोप लगाया है. इमैनुएल मैक्रों इस वक्त भारत के दौरे पर हैं.
उन्होंने दिल्ली में चल रहे AI इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लिया है. समिट में उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों को फ्री स्पीच के नाम पर मनमानी करने का आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा, 'इनमें कुछ लोग खुद को फ्री स्पीच के समर्थन में बताते हैं. हम फ्री एग्लोरिद्म के सपोर्ट में है, जो पूरी तरह से पारदर्शी हो.' रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने कहा, 'अगर किसी को पता ही नहीं है कि आप कैसे हैं, तो फ्री स्पीच पूरी तरह से बकवास है. बिना ट्रांसपेरेंट एल्गोरिद्म के फ्री स्पीच बेमानी है'
'सभी ऐल्गोरिद्म बायस्ड हैं, हम ये जानते हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है. अगर हमें ये तक नहीं पता कि उनका एल्गोरिद्म कैसे बनाया गया है, उसे कैसे ट्रेन और टेस्ट किया गया है, और वह हमें किस दिशा में ले जाएगा, तो इस तरह के बायस एल्गोरिद्म का लोकतंत्र पर बेहद गंभीर असर हो सकता है.'
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उन्होंने इस विचार को खारिज किया कि प्लेटफॉर्म खुद तटस्थ होने का दावा करते हों, लेकिन चुपचाप यूजर्स को धीरे-धीरे ज्यादा चरमपंथी कंटेंट की ओर धकेलते रहे हों.
मैक्रोंं ने कहा कि वे इन अलग-अलग स्पीच्स के बीच एक ट्रांसपैरेंट रास्ता चाहते हैं. उन्होंने नस्लवादी और हेट स्पीच कंटेंट्स के खिलाफ सेफ गार्ड्स की मांग की है. उन्होंने कहा,'मैं चाहता हूं कि एक तरह की सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहे. मैं नस्लवादी भाषण, नफरत फैलाने वाली बातें और इस तरह के कंटेंट से बचना चाहता हूं.'
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मैक्रों ने ये बातें भारत और फ्रांस के बीच यूनिवर्सिटी पार्टनरशिप्स पर चर्चा के दौरान कहीं है. बता दें कि मैक्रों सरकार फ्रांस और पूरे यूरोपीय संघ में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी का समर्थन करती है. मैक्रों सरकार का मानना है कि बिना कंट्रोल वाले एल्गोरिद्म ना सिर्फ यूजर्स के लिए बल्कि लोकतांत्रिक की स्थिरता के लिए भी खतरा हैं
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