चेक गणराज्य की लिंडा नोस्कोवा (21 वर्षीय) ने विंबलडन 2026 का महिला एकल खिताब जीतकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम अपने नाम कर लिया. सेंटर कोर्ट पर खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में नोस्कोवा ने अपने ही देश की करोलिना मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराया. इस जीत के साथ ही उन्होंने चेक टेनिस के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया. मुचोवा का आखिरी बैकहैंड शॉट बेसलाइन के बाहर जाते ही नोस्कोवा खुशी के आंसुओं के साथ कोर्ट पर घुटनों के बल बैठ गईं.
कुछ समय पहले तक ऐसा लग रहा था कि मैच उनके हाथ से निकल जाएगा, लेकिन निर्णायक सेट में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया. इस जीत के साथ नोस्कोवा विंबलडन महिला एकल खिताब जीतने वाली छठी चेक खिलाड़ी बन गईं. उनसे पहले मार्टिना नवरातिलोवा, जाना नोवोत्ना, पेट्रा क्वितोवा, मार्केटा वोंद्रोशोवा और बारबोरा क्रेजिकोवा यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं. वह 2011 में पेट्रा क्वितोवा के बाद विंबलडन जीतने वाली सबसे युवा महिला खिलाड़ी भी बन गई हैं.
यह नोस्कोवा के करियर का तीसरा डब्ल्यूटीए खिताब और पहला ग्रैंड स्लैम है. पिछले 13 मुकाबलों में यह उनकी 12वीं जीत रही. खास बात यह रही कि टूर्नामेंट के तीसरे दौर में उन्होंने मैच प्वाइंट बचाकर वापसी की थी और उसी जुझारूपन का प्रदर्शन फाइनल में भी किया.
पहले सेट में नोस्कोवा का रहा दबदबा
अपने पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल का दबाव नोस्कोवा पर बिल्कुल नहीं दिखा. उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और शुरुआती ब्रेक लेकर 3-1 की बढ़त बना ली. उनकी दमदार सर्विस और बेसलाइन से आक्रामक शॉट्स के सामने मुचोवा संघर्ष करती नजर आईं. नोस्कोवा ने लगातार सटीक बैकहैंड और फोरहैंड विनर्स लगाए और महज 31 मिनट में पहला सेट 6-2 से अपने नाम कर लिया. उस समय ऐसा लग रहा था कि मुकाबला आसानी से खत्म हो जाएगा.
दूसरे सेट में मुचोवा की शानदार वापसी
दूसरे सेट में भी नोस्कोवा ने लय बरकरार रखी और 5-2 की बढ़त के साथ चैंपियनशिप के लिए सर्विस करने उतरीं. लेकिन यहीं से मैच ने नाटकीय मोड़ लिया. हार के कगार पर खड़ी करोलिना मुचोवा ने जबरदस्त जुझारूपन दिखाया. उन्होंने लगातार पांच चैंपियनशिप पॉइंट बचाए और फिर नोस्कोवा की सर्विस तोड़कर मुकाबले में वापसी कर ली. इसके बाद उन्होंने लगातार गेम जीतते हुए दूसरा सेट 7-5 से अपने नाम किया और मैच को निर्णायक सेट तक पहुंचा दिया.
निर्णायक सेट में नोस्कोवा ने नहीं गंवाया मौका
तीसरे सेट की शुरुआत में मुचोवा ने दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन नोस्कोवा ने तीन ब्रेक पॉइंट बचाते हुए अपनी सर्विस बरकरार रखी. इसके बाद उन्होंने शुरुआती ब्रेक हासिल कर 2-0 की बढ़त बना ली और फिर 3-0 से मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. हालांकि मुचोवा ने अंत तक संघर्ष जारी रखा, लेकिन इस बार नोस्कोवा ने कोई गलती नहीं की. दूसरी बार खिताब के लिए सर्विस करते हुए उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ मैच खत्म किया.
मुचोवा का अंतिम बैकहैंड बाहर जाते ही नोस्कोवा ने अपने करियर का सबसे बड़ा खिताब जीत लिया. मैच खत्म होने के बाद दोनों खिलाड़ियों ने नेट पर एक-दूसरे को गले लगाया. दोनों करीबी दोस्त और हमवतन खिलाड़ियों ने विंबलडन के इतिहास के सबसे यादगार फाइनल में से एक मुकाबला खेला. लिंडा नोस्कोवा ने इस जीत के साथ न सिर्फ अपना पहला ग्रैंड स्लैम जीता, बल्कि महिला टेनिस की नई स्टार के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई.
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