टी20 वर्ल्ड कप को लेकर चल रहे विवाद में पाकिस्तान ने बांग्लादेश के प्रति एकजुटता दिखाने का सिर्फ नाटक किया. हकीकत में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की इसके पीछे अपनी सियासी चाल थी. पाकिस्तान ने केवल बांग्लादेश और भारतीय क्रिकेट बोर्ड के बीच टकराव को और बढ़ाने के लिए पूरा नाटक किया.
पाकिस्तान ने बांग्लादेश के मैचों की मेजबानी की पेशकश तक की और यहां तक कहा गया कि वे खुद भी टूर्नामेंट से हट सकते हैं. लेकिन अब जब बांग्लादेश ने साफ कर दिया है कि वह टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लेगा, तो पाकिस्तान अपने वादे से पलट गया. ऐसे में सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान वाकई टी20 वर्ल्ड कप का बहिष्कार करने वाला था? क्या वह बांग्लादेश के लिए अलग वेन्यू तैयार करने वाला था? अगर ऐसा है तो फिर वह पीछे क्यों हट गया.
पाकिस्तान पीछे हट गया
अगर रिपोर्ट्स पर भरोसा किया जाए, तो पाकिस्तान कभी भी श्रीलंका जाने की अपनी यात्रा टालने वाला नहीं था, जहां उसे टी20 वर्ल्ड कप के सभी मैच खेलने हैं. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पहले ही यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर चुका है और टीम 2 फरवरी की सुबह कोलंबो के लिए रवाना होने वाली है.
यह समझ में आता है कि पाकिस्तान ने बहिष्कार की बात को आधिकारिक रूप क्यों नहीं दिया, क्योंकि ऐसा करने पर उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता.
पीटीआई से बात करते हुए एक सूत्र ने 29 जनवरी को कहा, पीसीबी ने वर्ल्ड कप स्क्वॉड के लिए 2 फरवरी की सुबह कोलंबो रवाना होने की सभी यात्रा व्यवस्थाएं पहले ही कर ली हैं. क्रिकेट में, ठीक राजनीति की तरह, सबसे पहले खुद का हित देखा जाता है.
मोहसिन नक़वी अच्छी तरह जानते हैं कि अपनी स्थिति का इस्तेमाल कैसे किया जाए. टी20 वर्ल्ड कप में न जाना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के साथ रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता था, और इस समय पाकिस्तान ऐसा जोखिम नहीं उठा सकता था.
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पाकिस्तान का त्रिपक्षीय समझौता
यह भी समझना जरूरी है कि पाकिस्तान कभी भी टी20 वर्ल्ड कप से पीछे क्यों नहीं हट सकता था और बहिष्कार की धमकियां क्यों खोखली थीं. 2025 में बीसीसीआई, पीसीबी और आईसीसी के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ था, जिसके तहत 2027 तक आईसीसी टूर्नामेंटों में भारत-पाकिस्तान के सभी मैच न्यूट्रल वेन्यू पर खेले जाएंगे.
जब पाकिस्तान का पूरा वर्ल्ड कप शेड्यूल, फाइनल समेत, श्रीलंका में है, तो फिर उसके पास टूर्नामेंट या भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार का आधार ही क्या था?
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आर्थिक पहलू
आईसीसी हमेशा से यह मानता आया है कि भारत-पाकिस्तान मैच किसी भी टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा दर्शक खींचते हैं. यही वजह है कि आईसीसी हर बड़े टूर्नामेंट का ढांचा इस तरह बनाता है कि दोनों टीमें ग्रुप स्टेज में आमने-सामने हों और आगे भी भिड़ने की संभावना बनी रहे.
अब यह प्रतिद्वंद्विता खेल से ज्यादा व्यूअरशिप का खेल बन चुकी है, खासकर पाकिस्तान की गिरती क्रिकेटिंग स्थिति को देखते हुए. आईसीसी के लिए यह मुकाबला एक व्यावसायिक हथियार है, जिससे उसकी कमाई लगातार बढ़ती रहती है.
पिछले साल जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था, तब भी वे महाद्वीपीय टूर्नामेंट में तीन बार आमने-सामने आए थे. ऐसे में यह सोचना भोला होगा कि पाकिस्तान एक वैश्विक टूर्नामेंट में भारी कमाई का मौका छोड़ देगा, खासकर तब जब यह लड़ाई उसकी अपनी नहीं है.
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