क्रिकेट के सालों पुराने इतिहास में टेस्ट मैचों को धैर्य, तकनीक और साहस की परीक्षा माना जाता है. पांच दिन तक चलने वाला यह फॉर्मेट खिलाड़ियों के जज्बे और हिम्मत की असली कसौटी होता है. लेकिन 29 जनवरी 1998 को खेला गया एक टेस्ट मैच ऐसा भी रहा, जिसने टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा ही बदल दी. यह वो मुकाबला था, जिसमें सिर्फ 10.1 ओवर यानी 61 गेंदों का खेल हुआ, बल्लेबाज डर से कांपते दिखे और आखिरकार अंपायरों को मैच रद्द करने का अभूतपूर्व फैसला लेना पड़ा. आज भी इसे क्रिकेट इतिहास के सबसे डरावने टेस्ट मैचों में गिना जाता है.
यह ऐतिहासिक टेस्ट मुकाबला जमैका के किंग्स्टन स्थित मशहूर सबीना पार्क में खेला गया था. आमतौर पर यह मैदान तेज गेंदबाजों के लिए मददगार माना जाता है, लेकिन उस दिन पिच इतनी खतरनाक साबित हुई कि वही खिलाड़ियों की सबसे बड़ी दुश्मन बन गई. उस मैच में इंग्लैंड की कप्तानी माइक एथर्टन कर रहे थे, जबकि वेस्टइंडीज की कमान ब्रायन लारा के हाथों में थी. टॉस इंग्लैंड ने जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह फैसला बड़ी भूल साबित हो गया.
मैच की पहली ही गेंद से साफ हो गया था कि कुछ ठीक नहीं है. वेस्टइंडीज के दिग्गज तेज गेंदबाज कर्टली एम्ब्रोस और कर्टनी वॉल्श गेंद को पिच पर डालते ही बल्लेबाजों के शरीर की ओर भेज रहे थे. इसकी वजह थी पिच पर पहले से मौजूद गहरी दरारें, जिनसे गेंदें अजीब और खतरनाक उछाल ले रही थीं.
स्टीवर्ट के ये शब्द आज भी जेहन में...
तीसरे ओवर में कर्टनी वॉल्श ने लगातार दो गेंदों पर इंग्लैंड के कप्तान माइक एथर्टन और मार्क बुचर को पवेलियन भेज दिया. इसके बाद जब नासिर हुसैन बल्लेबाजी के लिए आए, तो ओपनर एलेक स्टीवर्ट ने उन्हें देखकर कहा, 'आज शनिवार है, आठ बज चुके हैं. ये तो पूरी तरह लॉटरी है.' कुछ ही देर बाद यह मजाक हकीकत में बदल गया और नासिर हुसैन भी कर्टली एम्ब्रोस की गेंद पर आउट हो गए.
स्थिति इतनी भयावह हो चुकी थी कि इंग्लैंड के खिलाड़ी लगातार चोटिल हो रहे थे. गेंदें कभी हेलमेट पर, कभी कंधे पर, तो कभी शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर लग रही थीं. इंग्लैंड टीम के फिजियो वायने मोर्टन को महज़ 66 मिनट में छह बार मैदान पर दौड़कर खिलाड़ियों का इलाज करना पड़ा. साफ लग रहा था कि अगर खेल जारी रहा, तो कोई गंभीर हादसा हो सकता है.
11वें ओवर की पहली गेंद के बाद इंग्लैंड कप्तान माइक एथर्टन सीधे अंपायरों के पास पहुंचे और साफ शब्दों में कहा कि इस पिच पर खेल जारी रखना खिलाड़ियों की जान से खिलवाड़ होगा. अंपायर स्टीव बकनर और श्रीनिवास वेंकटराघवन ने लंबी चर्चा के बाद साहसिक और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए मैच को खतरनाक पिच के कारण रद्द कर दिया. उस समय इंग्लैंड का स्कोर तीन विकेट के नुकसान पर 17 रन था. एलेक स्टीवर्ट 9 रन बनाकर नाबाद थे, जबकि ग्राहम थोर्प खाता भी नहीं खोल पाए थे.
यह टेस्ट मैच इतिहास में पहला ऐसा मुकाबला बना, जिसे केवल खराब और असुरक्षित पिच के कारण रद्द करना पड़ा. उस समय यह टेस्ट क्रिकेट का सबसे छोटा मैच भी था. हालांकि साल 2009 में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच ही एंटीगा के नॉर्थ साउंड खेला गया टेस्ट मैच गेंदों की संख्या के लिहाज से इससे भी छोटा साबित हुआ, जिसने नया रिकॉर्ड बना दिया. एंटीगा टेस्ट मैच को बेहद खराब आउटफील्ड की वजह से रद्द करना पड़ा और उस मुकाबले में सिर्फ 10 गेंदों का खेल हुआ.
सबीना पार्क का वो टेस्ट मैच आज भी क्रिकेट जगत को यह याद दिलाता है कि खेल से बड़ी खिलाड़ी की सुरक्षा होती है. रोमांच, प्रतिस्पर्धा और रिकॉर्ड्स अपनी जगह हैं, लेकिन जब हालात जानलेवा हों, तो मैच रोकना ही सबसे बड़ा फैसला होता है. 29 जनवरी 1998 का यह टेस्ट मैच भले ही सिर्फ 61 गेंदों का रहा हो, लेकिन इसकी कहानी क्रिकेट इतिहास में हमेशा जिंदा रहेगी....
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