2024 में टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद से टीम इंडिया किसी विपक्षी से नहीं, अपने ही बनाए पैमानों से लड़ रही थी. 41 में से 31 जीत- ये सिर्फ आंकड़ा नहीं, वर्चस्व की घोषणा थी. टी20 इतिहास के 11 सबसे बड़े स्कोरों में तीन भारत के नाम. यानी बल्लेबाजी सिर्फ चल नहीं रही थी, दौड़ रही थी.
लेकिन एक हार ने पूरी कहानी हिला दी.
दोनों व्हाइट-बॉल फॉर्मेट में 17 मैचों की लगातार जीत का सिलसिला… और साउथ अफ्रीका ने ब्रेक लगा दिया. अचानक घरेलू वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल की सीट पक्की नहीं दिख रही. सवाल उठने लगे- क्या यह टीम दबाव झेल पाएगी?
गुरुवार यानी आज चेन्नई में भारत सुपर-8 के अपने दूसरे मुकाबले में जिम्बाब्वे से भिड़ेगा. लेकिन असली दबाव उससे पहले शुरू हो सकता है. अगर दिन के पहले मैच में वेस्टइंडीज, साउथ अफ्रीका को हरा देता है, तो भारत के सामने सीधी शर्त होगी- जीतो, वरना समीकरण में उलझो.
उस स्थिति में मुकाबला सिर्फ जीत का नहीं रहेगा, बल्कि नेट रन रेट की जंग भी छिड़ जाएगी. यानी कितने रन से जीतते हैं, कितनी तेजी से पीछा करते हैं- हर गेंद का हिसाब मायने रखेगा.
ऐसी स्थिति की आदत इस टीम को नहीं रही है. 2021 टी20 वर्ल्ड कप के बाद किसी आईसीसी टूर्नामेंट में भारत शायद ही कभी इतने खुले ‘करो या मरो’ दबाव में उतरा हो. खासकर मौजूदा टीम के युवा बल्लेबाज- जिनकी पहचान ही हाई-रिस्क क्रिकेट है. वे जोखिम लेते हैं, बड़े शॉट खेलते हैं और अक्सर सफल भी होते हैं.
डरना मना है...
बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने साफ कहा- दबाव से भागोगे तो खत्म हो जाओगे. उनका सीधा संदेश है- अगर घबराहट नहीं हो रही, तो आप क्रिकेट नहीं खेल रहे.
मतलब साफ है- यह मैच बड़ा है, दबाव बड़ा है, लेकिन बहाना कोई नहीं. भारत में वर्ल्ड कप खेल रहे हो, तो उम्मीदों का वजन उठाना ही पड़ेगा.
111… और आईना
साउथ अफ्रीका के खिलाफ 111 पर ऑलआउट--- दो साल में सबसे खराब प्रदर्शन. यह सिर्फ हार नहीं थी, तमाचा था. लेकिन कोटक का कहना है- उसे ढोते रहोगे तो डूबोगे.
रणनीति नहीं बदलेगी. वही आक्रामक ब्रांड...दो विकेट जल्दी गिरें तो 6-8 गेंद समझने में लगाओ, लेकिन पहली गेंद से डरकर मत खेलो. टी20 में अगर पावरप्ले में हाथ बांध लिए, तो स्कोर ‘पार’ से नीचे ही रहेगा.
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युवा बल्लेबाजों की अग्निपरीक्षा
अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा- आईपीएल प्लेऑफ का दबाव झेल चुके हैं. लेकिन वर्ल्ड कप अलग जानवर है. यहां हर गलती सुर्खी बनती है. कोटक का भरोसा कायम है- 'अगर वर्ल्ड कप जीतना है तो यह दबाव संभालना ही होगा.'
यानी संदेश साफ है या तो आप इस दबाव को तोड़ेंगे, या दबाव आपको...
चेन्नई में फैसला
टीम हाई-स्कोरिंग पिच की की और देख रही है. अगर रन बरसे, तो भारत को शुरुआत से ही हमला बोलना होगा. पावरप्ले में 50-60 नहीं, मैच की दिशा चाहिए.
यह मुकाबला सिर्फ दो अंक का नहीं है. यह मैच बताएगा- क्या भारत अब भी वही बेकाबू, बेखौफ टीम है... जिसने 31 जीतें समेटीं…या फिर 111 का साया अभी भी पीछा कर रहा है?
चेन्नई की रात या तो रफ्तार लौटाएगी… या कैलकुलेटर निकालने पर मजबूर कर देगी.
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