सुपर-8 के दबाव भरे मुकाबले में जब मैच फिसलता हुआ दिख रहा था, तब इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने बल्ला उठाया और इतिहास लिख दिया. पाकिस्तान के खिलाफ उनका शतक सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं था, बल्कि कप्तानी की वह मिसाल थी, जो टूर्नामेंट की दिशा बदल देती है.
ब्रूक पुरुष टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में शतक (100 रन, 51 गेंद) लगाने वाले पहले कप्तान बन गए. इससे पहले सर्वाधिक स्कोर 98 रन था, जो क्रिस गेल ने 2010 में भारत के खिलाफ बनाया था. ब्रूक ने उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए तीन अंकों का आंकड़ा छुआ और मैच को इंग्लैंड की झोली में डाल दिया.
इतना ही नहीं, वह इंग्लैंड के लिए पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक जड़ने वाले पहले कप्तान भी बने. उन्होंने इयोन मॉर्गन के 2019 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाए 91 रनों के सर्वाधिक कप्तानी स्कोर को पार किया.
दबाव, उम्मीद और नॉकआउट जैसी स्थिति—इन सबके बीच ब्रूक की पारी नेतृत्व का बयान थी. उन्होंने शुरुआत से ही इरादा स्पष्ट किया. पावरप्ले में आक्रामकता दिखाई, बीच के ओवरों में जोखिम और समझदारी का संतुलन रखा और अंत में मैच को जीत की दहलीज पर ला खड़ा किया. इसके साथ ही इंग्लैंड की टीम ने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली.
यही वह टेम्पलेट है, जिसकी इस वक्त भारत को जरूरत है.
अब भारत की बारी
सुपर-8 में साउथ अफ्रीका से पहला मुकाबला गंवाने के बाद भारतीय टीम दबाव में है. हार ने सुपर-8 की अंक तालिका को उलझा दिया है और सेमीफाइनल की राह कठिन बना दी है.
भारत के सामने अब दो स्पष्ट रास्ते हैं-
अगर टीम जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ दोनों मुकाबले जीत लेती है, तो चार अंकों के साथ सेमीफाइनल की दावेदारी मजबूत होगी. हालांकि, अन्य परिणामों की स्थिति में नेट रन रेट निर्णायक बन सकता है.
दूसरी ओर, अगर भारत सिर्फ एक मैच जीतता है, तो उसे बाकी नतीजों पर निर्भर रहना होगा और तब भी नेट रन रेट ही अंतिम फैसला करेगा.
मतलब साफ है- अब जीत का अंतर और खेलने का अंदाज उतना ही अहम है जितना परिणाम.
सूर्या पर नजर
इस स्थिति में सबसे ज्यादा निगाहें कप्तान सूर्यकुमार यादव पर हैं.
टूर्नामेंट में वह भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं. पांच मैचों में 180 रन, 45 की औसत और 84* का उच्चतम स्कोर उनके नाम है. उनके बल्ले से 17 चौके और 6 छक्के निकले हैं.
आंकड़े बताते हैं कि सूर्या फॉर्म में हैं. लेकिन टी20 के इस चरण में सवाल सिर्फ फॉर्म का नहीं, प्रभाव का है. 127.65 का स्ट्राइक रेट स्थिरता दर्शाता है, पर सुपर-8 के दबाव में टीम को उससे अधिक आक्रामकता की दरकार है.
भारत को एक ऐसी कप्तानी पारी चाहिए, जो सिर्फ स्कोरबोर्ड नहीं, विपक्ष की सोच भी बदल दे.
पावरप्ले में फर्क
ब्रूक की पारी से एक स्पष्ट संदेश मिला- दबाव में बचाव नहीं, आक्रमण काम आता है. तभी वह पारी की पहली ही गेंद पर विकेट गिरते ही क्रीज पर उतर आए. मजे की बात है कि ब्रूक अपने टी20 इंटरनेशनल में पहली बार नंबर-3 पर उतरे थे और अपनी करिश्माई पारी से पाकिस्तान से मैच छीन लिया.
भारत का पावरप्ले रनरेट इस टूर्नामेंट में विस्फोटक नहीं रहा है. केवल एक मौके को छोड़ दें तो 40-45 रन की शुरुआत के बाद मिडिल ओवर्स में रनगति पर दबाव बढ़ता दिखा है. और मिडिल ओवर्स में स्पिन जाल बुन लेता है.
(भारत का इस टूर्नामेंट में अब तक का पावरप्ले स्कोर- 46/4, 86/1, 52/1, 51/2 और 31/3)
अगर जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले छह ओवरों में भारत 55-65 रन बना लेता है, तो मैच की दिशा शुरू से ही बदल सकती है. यही रणनीति वेस्टइंडीज के खिलाफ भी कारगर हो सकती है.
नेतृत्व का क्षण
टी20 क्रिकेट में अक्सर एक पारी पूरी कहानी बदल देती है. सुपर-8 जैसे चरण में यह और भी सच हो जाता है.
ब्रूक का शतक इंग्लैंड के लिए ऐसा ही क्षण था. अब भारत को भी वैसी ही पारी की तलाश है.
अगर सूर्या 35-40 गेंदों में 80-90 रनों की कप्तानी पारी खेल देते हैं, तो न सिर्फ अंक तालिका सुधरेगी, बल्कि ड्रेसिंग रूम का आत्मविश्वास भी लौटेगा.
सुपर-8 की पहली हार ने भारत की राह कठिन जरूर की है, लेकिन दरवाजा बंद नहीं हुआ है. सेमीफाइनल का टिकट अब सिर्फ गणित से नहीं, बल्कि इरादे से मिलेगा. ब्रूक ने दिखा दिया है कि कप्तान की पारी इतिहास लिख सकती है. अब बारी भारत के कप्तान की है.
अगले दो मुकाबले तय करेंगे कि क्या सूर्या भी अपने बल्ले से वही बयान दे पाएंगे, जिसकी टीम को इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत है.
विश्व मोहन मिश्र