भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को बुधवार को बड़ी कानूनी राहत मिली, जब अलीपुर कोर्ट ने 2018 के चर्चित चेक फ्रॉड मामले में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया. यह मामला उनकी पत्नी हसीन जहां ने दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि शमी ने ₹1 लाख के चेक से जुड़ी धोखाधड़ी की है.
सुनवाई के दौरान शमी कोर्ट में मौजूद रहे. फैसला आने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें पहले से भरोसा था कि फैसला उनके पक्ष में आएगा, क्योंकि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है. शमी ने कहा- मैंने जितने भी बकाया थे, सब क्लियर कर दिए थे. सब कुछ सेटल है.
गौरतलब है कि 2018 में हसीन जहां ने शमी और उनके परिवार के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराए थे. इनमें कुछ गैर-जमानती धाराएं भी शामिल थीं. लंबे समय से यह मामला चर्चा में बना हुआ था और दोनों के रिश्तों को लेकर कई बार सार्वजनिक विवाद भी सामने आए.
हसीन जहां फिलहाल कोलकाता स्थित शमी के घर में रहती हैं, लेकिन बेटी की पढ़ाई के चलते दिल्ली और कोलकाता के बीच आना-जाना करती रहती हैं. दूसरी ओर, शमी नेशनल टीम की ड्यूटी नहीं होने पर उत्तर प्रदेश के अमरोहा में रहते हैं. मौजूदा समय में वह आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स टीम का हिस्सा हैं, हालांकि उन्होंने मंगलवार को खेले गए मुकाबले में हिस्सा नहीं लिया था.
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कोर्ट से बाहर निकलते समय शमी ने कहा कि मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह हालात संभालने की कोशिश करना आसान नहीं होता, लेकिन वह हमेशा संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते हैं.
इस बीच दोनों के बीच चल रहा मेंटेनेंस विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. हसीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर गुजारा भत्ते की राशि बढ़ाने की मांग की है. कलकत्ता हाइकोर्ट के आदेश के मुताबिक शमी हर महीने बेटी के लिए ₹2.5 लाख और हसीन जहां के लिए ₹1.5 लाख देते हैं. कुल ₹4 लाख की इस राशि को हसीन जहां ने अपनी मासिक जरूरतों के लिए अपर्याप्त बताया है.
अनिर्बन सिन्हा रॉय