आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत ने पाकिस्तान को ना सिर्फ करारी शिकस्त दी, बल्कि सुपर 8 में भी अपनी जगह लगभग पक्की कर ली. 61 रनों से मिली इस शानदार जीत के बीच मैदान पर एक ऐसा घटनाक्रम भी देखने को मिला, जिसने कुछ देर के लिए भारतीय खिलाड़ियों के बीच थोड़ा तनाव पैदा कर दिया.
मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 175 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया. जवाब में पाकिस्तान की पारी दबाव में रही और उसकी पूरी टीम 18 ओवर में ही ऑलआउट हो गई. इस बड़ी जीत के बावजूद मैच के दौरान एक ऐसा पल भी आया, जिसने ड्रेसिंग रूम के माहौल को कुछ देर के लिए गरमा दिया.
आखिरा पूरा माजरा क्या था?
दरअसल मुकाबले के दौरान कुलदीप यादव ने बाउंड्री लाइन पर शाहीन आफरीदी का आसान कैच छोड़ दिया. 18वें ओवर में हार्दिक पंड्या की दूसरी गेंद पर शाहीन ने स्लॉग खेलने की कोशिश की थी और गेंद ऊंची गई थी. कुलदीप गेंद के नीचे अच्छी तरह सेट थे, लेकिन आखिरी क्षणों में एकाग्रता की कमी के कारण गेंद उनके हाथों से छिटककर सीधे बाउंड्री के पार गिरी और बल्लेबाज के खाते में छह रन जुड़े
इससे ठीक पिछली गेंद पर विकेटकीपर ईशान किशन भी कैच नहीं पकड़ पाए थे. लगातार दो मौकों के हाथ से निकलने पर गेंदबाज हार्दिक पंड्या नाराज दिखे. मैच समाप्त होने के बाद जब खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम की ओर लौट रहे थे, तब हार्दिक को कुलदीप यादव से तीखे अंदाज में बात करते देखा गया. कप्तान सूर्यकुमार यादव भी कुलदीप पर झल्लाते नजर आए. उस दौरान तिलक वर्मा के चेहरे पर चिंता झलक रही थी, जबकि रिंकू सिंह माहौल को शांत करने की कोशिश करते दिखाई दिए.
हार्दिक पांड्या की नाराजगी की वजह साफ थी. अगर कुलदीप यादव वह कैच पकड़ लेते तो मैच उसी समय खत्म हो जाता. इसके बजाय उनके बॉलिंग खाते में 6 रन जड़े और उन्हें अतिरिक्त गेंदें फेंकनी पड़ीं. बड़े मैचों में ऐसी छोटी गलतियां भी खिलाड़ियों के लिए भावनात्मक प्रतिक्रिया का कारण बन जाती हैं.
हालांकि, इस घटना के बाद हार्दिक पंड्या ने शानदार पेशेवर अंदाज दिखाया.उन्होंने खुद को संयमित किया और 18वें ओवर की आखिरी गेंद पर उस्मान तारिक का विकेट लेकर भारत की जीत पक्की कर दी. उनकी गेंदबाजी ने साबित किया कि दबाव के बावजूद वह मैच फिनिश करने की क्षमता रखते हैं. भारत की यह जीत कई मायनों में खास रही. एक तरफ टीम ने दबाव में शानदार प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखा कि जीत के बावजूद खिलाड़ी छोटी-छोटी गलतियों को लेकर कितने गंभीर रहते हैं. बड़े टूर्नामेंट में यही पेशेवर रवैया टीम को और मजबूत बनाता है.
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