देवदत्त पडिक्कल का बल्ला घरेलू मैचों में गरज रहा है. सोमवार को उत्तराखंड के खिलाफ रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में उन्होंने दोहरा शतक जड़कर भारत के टेस्ट चयनकर्ताओं को समय रहते बड़ा संदेश दिया.
लखनऊ के इकाना स्टेडियम में बल्लेबाजी करते हुए इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने दबाव की स्थिति में शानदार और नियंत्रित पारी खेली. हाई-स्टेक्स सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने कर्नाटक की पारी को मजबूती दी. पडिक्कल ने 288 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की और पूरे दिन उत्तराखंड के गेंदबाजी आक्रमण पर धैर्य और अधिकार के साथ नियंत्रण बनाए रखा.
दबाव में बैटिंग करने उतरे थे पडिक्कल
कर्नाटक की शुरुआत अच्छी नहीं रही और सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल जल्दी आउट हो गए. लेकिन इसके बाद मुकाबले का रुख बदल गया. पडिक्कल ने केएल राहुल के साथ मिलकर 278 रनों की विशाल साझेदारी की, जिससे उत्तराखंड पूरी तरह मैच से बाहर हो गया.
राहुल 141 रन बनाकर आदित्य रावत की गेंद पर कैच एंड बोल्ड हुए, लेकिन पडिक्कल बिना घबराए कर्नाटक की पारी को आगे बढ़ाते रहे. उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट के अनुरूप लंबी और संयमित पारी खेलते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया.
पडिक्कल की इस पारी ने न केवल कर्नाटक को 400 रन के पार पहुंचाया, बल्कि यह उनके घरेलू करियर की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक बन गई. उन्होंने 2023–24 सीजन में बनाए गए अपने पिछले सर्वश्रेष्ठ 193 रनों के स्कोर को पीछे छोड़ दिया.
पडिक्कल का घरेलू पावरशो
पडिक्कल आखिरकार 330 गेंदों पर शानदार 232 रन बनाकर आउट हुए. अपनी इस पारी में उन्होंने 29 चौके और तीन छक्के लगाए. अपने 116वें रन के साथ कर्नाटक के कप्तान ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 3,500 रन पूरे किए. अब उनके नाम 53 मैचों में 3,616 से अधिक रन हैं, औसत लगभग 42 का है, जिसमें नौ शतक और 19 अर्धशतक शामिल हैं.
यह रणजी सीजन उनके लिए खासा सफल रहा है. पांच मैचों की नौ पारियों में उन्होंने 520 से अधिक रन बनाए हैं, औसत 60 से ऊपर है, जिसमें दो शतक और एक अर्धशतक शामिल हैं.
क्या मिलेगा टेस्ट में दोबारा मौका?
पडिक्कल भारत के लिए दो टेस्ट मैच खेल चुके हैं. उन्होंने तीन पारियों में 90 रन बनाए, जिसमें 2024 में धर्मशाला में इंग्लैंड के खिलाफ 65 रनों की पदार्पण अर्धशतकीय पारी शामिल है.
हालांकि भारत के लिए नंबर तीन पर उनके आंकड़े अब तक साधारण रहे हैं. दो पारियों में उन्होंने 25 रन बनाए हैं और औसत 12.50 का है. इसके बावजूद चयनकर्ता टेस्ट मध्यक्रम में स्थिरता और गहराई की तलाश में हैं, खासकर विदेशी दौरों और बदलाव के दौर को देखते हुए.
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