2007 में पहला टी20 विश्व कप खेला गया था. उसके बाद 2026 तक 19 साल में यह टूर्नामेंट 10वीं बार हो रहा है. लेकिन इस बार एक ऐतिहासिक पल बनने से पहले ही टूटता नजर आ रहा है... क्योंकि यह पहली बार होता, जब टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की कमान एक हिंदू खिलाड़ी के हाथों में होती. मगर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की कट्टर सोच की वजह से इस खिलाड़ी का सपना चकनाचूर होने की कगार पर है. मौजूदा टी20 कप्तान को अपने करियर के सबसे बड़े मंच से सिर्फ इसलिए बाहर होने की ओर धकेला जा रहा है... क्योंकि टीम बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की 'जिद' से बंधी हुई है.
जिस 31 साल के स्टार हिंदू खिलाड़ी का सपना बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की कट्टर रवैये से टूटने की ओर फिसलता जा है, वह खिलाड़ी-भर नहीं... एक कृष्ण भक्त भी है. इसका प्रमाण उसके इंस्टाग्राम बायो में साफ दिखता है, जहां उसने खुद को ‘भगवान कृष्ण का दास’ लिखा है. बात हो रही है बांग्लादेश टी20 टीम के कप्तान लिटन दास की.
लिटन दास को टी20 विश्व कप 2026 के लिए बांग्लादेश टीम की कप्तानी सौंपी गई थी... लेकिन सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल, BCB और अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम के पूर्वाग्रह के चलते अब उनका इस विश्व कप में शामिल होने पर ग्रहण लग चुका है. इससे भी बड़ा सवाल आगे का है- क्योंकि अगले टी20 विश्व कप तक लिटन की उम्र करीब 33 वर्ष हो चुकी होगी. उस समय फिटनेस और फॉर्म दोनों ही चयन के महत्वपूर्ण कारक बनेंगे. लिहाजा यह भी अनिश्चित है कि क्या उन्हें दोबारा टी20 कप्तान के रूप में मौका मिलेगा या नहीं.
2021 से 2025 के बीच लिटन दास ने 29 बार बांग्लादेश की टी20 टीम की कप्तानी की.15 जीत, 13 हार और एक बेनतीजा... उनका यह रिकॉर्ड मजबूत था और 2026 टी20 विश्व कप में वह पहली बार विश्व मंच पर कप्तान बनने जा रहे थे. यह भी पहली बार होता जब टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की कमान एक हिंदू खिलाड़ी के हाथों में होती.
2007 में दक्षिण अफ्रीका में हुए पहले टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की कप्तानी मोहम्मद अशरफुल ने की थी. 2009 में भी नेतृत्व उन्हीं के पास रहा. 2010 में जिम्मेदारी शाकिब अल हसन को मिली. इसके बाद 2012 और 2014 के टी20 विश्व कप में टीम की कमान मुश्फिकुर रहीम के हाथों में रही.
2016 में मशरफे मुर्तजा ने बांग्लादेश का नेतृत्व किया, जबकि 2021 में कप्तान बने महमूदुल्लाह. 2022 के टी20 विश्व कप में फिर एक बार शाकिब अल हसन के हाथों में कमान लौटी. वहीं, 2024 के टी20 विश्व कप में नजमुल हुसैन शांतो कप्तान बने और टीम सुपर-8 चरण तक पहुंची.
यानी बात साफ है- 2026 में लिटन दास के पास न सिर्फ पहली बार टी20 विश्व कप में कप्तानी करने का मौका था, बल्कि बांग्लादेश को विश्व विजेता बनाने का एक और अवसर भी. टी20 वैसे भी ‘मोमेंट का गेम’ है- जहां किसी भी दिन कोई टीम इतिहास लिख सकती है. क्रिकेट को ‘अनिश्चितताओं का खेल’ यूं ही नहीं कहा जाता.
...लेकिन पाकिस्तान के झांसे और राजनीतिक-सुरक्षा तर्कों के दबाव में आकर BCB ने जिस तरह की लाइन अपनाई, उसने नुकसान दो तरफा किया- लिटन दास के व्यक्तिगत करियर को भी और बांग्लादेशी क्रिकेट को भी. ICC बोर्ड मीटिंग में 16 में से 14 सदस्यों ने BCB की मांग के खिलाफ वोट दिया और मैच ट्रांसफर का प्रस्ताव खारिज कर दिया- केवल पाकिस्तान और बांग्लादेश ही इस प्रस्ताव के पक्ष में थे.
IPL के मसले पर मुस्ताफिज़ुर रहमान को हटाए जाने की प्रतिक्रिया में जो कुछ ढाका ने शुरू किया, उससे कही ना कहीं लिटन दास का व्यक्तिगत और बांग्लादेश के क्रिकेट का नुकसान हुआ है.
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22 जनवरी को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया कि वे भारत में टी20 विश्व कप नहीं खेलना चाहते और अपने मैच श्रीलंका में कराने की मांग की. बोर्ड ने सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि भारत में उनके खिलाड़ी सुरक्षित नहीं रहेंगे, इसलिए वेन्यू बदलना जरूरी है. कुल मिलाकर यह भारत में विश्व कप खेलने का एक तरह से बायकॉट ही था.
यह कदम आगे चलकर BCB के लिए कई तरह के नुकसान लेकर आ सकता है- जिनमें राजस्व (रेवेन्यू शेयर) में कटौती, प्रसारण अधिकारों पर असर, ICC के साथ भविष्य के संबंधों में तनाव जैसे मुद्दे शामिल हैं.
लिटन दास ने 'फिक्स मीटिंग' में कहा, मैं खेलना चाहता हूं वर्ल्ड कप
इस बायकॉट से सबसे ज्यादा परेशान और असहज होने वाला खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि बांग्लादेश टी20 टीम के कप्तान लिटन दास थे. 22 जनवरी को हुई उस ‘फिक्स्ड मीटिंग’ में उन्होंने खेल सलाहकार आसिफ नजरुल और BCB अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम के सामने साफ कहा कि वे विश्व कप खेलना चाहते हैं और टीम को भारत भेजा जाना चाहिए. लिटन को टेस्ट कप्तान नजमुल हसन शांतो सहित कई खिलाड़ियों का समर्थन भी मिला, लेकिन बोर्ड की पहले से तय मंशा के आगे उनकी बात अनसुनी कर दी गई.
हद तो यह रही कि खिलाड़ियों की आपत्ति और मांग को दबा दिया गया. बैठक से बाहर निकलने के बाद BCB की ओर से ऐसा बयान दिया गया मानो खिलाड़ी ही विश्व कप खेलने के समर्थन में नहीं थे...जबकि सच्चाई उलट थी- सबसे ज्यादा खेलने की मांग कप्तान की तरफ से ही आई थी.
इसे ‘फ़िक्स मीटिंग’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि 21 जनवरी को जब ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) ने BCB की वेन्यू बदलने वाली मांग ठुकराई, तब ढाका की तरफ़ से यह कहा गया था कि वे खिलाड़ियों से बात करके अंतिम निर्णय लेंगे. लेकिन 22 जनवरी को हुई बैठक में खिलाड़ियों की राय का कोई असर दिखा ही नहीं. वह मीटिंग सहमति या सलाह के लिए नहीं, बल्कि पहले से तय फैसले की औपचारिक घोषणा भर थी.
बाद में यह भी सामने आया कि खेल सलाहकार आसिफ नजरुल पहले ही अंतिम निर्णय ले चुके थे कि टीम भारत नहीं जाएगी और बायकॉट ही रास्ता होगा. यानी जिस मीटिंग को ‘कंसल्टेशन’ बताकर पेश किया गया, उसका असल उद्देश्य सिर्फ पहले से तय निर्णय खिलाड़ियों पर थोपना था.
इस पूरी प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान आने वाले दिनों में बांग्लादेश क्रिकेट और वहां के खिलाड़ियों को ही झेलना पड़ेगा- मैदान पर भी, और उसके बाहर भी.
खिलाड़ियों की बात ना सुनी गई, बस उसे केवल थोपा गया. आसिफ नजरुल ने बाद में ICC पर ‘उचित न्याय’ (Proper justice) ना देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ना तो ICC और ना ही भारत सरकार ने बांग्लादेश की चिंताओं को गंभीरता से लिया. वहीं खिलाड़ियों के बीच निराशा इतनी गहरी है कि एक खिलाड़ी ने यहां तक कह दिया कि अगर हम नहीं गए तो नुकसान हमारा ही है, क्रिकेट ही खत्म हो जाएगा.
BCB अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने खिलाड़ियों को संभालने की कोशिश की, लेकिन सारी चीजें बेअसर रहीं. वहीं 22 जनवरी को नजरुल से खिलाड़ियों संग मीटिंग पर सवाल पूछा गया था.
सवाल कुछ ऐसा था- क्या खिलाड़ियों को इस बायकॉट के फैसले में शामिल किया गया है? इस पर उन्होंने कहा- हमने खिलाड़ियों से मुलाकात कर सरकार के नजरिए और फैसले की वजहें समझाईं. यह एक प्राइवेट बातचीत थी, इसलिए खिलाड़ियों ने क्या कहा? इसका खुलासा नहीं होगा. लेकिन वे हालात को समझते नजर आए. यानी एक बात तो क्लियर कट है लिटन दास और नजमुल हसन शांतो ने मीडिया के सामने ढकोसलेबाजी की और झूठ बोला.
वैसे टी20 वर्ल्ड कप के शेड्यूल के मुताबिक पहले बांग्लादेश को ग्रुप C में रखा गया था. इसके पहले तीन मैच कोलकाता में होने थे. इसके बाद बांग्लादेश अपना आखिरी ग्रुप मैच 17 फरवरी को मुंबई में नेपाल के खिलाफ खेलना था. लेकिन उसकी जगह अब स्कॉटलैंड खेलती दिख सकती है.
बांग्लादेश ने क्यों किया टी20 वर्ल्ड कप भारत में ना खेलने का फैसला
हाल ही में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव तब देखने को मिला, जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार की खबरें सामने आईं. इसका असर क्रिकेट पर भी पड़ा. इसके बाद कोलकाता नाइटराइडर्स फ्रेंचाइजी ने मुस्ताफिजुर रहमान का कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर दिया और उन्हें आईपीएल 2026 से बाहर कर दिया. जवाब में बांग्लादेश ने आईपीएल के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके बाद BCB ने टी20 विश्व कप के अपने मैच श्रीलंका में कराने की मांग तेज कर दी, जिसे ICC ने स्वीकार नहीं किया.
22 जनवरी की बैठक के बाद BCB ने किया बायकॉट
ICC से 21 जनवरी को आधिकारिक संदेश मिलने के बाद BCB अध्यक्ष ने बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल से मुलाकात की. इस बैठक में यह तय हुआ कि आसिफ नजरुल गुरुवार (22 जनवरी) दोपहर से पहले वर्ल्ड कप स्क्वॉड में शामिल खिलाड़ियों के साथ बैठक करेंगे. इस बैठक में खिलाड़ियों की राय ली गई , जिसके बाद तय हुआ कि वो भारत में वर्ल्ड कप नहीं खेलना चाहते हैं.
Krishan Kumar