आईपीएल में ज्यादातर टीमें बल्लेबाजों को खुश करने वाली क्रिकेट खेल रही हैं. हर मैच में 220+, हर ओवर में छक्के, हर गेंद पर ‘इम्पैक्ट’. लेकिन गुजरात टाइटन्स (Gujarat Titans) ने इस पूरे तमाशे में टेस्ट मैच वाली बेरहमी घोल दी है.
GT के तेज गेंदबाज बल्लेबाजों को आउट करने नहीं आते… उन्हें परेशान करने आते हैं.
नई गेंद से मोहम्द सिराज और कगिसो रबाडा जब दौड़ते हैं, तो सामने वाला बल्लेबाज रन कम और बचने के रास्ते ज्यादा सोचता है. फिर बदलाव में आते हैं प्रसिद्ध कृष्णा और जेसन हेल्डर. ऊपर से बैकअप में अर्शद खान जैसे पेसर.
और जब बल्लेबाज सोचता है कि अब स्पिन आएगी और थोड़ी राहत मिलेगी… तब सामने खड़े मिलते हैं राशिद खान. GT की गेंदबाजी देखकर लगता है जैसे टीम मीटिंग में सिर्फ एक लाइन बोली जाती होगी- 'स्टंप बाद में देखना… पहले बैटर को असहज करो.'
बाकी टीमें डेथ ओवर्स में यॉर्कर ढूंढती फिरती हैं. GT के गेंदबाज हार्ड लेंथ पर ऐसे अड़े रहते हैं जैसे टेस्ट मैच का पांचवां दिन चल रहा हो. गेंद सीने के पास उठती है. पुल मारो तो कैच. कट मारो तो एज. आगे बढ़ो तो बीट.
यानी बल्लेबाज के पास शॉट कम, गलतियां ज्यादा बचती हैं.
नेहरा ने IPL में ‘फास्ट बॉलिंग कल्चर’ खड़ा कर दिया
हेड कोच आशीष नेहरा की सबसे बड़ी खूबी यही है कि उन्होंने GT को सिर्फ एक टीम नहीं, तेज गेंदबाजों की फैक्ट्री बना दिया है.
मोहम्मद शमी ने यहां आकर फिर से अपना खौफ पाया. मोहित शर्मा को दूसरा करियर मिला. अब सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा उसी सिस्टम में बल्लेबाजों की तकनीक हिला रहे हैं.
नेहरा का दर्शन बहुत सीधा है- 'अगर बल्लेबाज आराम से शॉट खेल रहा है, तो गेंदबाज सही गेंद नहीं डाल रहा.'
यही वजह है कि GT के तेज गेंदबाज सिर्फ विकेट नहीं लेते… मैच का मूड बदल देते हैं.
GT का ‘स्पीड अटैक’ बना IPL का सबसे बड़ा खौफ, सिराज 140+, रबाडा 150 की रफ्तार से बरपा रहे कहर
शुभमन गिल की कप्तानी भी बदल चुकी है
गिल अब सिर्फ ‘पोस्टर बॉय’ नहीं रहे. उनकी कप्तानी में एक अजीब सा ठंडापन दिखता है. राशिद खान जैसा मैच विनर स्पिनर होने के बावजूद GT कई बार तेज गेंदबाजों पर ही मैच छोड़ देती है. क्योंकि टीम को भरोसा है कि अगर हार्ड लेंथ सही जगह पड़ रही है, तो बल्लेबाज़ खुद गलती करेगा.
यानी GT विरोधी को ट्रैप में फंसाती है… और फिर लगातार दबाव से तोड़ देती है.
बाकी IPL टीमों के लिए खतरे की घंटी
सबसे डरावनी बात ये है कि GT सिर्फ अहमदाबाद में नहीं जीत रही. बाहर भी वही कहानी है. यानी ये कोई 'होम पिच फ्रॉड' नहीं… पूरी क्रिकेट फिलॉसफी है. जब बाकी टीमें ‘एंटरटेनमेंट क्रिकेट’ खेल रही हैं, तब नेहरा की GT बल्लेबाजों को याद दिला रही है कि तेज गेंदबाजी आज भी क्रिकेट का सबसे बड़ा डर है.
... और फिलहाल IPL 2026 में एक बात साफ दिख रही है - अगर GT की पेस आर्मी चल गई… तो सामने वाली टीम का स्कोरबोर्ड नहीं, कॉन्फिडेंस टूटता है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क