स्पेस स्टेशन पर खोजा गया कैंसर का नया इलाज... दो घंटे का ट्रीटमेंट अब दो मिनट में पूरा

अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर मर्क कंपनी की रिसर्च से कैंसर दवा पेम्ब्रोलिजुमाब का नया इंजेक्शन बना लिया है. माइक्रोग्रेविटी में बेहतर क्रिस्टल ग्रोथ से इलाज आसान हो गया है. अब 2 घंटे की IV इन्फ्यूजन की जगह सिर्फ 1-2 मिनट के इंजेक्शन में हो जाता है. FDA ने सितंबर 2025 में मंजूरी दी, जो मरीजों का समय और खर्च बचाएगा.

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इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर यूरोपियन स्पेस एजेंसी के एस्ट्रोनॉट थॉमस पिके कैंसर की नई दवा दिखाते हुए. (Photo: ESA/ISS/NASA) इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर यूरोपियन स्पेस एजेंसी के एस्ट्रोनॉट थॉमस पिके कैंसर की नई दवा दिखाते हुए. (Photo: ESA/ISS/NASA)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:45 AM IST

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर की गई वैज्ञानिक रिसर्च ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. नासा और दवा कंपनी मर्क की टीम ने मिलकर स्पेस में प्रोटीन क्रिस्टल ग्रोथ की स्टडी की, जिससे कैंसर की एक प्रमुख दवा का नया रूप विकसित हुआ.

अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने सितंबर 2025 में इस नए इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है. अब मरीजों को 2 घंटे लंबी इन्फ्यूजन की जगह सिर्फ 1-2 मिनट का इंजेक्शन लगेगा. यह खबर कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी है, क्योंकि इलाज आसान, तेज और सस्ता हो गया है.

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क्या है यह नया इलाज?

यह नया इलाज कंपनी मर्क की दवा पेम्ब्रोलिजुमाब (Pembrolizumab) का सबक्यूटेनियस इंजेक्शन रूप है. यह दवा इम्यूनोथेरेपी की श्रेणी में आती है. कुछ खास तरह के कैंसर (जैसे मेलानोमा, लंग कैंसर आदि) के इलाज में इस्तेमाल होती है.

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पहले यह दवा कैसे दी जाती थी?

  • मरीज को अस्पताल या क्लिनिक जाना पड़ता था.
  • नस में इन्फ्यूजन (IV ड्रिप) से दवा दी जाती थी.
  • इसमें 1-2 घंटे लगते थे.
  • बाद में इसे 30 मिनट तक कम किया गया था.

अब नया तरीका

  • त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस) सिर्फ एक इंजेक्शन.
  • लगाने में 1 से 2 मिनट लगते हैं.
  • हर तीन हफ्ते में एक बार.
  • मरीज का समय बचता है. अस्पताल का खर्च कम होता है. जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है.

स्पेस स्टेशन की रिसर्च ने कैसे मदद की?

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अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) बहुत कम होता है – इसे माइक्रोग्रेविटी कहते हैं. पृथ्वी पर ग्रेविटी की वजह से क्रिस्टल बनाते समय कई समस्याएं आती हैं, जैसे क्रिस्टल छोटे, असमान या कम गुणवत्ता वाले बनते हैं. लेकिन स्पेस में...

  • क्रिस्टल बड़े, एकसमान और ज्यादा परफेक्ट बनते हैं.
  • इससे वैज्ञानिक दवा के अणुओं की संरचना को बेहतर समझ पाते हैं.

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मर्क कंपनी 2014 से ISS पर प्रयोग कर रही है. उन्होंने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (लैब में बनी प्रोटीन जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है) के क्रिस्टल स्पेस में उगाए. इन क्रिस्टल से पता चला कि दवा के कणों का सबसे अच्छा आकार और संरचना क्या होनी चाहिए, ताकि वे आसानी से घुलकर इंजेक्शन के रूप में दिए जा सकें.

यह रिसर्च ISS नेशनल लेबोरेटरी के सपोर्ट से हुई. नासा स्पेस स्टेशन को निजी कंपनियों और वैज्ञानिकों के लिए खुला रखता है, ताकि माइक्रोग्रेविटी का फायदा उठाकर नई खोजें हों.

स्पेस रिसर्च के फायदे क्या हैं?

  • पृथ्वी पर दवाओं का विकास तेज और बेहतर होता है.
  • कैंसर जैसे जटिल रोगों का इलाज आसान बनता है.
  • अंतरिक्ष यात्री के लिए लंबी स्पेस मिशन (चंद्रमा और मंगल) की तैयारी भी होती है.
  • कॉमर्शियल स्पेस इकोनॉमी बढ़ती है – निजी कंपनियां स्पेस में निवेश करती हैं.

नासा का कहना है कि स्पेस स्टेशन पर किया गया काम न सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत सुधारता है, बल्कि पृथ्वी पर लाखों लोगों की जिंदगी बेहतर बनाता है. यह उदाहरण दिखाता है कि अंतरिक्ष की खोजें कैसे आम लोगों तक पहुंच रही हैं. भविष्य में स्पेस रिसर्च से और भी कई नई दवाएं और इलाज सामने आ सकते हैं. कैंसर मरीजों के लिए यह नया इंजेक्शन एक बड़ी उम्मीद है.

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