NASA Artemis II: 54 साल बाद कौन जा रहा है चांद का चक्कर लगाने, 1 को लॉन्चिंग

नासा ने आर्टेमिस II मिशन को पूरी तरह तैयार किया है. 1 अप्रैल को चार अंतरिक्ष यात्री 1972 के बाद पहली बार चंद्रमा के पास जाएंगे. रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई जेरेमी हैनसेन 10 दिन की उड़ान में चांद की परिक्रमा करेंगे. क्रिस्टीना पहली महिला, विक्टर पहले अश्वेत और जेरेमी पहले गैर-अमेरिकी यात्री होंगे.

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फ्लोरिडा के केप केनवरल के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड पर खड़ा आर्टेमिस 2 मिशन का एसएलएस रॉकेट. (Photo: AP) फ्लोरिडा के केप केनवरल के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड पर खड़ा आर्टेमिस 2 मिशन का एसएलएस रॉकेट. (Photo: AP)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:41 AM IST

छह दशक पहले अपोलो मिशन ने यह बताया कि चंद्रमा कैसे बना. अब नासा का आर्टेमिस मिशन नई खोजों का नया दौर शुरू करने वाला है. नासा ने घोषणा की है कि आर्टेमिस II मिशन पूरी तरह तैयार है. कोई तकनीकी समस्या नहीं है. 1 अप्रैल को इतिहास रचने वाला यह लॉन्च होगा. चार अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर घूमेंगे – 1972 के बाद पहली बार इंसान इतनी दूर जाएंगे.

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आर्टेमिस II मिशन की तैयारी पूरी, लॉन्च 1 अप्रैल को

नासा के चार अंतरिक्ष यात्री शुक्रवार को फ्लोरिडा पहुंच गए हैं. वे अब अंतिम तैयारी में जुट गए हैं. कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई जेरेमी हैनसेन ह्यूस्टन से T-38 जेट विमान से कैनेडी स्पेस सेंटर पहुंचे. यहां से वे 1 अप्रैल को विशाल SLS रॉकेट पर सवार होकर उड़ान भरेंगे. 

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मिशन लगभग 10 दिन का होगा. वे चांद के पास से तेज गति से घूमकर वापस पृथ्वी आ जाएंगे. इस दौरान चांद पर उतरना नहीं है. चांद के पास जाकर वापस लौटना है. नासा कह रहा है कि यह मिशन आर्टेमिस का पहला क्रूड टेस्ट है.

इन चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन क्यों खास है?

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यह मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक है. विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री होंगे जो चांद के पास जाएंगे. क्रिस्टीना कोच पहली महिला होंगी जो चंद्रमा के करीब जाएंगी. जेरेमी हैनसेन पहले गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री होंगे जो लोअर अर्थ ऑर्बिट से आगे जाएंगे. कमांडर रीड वाइसमैन पहले से अनुभवी हैं. 

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तीनों अमेरिकी पहले स्पेस में जा चुके हैं, सिर्फ जेरेमी हैनसेन की यह पहली उड़ान होगी. सभी को 2023 में चुना गया था. वे दो साल से ज्यादा समय से ट्रेनिंग ले रहे हैं. 18 मार्च से वे ह्यूस्टन में क्वारंटाइन में थे. अब फ्लोरिडा में क्रू क्वार्टर में हैं.

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मिशन क्या करेगा और क्यों जरूरी है?

अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में बैठकर जाएंगे. यह कैप्सूल गहरे अंतरिक्ष के लिए बनाया गया है. मिशन में ओरियन के लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन, कम्युनिकेशन और हीट शील्ड की पूरी जांच होगी. कमांडर वाइसमैन ने कहा कि देश और दुनिया लंबे समय से इस इंतजार में थी.यह मिशन सिर्फ चंद्रमा के पास जाना नहीं है, बल्कि नासा के अरबों डॉलर के आर्टेमिस प्रोग्राम की सच्ची परीक्षा है. अगर सब ठीक रहा तो आगे के मिशनों में चांद पर उतरना और वहां लंबे समय तक रहना आसान हो जाएगा.

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अंतरिक्ष यात्रियों का अनुभव और कहानी

रीड वाइसमैन 50 साल के हैं. उन्होंने 2014 में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर 165 दिन बिताए थे. वे पहले नासा के चीफ एस्ट्रोनॉट भी रह चुके हैं. विक्टर ग्लोवर 49 साल के हैं. उन्होंने 2020 में स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन से 168 दिन स्पेस में गुजारे. वे नौसेना के टेस्ट पायलट भी रहे हैं. 

क्रिस्टीना कोच 47 साल की हैं. उन्होंने 2019 में सबसे लंबा स्पेस फ्लाइट रिकॉर्ड बनाया – 328 दिन. वे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और फिजिसिस्ट हैं. जेरेमी हैनसेन 50 साल के कनाडाई एस्ट्रोनॉट हैं. 2009 में चुने गए थे. यह उनकी पहली उड़ान होगी. कनाडा और अमेरिका का पुराना साथ इस मिशन में दिख रहा है.

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चांद पर बसना और मंगल की तैयारी

नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम सिर्फ एक मिशन नहीं है. आर्टेमिस II के बाद और भी मिशन आएंगे. लक्ष्य है चांद पर स्थायी इंसानी बस्ती बनाना. वहां से आगे मंगल ग्रह पर इंसान भेजने की तैयारी होगी. नासा कहता है कि यह नई खोजों का दौर है. अपोलो के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर चंद्रमा की यात्रा हो रही है. 

आर्टेमिस II मिशन सिर्फ चार लोगों की उड़ान नहीं है. यह विज्ञान, साहस और भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है. चांद के रहस्यों को समझने, वहां रहने और आगे मंगल जाने का सपना अब हकीकत की राह पर है. पूरी दुनिया की नजर 1 अप्रैल के लॉन्च पर है. यह नई यात्रा नई पीढ़ी के लिए नई उम्मीद ला रही है.

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