इंसानों का भविष्य तय करेगी चुहिया... स्पेस में गर्भवती हुई, लौटकर 9 स्वस्थ बच्चे दिए

चीन के अंतरिक्ष स्टेशन पर गई एक मादा चूहिया स्पेस से लौटकर मां बनी. 9 स्वस्थ बच्चे पैदा किए. शेनझोउ-21 मिशन में दो हफ्ते माइक्रोग्रैविटी में रहने के बाद भी प्रजनन क्षमता प्रभावित नहीं हुई. यह प्रयोग इंसानों के लिए मंगल-चंद्रमा मिशनों में प्रजनन की संभावना की उम्मीद जगाता है.

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चीन के स्पेस स्टेशन पर चुहिया प्रेग्नेंट हुई और धरती पर आकर बच्चे डिलिवर किए. (Photo: Representational/Getty) चीन के स्पेस स्टेशन पर चुहिया प्रेग्नेंट हुई और धरती पर आकर बच्चे डिलिवर किए. (Photo: Representational/Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:59 PM IST

चीन के अंतरिक्ष स्टेशन पर गई एक मादा चुहिया ने पृथ्वी पर लौटकर 9 स्वस्थ बच्चे पैदा किए. यह घटना मानव जाति के अंतरिक्ष में बसने के सपने के लिए बहुत बड़ा संकेत है. वैज्ञानिकों का कहना है कि छोटी अवधि की स्पेस यात्रा से स्तनधारी जीवों की प्रजनन क्षमता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता. यह प्रयोग चीन की शेनझोउ-21 मिशन का हिस्सा था.

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क्या हुआ पूरा प्रयोग?

31 अक्टूबर को चीन ने शेनझोउ-21 स्पेसक्राफ्ट से चार चूहों (नंबर 6, 98, 154 और 186) को अपने अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजा. ये चूहे पृथ्वी से करीब 400 km ऊपर स्थित स्टेशन पर दो हफ्ते रहे. यहां उन्होंने माइक्रोग्रैविटी (कम गुरुत्वाकर्षण), स्पेस रेडिएशन और अंतरिक्ष की खास स्थितियों का सामना किया.

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14 नवंबर को ये सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे. फिर 10 दिसंबर को एक मादा चूहिया ने 9 स्वस्थ बच्चे पैदा किए. इनमें से 6 बच्चे जीवित रहे, जो सामान्य दर है. मां ठीक से दूध पिला रही है. बच्चे सक्रिय हैं. अच्छे से बढ़ रहे हैं. 

चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज की रिसर्चर वांग होंगमेई ने कहा कि यह साबित करता है कि छोटी स्पेस यात्रा से चूहों की प्रजनन क्षमता खराब नहीं होती. पहले के प्रयोगों में स्पेस से लौटे चूहों के स्पर्म से पृथ्वी पर अंडे फर्टिलाइज किए गए थे, लेकिन इस बार पूरी मादा चूहिया स्पेस गई. लौटी गर्भवती होकर और जमीन पर बच्चे पैदा किए. 

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चुनौतियां भी आईं

मिशन आसान नहीं था. शेनझोउ-20 की वापसी में देरी हुई, जिससे चूहों का वहां रहना लंबा हो गया और खाने की कमी का खतरा पैदा हो गया. ग्राउंड टीम ने इमरजेंसी में एस्ट्रोनॉट्स का खाना टेस्ट किया – जैसे कंप्रेस्ड बिस्किट, कॉर्न, हेजलनट्स और सोया मिल्क. अंत में सोया मिल्क सबसे सुरक्षित पाया गया.

अंतरिक्ष में चूहों के हैबिटेट में सुबह 7 बजे लाइट ऑन और शाम 7 बजे ऑफ होती थी, ताकि पृथ्वी जैसा दिन-रात का चक्र बना रहे. खाना पौष्टिक लेकिन सख्त था, क्योंकि चूहों को दांत घिसने की जरूरत होती है. हवा का फ्लो बाल और कचरे को अलग कंटेनर में ले जाता था. AI सिस्टम चूहों की हरकत, खाना और नींद पर नजर रखता था.

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क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रयोग?

चूहे इंसानों से जेनेटिक रूप से बहुत मिलते-जुलते हैं. जल्दी बच्चे पैदा करते हैं. तनाव पर इंसानों जैसी प्रतिक्रिया देते हैं. अगर स्पेस में प्रजनन की कोई बड़ी समस्या होती, तो पहले चूहों में दिखती. अब वैज्ञानिक इन स्पेस पप्स पर नजर रखेंगे – उनके बढ़ने, विकास और आगे प्रजनन करने की क्षमता पर. क्या अगली पीढ़ी में कोई छिपा असर दिखेगा?

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यह सब इंसानों के लिए है. मंगल पर लंबी यात्रा या चंद्रमा पर स्थायी बस्ती बनाने से पहले जानना जरूरी है कि कम गुरुत्वाकर्षण में गर्भ ठहरना, बढ़ना और जन्म होना सामान्य रहेगा? स्पेस की किरणें अंडे या स्पर्म को नुकसान पहुंचाएंगी?

एक चूहिया का मां बनना सभी सवालों का जवाब नहीं देता, लेकिन यह उम्मीद जगाता है कि अंतरिक्ष में मानव प्रजनन संभव हो सकता है. यह मानव जाति के सितारों तक पहुंचने के सपने के लिए बड़ा कदम है.

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