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धर्म

चंद्रमा पर सदी का सबसे बड़ा ग्रहण शुरू, बरतें ये सावधानियां

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 24 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST
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सदी का सबसे बड़ा चंद्रग्रहण 27 जुलाई की मध्यरात्रि को लगा. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी के पंडित प्रसाद दीक्षित ने चंद्रग्रहण की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया, खास बात यह है कि यह ग्रहण संपूर्ण भारतवर्ष में दिखाई देगा तथा स्पर्श काल मध्यकाल एवं मोक्ष काल तक ग्रहण दिखाई देगा. खग्रास चंद्रग्रहण संपूर्ण यूरोप, अफ्रीका, एशिया तथा आस्ट्रेलिया महाद्वीप में दिखेगा. न्यूजीलैंड के अधिकांश भाग में, जापान, रूस, चीन, अफ्रीका तथा यूरोप के अधिकांश भागों में भी ग्रहण दिखाई देगा.

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यह ग्रहण 3 घंटा 55 मिनट का है. ग्रहण का स्पर्श काल रात्रि 11: 54 मिनट पर, मध्य काल रात्रि 1:52 पर एवं मोक्ष काल रात्रि 3: 49 मिनट पर है. चंद्र ग्रहण का सूतक काल दिन में  2:54 पर लगा. जो भी शुभ कार्य हो, वह सभी कार्य सूतक काल से पूर्व ही कर लेना श्रेयस्कर होता है, क्योंकि आज के दिन ही गुरु पूर्णिमा भी है. अतः सभी लोग गुरु पूर्णिमा के निमित्त जो भी धार्मिक क्रियाएं करते हैं, वह सूतक काल के पहले अर्थात 2:54 मिनट के अंदर ही धार्मिक कार्य कर लें.

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धार्मिक और ज्योतिषीय आधार पर चंद्रग्रहण के शुभ और अशुभ फल गिनाए गए हैं. इस आधार पर कुछ सावधानियों की बात भी कही जा रही है. ज्योतिषों के मुताबिक, आइए जानते हैं क्या हैं वो सावधानियां...

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ग्रहण के दौरान अत्यधिक शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक श्रम से बचें. विशेषतः विद्यार्थियों और पेशेवरों को इस दौरान सहज रहने की सलाह दी जाती है. गृहिणियों को भी घरेलू कार्यों में परिश्रम से बचना चाहिए. ज्योतिष अरुणेश कुमार शर्मा का कहना है कि सभी धार्मिक कार्य सूतक से पहले या ग्रहण के बाद करें.

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ग्रहण के समय देवपूजा को भी निषिद्ध बताया गया है. इसी कारण अनेक मंदिरों के कपाट ग्रहण के समय बंद कर दिए जाते हैं. ऐसे में पूजा, उपासना या देव दर्शन करना वर्जित है.

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कहा जाता है कि सूतक के समय भोजन आदि ग्रहण नहीं करना चाहिए. ग्रहण से पहले ही जिस पात्र में पीने का पानी रखते हों उसमें कुशा और तुलसी के कुछ पत्ते डाल देने चाहिए. कुशा और तुलसी में ग्रहण के समय पर्यावरण में फैल रहे जीवाणुओं को संग्रहित करने की अद्भुत शक्ति होती है.

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ग्रहण के बाद पानी को बदल लेना चाहिए. अनेक वैज्ञानिक शोधों से भी यह सिद्ध हो चुका है कि ग्रहण के समय मनुष्य की पाचन शक्ति बहुत शिथिल हो जाती है. ऐसे में यदि उनके पेट में दूषित अन्न या पानी चला जाएगा तो उनके बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है.

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ग्रहण के दौरान किसी नए व शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचें. असफलता हाथ लग सकती है.

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भारी उद्योग और देर रात कार्य में संलग्न लोगों को कार्यावकाश की सलाह है. उद्यमियों को भी यह प्रयास करना चाहिए कि मशीनों को विराम दें. उद्यम स्थलों पर सामान्य कार्य ही किए जाएं. संभव हो सके, शल्यकर्म एवं यंत्रकार्य को टालने का प्रयास करना चाहिए.

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प्रकृति इस समय अधिक संवेदनशील हो जाती है. ऐसे में पेड़ों, जलाशयों, वनों-बागों तथा पुराने निर्जन भवनों से दूर रहें. पत्तों- लताओं को नहीं तोड़ना चाहिए.

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रासायनिक क्रिया के प्रति संवेदनशील वस्तुओं विशेषतः धातु निर्मित सामानों से दूर रहेन की कोशिश करें. जैसे- लोहा, एल्युमीनियम तांबा चांदी एवं अन्य मेटलिक मटेरियल को न छुएं. कारण, ग्रहण के दौरान प्राकृतिक स्तर पर अनेक सूक्ष्म परिवर्तन होते हैं. इनके संपर्क से हानि होने की आशंका है.

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ज्योतिषीय धारणा है कि ग्रहण के समय कभी बाल और नाखून न कटवाएं, इस समय कोई सिलाई-कढ़ाई का काम न करें. ये अशुभ माना जाता है.

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ज्योतिषों के मुताबिक, जिस समय ग्रहण हो, उस समय सोना नहीं चाहिए. प्रेग्नेंट महिला, बीमार व्यक्ति और वृद्ध व्यक्ति आराम कर सकते हैं.

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चंद्र ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को ग्रहण की छाया आदि से विशेष रूप से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि ग्रहण की छाया का कुप्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ने का डर रहता है.

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ज्योतिष के मुताबिक, ग्रहण के दौरान संयम बरतना चाहिए. ग्रहण के समय पति-पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए.

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चंद्र ग्रहण रात्रि में  1 बजकर 43 मिनट पर मध्यावस्था में पहुंचेगा. कम से कम इस समय तक जागने का प्रयास करें. संभव न हो तो नींद इस प्रकार लें कि सहज संकेतों में भी प्रतिक्रिया कर सकें. बच्चे बुजुर्ग और गर्भणियों के लिए इसमें राहत है.

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ग्रहण के समय भोजन करना और बनाना वर्जित माना गया है.

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जब ग्रहण शुरू हो उससे पहले भोजन ग्रहण कर लेना चाहिए. ग्रहण के बाद स्नान करना चाहिए.

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ज्योतिषीय मान्यता के मुताबिक, ग्रहण के दौरान दांतों की सफ़ाई, बालों में कंघी आदि नहीं करनी चाहिए.

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