अपने आप को बेहतर बनाने में इतने व्यस्त हो जाओ कि दूसरों की बुराई या आलोचना करने के लिए तुम्हारे पास समय ही न बचे- चेतन भगत
आज के समय में हम अक्सर अपना बहुत सारा समय और ऊर्जा दूसरों की कमियां निकालने, सोशल मीडिया पर दूसरों को जज करने या उनके बारे में बातें करने में बर्बाद कर देते हैं. इससे हमें कुछ हासिल नहीं होता, बल्कि हमारी खुद की सकारात्मक ऊर्जा कम होती है.
इस विचार को समझने के लिए 3 मुख्य बातें:
ऊर्जा का सही इस्तेमाल: हर इंसान के पास सीमित समय और ऊर्जा होती है. अगर आप उसे दूसरों की कमियां ढूंढने में लगा देंगे, तो खुद आगे बढ़ने के लिए आपके पास ताकत ही नहीं बचेगी. अपनी ऊर्जा को खुद को निखारने, नई चीजें सीखने और अपने लक्ष्यों को पाने में लगाएं.
सच्ची प्रतियोगिता खुद से: जिंदगी में हमारी असली रेस किसी और से नहीं, बल्कि हमारे खुद के बीते हुए कल से है. हमें हर दिन खुद से यह पूछना चाहिए कि क्या हम कल से बेहतर इंसान बने हैं? जब आप रोज अपनी कमियों को सुधारने में जुट जाते हैं, तो आपको दूसरों की जिंदगी में झांकने की फुर्सत ही नहीं मिलती.
मानसिक शांति: दूसरों की आलोचना करने से मन में कड़वाहट और जलन पैदा होती है. इसके विपरीत, जब आप खुद के विकास (Self-improvement) पर ध्यान देते हैं, तो आपको अंदर से खुशी और संतुष्टि मिलती है.
निष्कर्ष:
दूसरों की कमियां निकालना बहुत आसान है, लेकिन अपनी कमियों को सुधारना असली बहादुरी है. इसलिए, दूसरों के जज बनने के बजाय खुद के गुरु बनिए. किताबें पढ़िए, नई स्किल सीखिए, सेहत का ध्यान रखने के साथ अपने सपनों पर काम कीजिए. जब आप अपनी तरक्की में पूरी तरह डूब जाएंगे, तो दुनिया की फालतू बातें अपने आप पीछे छूट जाएंगी.
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