Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर तुलसी को अर्पित करें ये चीजें, मां लक्ष्मी बना देंगी धनवान!

Nirjala Ekadashi: सभी एकादशियों में सबसे बड़ी निर्जला एकादशी इस बार 25 जून को है. इस दिन तुलसी माता की विशेष पूजा की जाती है, लेकिन कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी है. जानें पूजा में क्या चढ़ाएं और इस दिन कौन सी एक बड़ी गलती करने से बचें.

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तुलसी उपाय (Photo: ITG) तुलसी उपाय (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:23 PM IST

Nirjala Ekadashi 2026: सभी एकादशियों में सबसे बड़ी निर्जला एकादशी मानी जाती है. इस बार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस दिन माता तुलसी की पूजा करनी चाहिए. दरअसल, हिंदू धर्म में तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि देवी रूप और 'विष्णुप्रिया' (भगवान विष्णु की प्रिय) माना गया है. शास्त्रों में तुलसी को पौधों की रानी और सुख-समृद्धि का प्रतीक कहा गया है. यदि आप निर्जला एकादशी पर तुलसी जी की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो पूजा के दौरान उन्हें ये चीजें अर्पित कर सकते हैं.

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अक्षत (बिना टूटे हुए चावल) और हल्दी
तुलसी जी को अर्पित करने के लिए हल्दी मिश्रित पीले चावल (अक्षत) का प्रयोग करें. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों को ही हल्दी और पीला रंग अत्यंत प्रिय है.

लाल या पीली चुनरी
एकादशी के पावन अवसर पर तुलसी के पौधे को एक नई लाल या पीली चुनरी ओढ़ाएं. यह माता तुलसी के प्रति सम्मान और सुहाग का प्रतीक माना जाता है.

सुहाग की सामग्री
चुनरी के साथ-साथ आप तुलसी माता को चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और कुमकुम जैसी सुहाग की सामग्री अर्पित कर सकते हैं. इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है.

कलावा (मौली)
तुलसी के तने पर सात बार कलावा (सूती पवित्र धागा) लपेटें. कलावा बांधते समय अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें.

घी का दीपक और परिक्रमा
शाम के समय तुलसी जी के सामने गाय के शुद्ध घी का दीपक जरूर जलाएं. दीपक जलाने के बाद तुलसी जी की कम से कम तीन या सात बार परिक्रमा करें.

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नियम

जल अर्पित न करें: निर्जला एकादशी के दिन तुलसी माता भी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इसलिए इस दिन तुलसी के पौधे में जल बिल्कुल भी अर्पित नहीं किया जाता और न ही उनके पत्ते तोड़े जाते हैं.

स्पर्श से बचें: इस दिन तुलसी जी को अनावश्यक रूप से छूने से बचें, केवल पूजा सामग्री दूर से या श्रद्धापूर्वक अर्पित करें.

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