Banke Bihari Ka Bulawa: बांके बिहारी का बुलावा कैसे समझें? कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने बताए ये संकेत

Banke Bihari Ka Bulawa: भक्तों के अनुसार जब बांके बिहारी जी अपने भक्त को वृंदावन बुलाते हैं, तो वे कुछ खास संकेत देते हैं. तो आइए कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय से जानते हैं कि कौन से वह संकेत.

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बांके बिहारी जी (Photo: ITG) बांके बिहारी जी (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:28 PM IST

Banke Bihari Ka Bulawa: हिंदूओं के सबसे प्रिय भगवान में से एक हैं बांके बिहारी जी. इन्हें उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का एक मनमोहक और बाल स्वरूप माना जाता है, जो अपने भक्तों के साथ बेहद प्रेमपूर्ण संबंध रखते हैं. भक्तों का ऐसा विश्वास है कि बांके बिहारी जी सिर्फ मूर्ति नहीं, बल्कि जीवंत रूप में वृंदावन में विराजमान हैं. यही कारण है कि उनके मंदिर में दर्शन का तरीका भी अलग है जिसमें कुछ सेकेंड के लिए ही पर्दा हटता है, ताकि भक्त उनकी झलक पा सकें. मान्यता है कि अगर कोई लगातार उन्हें देखता रहे, तो वह उनकी भक्ति में इतना डूब सकता है कि खुद को भूल जाए. 

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वहीं, भक्तों के बीच एक खास मान्यता यह भी प्रचलित है कि जब बांके बिहारी जी अपने किसी भक्त को वृंदावन बुलाना चाहते हैं, तो वे सीधे नहीं बल्कि कुछ संकेतों के जरिए इशारा करते हैं. इसी को लेकर कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने भी कुछ संकेतों का जिक्र किया है. इंद्रेश उपाध्याय कहते हैं कि एक बार दिल से बोलो ''ठाकुर जी, अब आप ही बुलाइए'' तो बुलावे के संकेत हर व्यक्ति को अलग-अलग तरीके से मिलने लगते हैं. 

सपने में दिखना

कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय के मुताबिक, अगर रात में आपको वृंदावन, यमुना जी, गोवर्धन या मंदिरों के दर्शन हों, जैसे राधा रमण, राधा वल्लभ या बांके बिहारी जी की झलक दिखे, तो इसे साफ बुलावा माना जाता है.

अचानक वृंदावनवासी से मिलना

कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय के अनुसार, दूसरा संकेत हैं कि आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति आ सकता है जो ब्रज या वृंदावन से जुड़ा हो. उससे बातचीत में बार-बार ठाकुर जी और वृंदावन का जिक्र होने लगता है. भक्त इसे भी भगवान का इशारा मानते है.

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घर पर ब्रज का अचानक प्रसाद आ जाए

ऐसा भी देखा गया है कि अचानक किसी के जरिए प्रसाद मिल जाता है या घर पर प्रसाद पहुंच जाता है. इसे लोग भगवान की कृपा का संकेत मानते हैं और मानते हैं कि अब उन्हें दर्शन के लिए बुलाया जा रहा है. 

वृंदावन जाने के लिए मन बेचैन होना

कई बार मन खुद ही बेचैन होने लगता है और बार-बार वृंदावन जाने का विचार आने लगता है. बिना किसी खास वजह के भी ऐसा महसूस होता है कि अब वहां जाना जरूरी है. यह भावना भी भक्तों के अनुसार एक खास संकेत होता है.

बांके बिहारी की एक झलक से मिलता है सुकून

कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति वृंदावन पहुंचकर बांके बिहारी जी के दर्शन करता है, तो उसे मन की शांति और सुकून मिलता है. उनकी एक झलक ही दिल को खुश कर देती है और जीवन में सकारात्मकता भर देती है. कई लोग इसे अपनी आस्था और आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण अनुभव मानते हैं. 

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