गणेश चतुर्थी आज, मूर्त‍ि स्थापना का शुभ मुहूर्त सिर्फ 1:30 घंटे

आज है गणेश चतुर्थी. जानिये इसका महत्व और किस विध‍ि से पूजा करने पर मिलेगा मनचाहा वरदान...

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गणपति बप्पा गणपति बप्पा

वंदना भारती

  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST

आज गणेश चतुर्थी है और आपके घर में मेहमान बनकर अगले दस दिनों तक रहने वाले हैं. आज से गणेश महोत्सव का शुभ आरंभ हो गया है. जानिये ये इतना महत्वपूर्ण क्यों है और विघ्नहर्ता के इस दिव्य उत्सव का शुभ-लाभ आपको कैसे मिल सकता है. गणपति के आगमन की दिव्य तिथि का महिमा क्या है और कब पधारने वाले हैं गणपति.

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की महिमा

- का पर्व मुख्य रूप से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है

- माना जाता है कि इसी दिन प्रथम पूज्य का प्राकट्य हुआ था

- मान्यता ये भी है कि इस दिन भगवान धरती पर आकर अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं

- की पूजा की अवधि अनंत चतुर्दशी तक चलती है, इस दौरान गणपति धरती पर ही निवास करते हैं

- इस बार का पर्व 25 अगस्त से 05 सितम्बर तक रहेगा

- इस बार पर गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त दोपहर 12.00 से 01.30 तक होगा

हर साल विघ्नहर्ता आते हैं और भक्तों के साथ रहकर उनके सुख-दुख का हिस्सा बनते हैं. मान्यता है कि इस दौरान गणपति अपने भक्तों के सभी दुख और परेशानियों का अंत कर देते हैं. लेकिन इसके लिए गणपति को प्रसन्न करना जरूरी है. तो आइए हम आपको गणेश चतुर्थी पर गणपति पूजन की विशेष विधि बताते हैं. इस विधि से पूजन करेंगे तो निश्चित ही प्रसन्न हो जाएंगे विघ्नहर्ता गणेश...

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पर कैसे करें गणपति की पूजा

-   की प्रतिमा की स्थापना दोपहर के समय करें , साथ में कलश भी स्थापित करें .

- लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर मूर्ति की स्थापना करें.

इस मंत्र का उच्चारण करें - ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

- दिन भर जलीय आहार ग्रहण करें या केवल फलाहार करें

- शाम के समय गणेश जी की यथा शक्ति पूजा-उपासना करें और उनके सामने घी का दीपक जलाएं

- को अपनी उम्र की संख्या के बराबर लड्डुओं का भोग लगाएं , साथ ही उन्हें दूब भी अर्पित करें

- फिर अपनी इच्छा के अनुसार के मन्त्रों का जाप करें

- चन्द्रमा को नीची दृष्टि से अर्घ्य दें , क्योंकि चंद्र दर्शन से आपको अपयश मिल सकता है

- अगर चन्द्र दर्शन हो ही गया है तो उसके दोष का तुरंत उपचार कर लें

- अंत में प्रसाद बांटें और अन्न-वस्त्र का दान करें

 

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