राजस्थान में चंबल नदी से हो रहे अवैध बजरी खनन पर अब बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, बूंदी और कोटा जिलों में 15 मई 2026 से अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति लागू कर दी है. अब इन जिलों में पकड़े जाने वाले अवैध बजरी के वाहनों पर सीधे न्यायिक प्रक्रिया के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वन्यजीवों की सुरक्षा में लापरवाही को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को जोरदार फटकार लगाई थी. अदालत ने राजस्थान के गृह, खनन, वित्त, वन, पर्यावरण और परिवहन विभाग के प्रमुख सचिवों को 19 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि अवैध खनन रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए, दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई, बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों को कैसे रोका जा रहा है और भविष्य में क्या सख्त कदम उठाए जाएंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, "अवैध बजरी खनन के कारण चंबल अभ्यारण क्षेत्र में घड़ियाल, मगरमच्छ और दुर्लभ गंगा डॉल्फिन समेत कई जलीय जीवों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. पर्यावरण संतुलन के लिए इस पर पूर्ण रोक अनिवार्य है."
27 पॉइंट पर तीसरी आंख और 16 घाटों की घेराबंदी
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद धौलपुर जिला प्रशासन और पुलिस सबसे ज्यादा मुस्तैद नजर आ रही है. धौलपुर जिला प्रशासन ने राज्य सरकार से बॉर्डर होमगार्ड, अतिरिक्त पुलिस जाब्ता और विशेष बजट की मांग की है. अब वन विभाग, खनन, परिवहन और पुलिस की संयुक्त टीमें 'स्पेशल टास्क फोर्स' (STF) के रूप में आकस्मिक छापेमारी करेंगी.
धौलपुर पुलिस अधीक्षक (SP) विकास सांगवान ने बताया कि प्रतिबंधित चंबल बजरी के परिवहन को पूरी तरह ठप करने के लिए जिले के थाना क्षेत्रों के 27 प्रमुख मार्गों और चिह्नित स्थानों पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जा रहे हैं.
प्रमुख सीसीटीवी लोकेशंस
झिरी चौकी, भम्मपुरा तिराहा, रीछरा, भेंढेकी, सायपुर तिराहा, सेवर पुल, मुरारी की कोठी, किला शेरगढ़, सागरपाड़ा पुलिस चौकी, समोना घाट, भैंसेना तिराहा, माधो का पुरा चौराहा, आठमील चौकी तिराहा आदि प्रमुख हैं.
16 घाटों के लिए 4 विशेष मोबाइल पार्टियां
एसपी सांगवान ने बताया कि घाटों पर चौबीसों घंटे निगरानी के लिए विशेष रूप से 16 घाटों को कवर करते हुए 4 मोबाइल पार्टियां तैनात की जा रही हैं:
पहली मोबाइल पार्टी: दिहौली थाने के भूड़ा घाट, कठूमरी घाट, अण्डवा पुरैनी घाट और राजाखेड़ा थाने के घड़ी टिडावली घाट पर गश्त करेगी.
दूसरी मोबाइल पार्टी: कोतवाली थाना के रेलवे पुल घाट, मोरौली घाट और धौलपुर सदर थाने के तिघरा व भमरौली घाट पर तैनात रहेगी.
तीसरी मोबाइल पार्टी: बसई डांग थाने के रजई खुर्द, बसई डांग घाट, भगतपुरा घाट, कस्बा नगर, चन्देली पुरा घाट और सोने का गुर्जा थाने के पाली घाट पर पेट्रोलिंग करेगी.
चौथी मोबाइल पार्टी: सरमथुरा थाने के हल्लूपुरा घाट और दुर्गशी घाट पर लगातार राउंड लेगी.
परिवहन विभाग को साफ निर्देश दिए गए हैं कि अगर कोई कृषि वाहन जैसे ट्रैक्टर-ट्रॉली व्यावसायिक रूप से अवैध बजरी ढोते हुए मिला, तो सीधे वाहन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी. पुलिस अधिकारी अब गांवों और ढाणियों में जाकर लोगों से समझाइश भी कर रहे हैं कि वे इस अवैध कारोबार से दूर रहें.
हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट
इस कड़े प्रशासनिक हंटर का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है. चंबल बजरी के परिवहन और खनन पर पूरी तरह पाबंदी लगने से चंबल नदी के किनारे बसे सैकड़ों गांवों और ढाणियों के हजारों परिवारों के सामने अचानक बेरोजगारी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. कई पीढ़ियों से इन स्थानीय लोगों की आजीविका का एकमात्र साधन बजरी ही रहा है.
स्थानीय ग्रामीणों और नागरिक संगठनों की कई वर्षों से सरकारों से यह मांग रही है कि जिन घाटों पर दुर्लभ वन्यजीव (जैसे घड़ियाल) अंडे नहीं देते हैं और जहां केवल बारिश के दिनों में चंबल नदी रेत छोड़कर आगे बढ़ जाती है, उन सुरक्षित स्थानों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए.
राजस्व और रोजगार का संतुलन
अगर सरकार उन सुरक्षित घाटों का लीगल लीज कर देती है, तो इससे सरकार को भारी मात्रा में रॉयल्टी मिलेगा और दूसरी तरफ हजारों गरीब परिवारों का पालन-पोषण भी कानूनी रूप से होता रहेगा, जिससे अवैध खनन की समस्या का स्थाई समाधान हो सकेगा.
उमेश मिश्रा