देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर सामने आए नए खुलासों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है. जिस परीक्षा के जरिए हर साल डॉक्टर बनने का सपना तय होता है, उसी परीक्षा की विश्वसनीयता अब सवालों के घेरे में आ गई है. 3 मई को आयोजित हुई NEET परीक्षा पेपर लीक के बाद रद्द कर दी गई है. राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG की शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि परीक्षा के करीब 600 नंबर तक के सवाल पहले ही छात्रों तक पहुंच चुके थे.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कथित गेस पेपर में सिर्फ सवाल ही नहीं, बल्कि कई प्रश्नों के ऑप्शन का क्रम भी असली पेपर जैसा बताया जा रहा है. अब पूरे मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है. इस फैसले से देशभर के करीब 22 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं.
5 लाख से शुरू, फिर 30 हजार में बिकने लगा पेपर
जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में कथित गेस पेपर 5-5 लाख रुपये तक में बेचा गया. लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा की तारीख नजदीक आती गई, वैसे-वैसे यह सामग्री कम दामों में फैलती चली गई. बताया जा रहा है कि परीक्षा से ठीक एक रात पहले यही कथित पेपर 30-30 हजार रुपये तक में छात्रों को उपलब्ध कराया गया. एसओजी की जांच में कई मोबाइल फोन ऐसे मिले हैं, जिनमें संबंधित दस्तावेज के साथ 'Forwarded Many Times' का टैग दिखाई दे रहा है. जांच एजेंसियों का मानना है कि इसका मतलब यह सामग्री बहुत बड़े स्तर पर शेयर की गई थी.
सीकर बना जांच का सबसे बड़ा केंद्र
पूरे मामले में राजस्थान का सीकर जिला जांच एजेंसियों के रडार पर सबसे ऊपर है. सूत्रों के मुताबिक कथित क्वेश्चन बैंक का लिंक चूरू के एक युवक से जुड़ रहा है, जो इस समय केरल के एक मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई कर रहा है. बताया जा रहा है कि युवक ने 1 मई को यह सामग्री सीकर में अपने एक दोस्त को भेजी थी. इसके बाद यह दस्तावेज तेजी से कई लोगों तक पहुंच गया. जांच में सामने आया है कि यह सामग्री एक PG संचालक तक भी पहुंची थी. वहीं से यह छात्रों, करियर काउंसलर्स और अन्य अभ्यर्थियों के बीच वायरल हो गई. अब SOG इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है.
140 सवाल हूबहू मैच
पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा सवालों के मैच होने को लेकर हुआ है. सूत्रों के मुताबिक छात्रों तक पहुंचे कथित क्वेश्चन बैंक में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से ज्यादा सवाल शामिल थे. सभी सवाल हाथ से लिखे हुए बताए जा रहे हैं और हैंडराइटिंग भी लगभग एक जैसी पाई गई है. जांच एजेंसियों का दावा है कि इनमें से करीब 140 सवाल असली परीक्षा में हूबहू पूछे गए. NEET में हर सवाल 4 अंक का होता है. ऐसे में लगभग 600 नंबर तक के प्रश्न कथित क्वेश्चन बैंक से मिल जाने की बात ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी गेस पेपर से कुछ सवाल मिल जाना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में प्रश्नों का मैच होना बेहद असामान्य माना जाता है. और खासकर उस परीक्षा में, जहां एक-एक नंबर लाखों छात्रों की रैंक और मेडिकल कॉलेज तय करता है.
वॉट्सएप से एन्क्रिप्टेड ऐप तक फैला नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित पेपर सिर्फ वॉट्सएप तक सीमित नहीं था. कई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स के जरिए भी इसे शेयर किए जाने के संकेत मिले हैं. SOG अब सोशल मीडिया चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और इंस्टेंट मैसेजिंग एप्स के जरिए जुड़े हर लिंक को खंगाल रही है. एजेंसियों को शक है कि इस सामग्री के प्रिंटआउट निकालकर ऑफलाइन तरीके से भी छात्रों तक पहुंचाया गया.
PG संचालक भी जांच के घेरे में
पूरे मामले में सीकर का एक PG संचालक भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है. दिलचस्प बात यह है कि परीक्षा खत्म होने के बाद इसी संचालक ने उद्योग नगर थाने और NTA को शिकायत देकर दावा किया था कि बड़ी संख्या में छात्रों के पास संदिग्ध क्वेश्चन बैंक पहुंचा था. लेकिन जांच में सामने आया कि खुद उसे भी परीक्षा से पहले यह सामग्री मिली थी और उसने इसे आगे छात्रों व काउंसलर्स तक भेजा था. अब एजेंसियों को शक है कि कहीं शिकायत देकर उसने खुद को बचाने की कोशिश तो नहीं की.
22 लाख छात्रों पर असर
NEET परीक्षा रद्द होने के बाद सबसे ज्यादा चिंता छात्रों और अभिभावकों में दिखाई दे रही है. देशभर से लाखों छात्र महीनों नहीं बल्कि कई-कई सालों की तैयारी के बाद इस परीक्षा में शामिल होते हैं. अब परीक्षा रद्द होने के कारण छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी. हालांकि National Testing Agency ने साफ कर दिया है कि छात्रों को फिर से रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी. नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी. लेकिन मानसिक दबाव और अनिश्चितता ने छात्रों की चिंता बढ़ा दी है.
शरत कुमार