अमेरिका ने युद्ध छेड़ा तो नाम दिया ऑपरेशन एपिक फ्यूरी, लेकिन बारह दिन बाद भी कोई बहुत बड़ी कामयाबी ईरान के खिलाफ ट्रंप को हासिल नहीं हुई. और तब चर्चा अमेरिका से लेकर दूसरे देश में ये होने लगी कि क्या ट्रंप को ईरान युद्ध में उल्टे पांव लौटना पड़ सकता है? क्योंकि ईरान में सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य हासिल नहीं होने से किरकिरी हो रही है. ईरान के मौजूदा सिस्टम जिसको उखाड़ देना ट्रंप चाहते थे वो मजबूत हो रहा है. हमले से खाड़ी के देश अमेरिका से खुश नहीं हैं, क्योंकि अमेरिका की रक्षक की छवि टूटी है. ईरान से बातचीत के लिए पुतिन की मदद लेनी पड़ी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा में अमेरिका फेल हो रहा है. रूस को तेल बेचने की छूट देनी पड़ी है.