देश के अहम विश्वविद्यालय JNU में एक बार फिर बवाल हो गया है. बीजेपी के आरोपों के मुताबिक JNU छात्र संघ से जुड़े लेफ्ट समर्थक छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काऊ नारेबाजी की है. नारेबाजी का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कब्र खुदने जैसे नारे लगाए जा रहे हैं. सवाल ये है कि किसी राजनीतिक विचारधारा में हिंसा की गुंजाइश कहां है? क्या ये राजनीतिक विरोध में देश के विरोध की बाउंड्री लाइन लांघना नहीं है?