ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान तो हो गया लेकिन शांति बहुत दूर नजर आ रही है. वैसे तो कल पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत प्रस्तावित है, लेकिन ये शांति वार्ता होगी भी या नहीं, इस पर सस्पेंस बना हुआ है. लेबनान पर इजरायल के लगातार हमलों से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है, और ईरान से ऐसी खबरें आ रही हैं कि लेबनान समेत उसकी कम से कम 3 शर्तों के उल्लंघन से बातचीत का कोई फायदा नहीं दिखता. उधर, राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है कि डील नहीं हुई तो उनकी सेनाएं तैयार हैं. वो होर्मुज खोलने और ईरान के पास परमाणु शक्ति नहीं रहने देने का दम भर रहे हैं, जबकि ईरान भी इन दोनों बातों पर अड़ा नजर आ रहा है. कहने को तो पाकिस्तान, मध्यस्थ की भूमिका में है, लेकिन लेबनान पर उसका झूठ अमेरिका ने खोला है. सवाल है कि क्या 2 हफ्तों के इस सीजफायर से कोई उम्मीद दिखती है? ये शांति के लिए सीजफायर है, या सीजफायर खुद मिसफायर हो गया है?