पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद ममता बनर्जी के शासन के अंत हुआ है. लेकिन सवाल आज भी है, सत्ता बदली, क्या रक्तचरित्र बदलेगा? क्योंकि, खून बंगाल की सियासी रवायत का एक हिस्सा सा बन गया है. बंगाल में आज फिर वही हो रहा है, जैसा लेफ्ट के अंत के साथ और टीएमसी के सत्ता में आने के बाद हुआ. यानी रक्त चरित्र का सिलसिला जारी है. बंगाल में चुनावी के नतीजों को बाद, पूरे बंगाल से ऐसी तस्वीरें आ रही हैं, कहीं टीएमसी दफ्तर पर बुलडोजर चल रहा है, कहीं आगजनी हो रही है, कहीं झडपें हो रही हैं, कहीं कब्जा किये गए पार्टी दफ्तर छुड़ाये जा रहे हैं, कहीं लेनिन की मूर्ति गिराई जा रही है, इस हिंसा में 2 लोगों की मौत भी हुई है.