थलपति विजय का कमाल MGR के करीब, EVM पर भी बॉक्स ऑफिस वाला जादू

डीएमके और एआईडीएमके की दो पक्षीय लड़ाई की दिशा मोड़कर रख दी है थलपति विजय ने. उनकी पार्टी TVK ने बहुमत के नजदीक पहुंचकर ऐसा कमाल किया है, जिसने करीब 50 साल पहले एमजी रामचंद्रन (MGR) के करिश्मे की याद दिला दी.

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थलपति विजय ने तमिलनाडु चुनाव में करिश्मा कर एमजीआर की याद दिला दी. (फोटो- ITG) थलपति विजय ने तमिलनाडु चुनाव में करिश्मा कर एमजीआर की याद दिला दी. (फोटो- ITG)

धीरेंद्र राय

  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:53 PM IST

तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नया इतिहास लिखा जा चुका है. 234 सीटों वाली विधानसभा में थलपति विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) 100 सीटों के पार हो चुकी है. यह आंकड़ा इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि विजय ने यह करिश्मा किसी गठबंधन के सहारे नहीं, बल्कि एक 'अकेले शेर' की तरह किया है. उन्होंने एक तरफ डीएमके (DMK) के कैडर वाले मजबूत संगठन और दूसरी तरफ एआईडीएमके (AIADMK) के जमीनी चैलेंज को अकेले दम पर ध्वस्त कर दिया है.

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तमिलनाडु में करीब 50 साल पहले एमजी रामचंद्रन (MGR) ने अपनी नई पार्टी के साथ पहले ही चुनाव में पूर्ण बहुमत पाकर जो ‘चमत्कार' किया था, आज विजय ने उसी स्क्रीन-टू-पॉलिटिक्स वाली विरासत को फिर से जिंदा कर दिया है. आइए देखते हैं कि विजय की इस 'विजय' से पहले साउथ के किन सितारों ने चुनावी मैदान में कैसी 'ओपनिंग' ली थी.

जितने कामयाब फिल्मों में, उतने ही चुनाव में

MGR (एम.जी. रामचंद्रन)

पहले चुनाव में - 30.4 प्रतिशत वोट मिला

साउथ की राजनीति के 'अल्टीमेट सुपरस्टार' एमजीआर ही थे. 1972 में डीएमके से अलग होने के बाद उन्होंने अन्नाद्रमुक (AIADMK) बनाई. 1977 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने वह कर दिखाया जो भारतीय राजनीति में मिसाल बन गया. उन्होंने न सिर्फ चुनाव जीता, बल्कि राज्य की सत्ता पर ऐसा कब्जा किया कि उनके जीवित रहते कोई उन्हें हिला नहीं सका.

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NTR (एन.टी. रामा राव)

पहले चुनाव में - 46.2% प्रतिशत वोट मिला

आंध्र प्रदेश में जो मुकाम एनटीआर का था, वैसा शायद ही किसी और का रहा हो. 1982 में उन्होंने 'तेलुगु देशम पार्टी' बनाई और महज 9 महीने के भीतर कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया. उनकी पहली चुनावी परफॉर्मेंस 'ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर' थी, जिसने क्षेत्रीय गौरव को चुनावी मुद्दा बनाया.

जिनकी परफॉर्मेंस औसत रही

कुछ सितारे भीड़ तो करोड़ों की जुटा पाए, लेकिन वोटिंग मशीन तक उस भीड़ को पूरी तरह ले जाने में 'एवरेज' साबित हुए.

चिरंजीवी

पहले चुनाव में - 16.3% प्रतिशत वोट मिला

आंध्र के 'मेगास्टार' ने 2008 में जब 'प्रजा राज्यम पार्टी' (PRP) बनाई, तो लगा कि वो एनटीआर का रिकॉर्ड तोड़ देंगे. लेकिन 2009 के चुनावों में उनकी पार्टी 294 में से केवल 18 सीटें ही जीत सकी. हालांकि उन्हें 16% वोट मिले, लेकिन वो सत्ता की रेस से बाहर ही रहे. बाद में उन्होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया.

विजयकांत

पहले चुनाव में - 8.5% प्रतिशत वोट मिला

तमिलनाडु में 'कैप्टन' के नाम से मशहूर विजयकांत ने 2005 में DMDK बनाई. 2006 के पहले चुनाव में उनकी पार्टी को सिर्फ 1 सीट (खुद उनकी) मिली, लेकिन 8.4% वोट शेयर लेकर उन्होंने जता दिया कि वो 'स्पॉइलर' बन सकते हैं. 2011 में वो अन्नाद्रमुक के साथ मिलकर 29 सीटें जीतने में कामयाब रहे और विपक्ष के नेता बने, पर अकेले दम पर कभी सत्ता तक नहीं पहुंचे.

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शुरुआत कुछ खास नहीं

सिनेमा के दिग्गज होने के बावजूद राजनीति की 'पिच' पर इनकी शुरुआत बेहद धीमी या फ्लॉप रही.

शिवाजी गणेशन

अभिनय के दिग्गज शिवाजी गणेशन की राजनीतिक पारी बेहद निराशाजनक रही. उन्होंने 1988 में 'तमिलगा मुन्नेत्र मुन्नानी' बनाई, लेकिन उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी. यहाँ तक कि वो खुद भी अपना चुनाव हार गए थे. यह साबित करता है कि सिर्फ बेहतरीन अभिनेता होना राजनीति में जीत की गारंटी नहीं है.

कमल हासन

पहले चुनाव में - 2.6% प्रतिशत वोट मिला

'उलगनायगन' कमल हासन ने 2018 में 'मक्कल नीधि मय्यम' (MNM) बनाई. 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को करीब 3.7% वोट मिले, लेकिन खाता नहीं खुला. 2021 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी शून्य पर रही और कमल हासन खुद कोयंबटूर दक्षिण से बेहद करीबी मुकाबले में हार गए.

पवन कल्याण

पहले चुनाव में - 5.53% प्रतिशत वोट मिला

पवन कल्याण ने 2014 में 'जनसेना' बनाई थी, लेकिन 2019 में जब पहली बार चुनाव लड़ा, तो प्रदर्शन निराशाजनक रहा. उनकी पार्टी को केवल 1 सीट मिली और वो खुद भी अपनी दोनों सीटों से चुनाव हार गए. हालांकि, मौजूदा समय में उनकी स्थिति काफी मजबूत हुई है, पर उनकी 'डेब्यू' परफॉर्मेंस काफी कमजोर थी.

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विजय ने कैसे बदला 'क्लाइमेक्स'?

विजय की 100 सीटों वाली परफॉर्मेंस इसलिए सबसे अलग है क्योंकि उन्होंने कमल हासन जैसी 'इंटलेक्चुअल' राजनीति नहीं की और न ही चिरंजीवी की तरह बीच में हिम्मत हारी. उन्होंने एमजीआर के 'मास अपील' वाले फॉर्मूले को पकड़ा और युवा वोटर्स के बीच अपनी 'थलपति' वाली इमेज को 'सेवियर' (रक्षक) की तरह पेश किया.

जहां कमल हासन और विजयकांत जैसे सितारे दो ध्रुवीय राजनीति (DMK vs AIADMK) के बीच पिस गए, वहीं विजय ने इस बार इस 'बायपोलर' सिस्टम में ऐसी सेंध लगाई है कि वो तमिलनाडु के नए पावर सेंटर बनकर उभरे हैं. 100 सीटें जीतना यह बताता है कि तमिलनाडु का वोटर अब पुरानी पार्टियों से आगे बढ़कर एक नए 'सिनेमैटिक विजन' पर भरोसा कर रहा है.

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