तमिलनाडु में बीजेपी नेता के. अन्नामलाई को आक्रामक राजनीति बहुत भारी पड़ी है. बहाना तो AIADMK के खिलाफ अन्नामलाई का हमलावर होना बना है, लेकिन असली नाराजगी ई के पलानीस्वामी पर अन्नामलाई के निजी हमले को लेकर है - और टकराव की एक बड़ी वजह दोनों नेताओं का एक ही समुदाय से होना भी है.
AIADMK के कड़े विरोध के कारण ही अन्नामलाई को तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष पद से अप्रैल, 2025 में हटा दिया गया था. और, अन्नामलाई की जगह नैनार नागेंद्रन को तमिलनाडु बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया. अगर ये सब नहीं हुआ होता तो संभव है, अन्नामलाई ही तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा या कम से कम दावेदार तो होते ही.
बीजेपी को तो वह सीट भी छोड़नी पड़ी है, जिस विधानसभा सीट से अन्नामलाई चुनाव लड़ाए जाने का प्लान था - सवाल है कि आखिर AIADMK से चुनावी गठबंधन के लिए बीजेपी ने अन्नामलाई की कुर्बानी क्यों दे डाली?
गठबंधन के एवज में अन्नामलाई की सीट गंवाई
एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से एक सीनियर नेता ने कोयंबटूर की सीट के लिए रिक्वेस्ट की थी, लेकिन AIADMK नेता ई. पलानीस्वामी ने उसे भी नजरअंदाज कर दिया. बीजेपी को हर कीमत पर AIADMK के साथ गठबंधन जरूरी लग रहा था, लिहाजा ई. पलानीस्वामी की शर्तें मंजूर करती गई.
बीजेपी को कोयंबटूर की वह सीट भी नहीं मिल पाई, जिस सीट से अन्नामलाई विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, या बीजेपी अन्नामलाई को उम्मीदवार बनाना चाहती थी. बीजेपी की तरफ से सिंगनल्लूर के साथ साथ सुलूर और कवुंडमपलायम विधानसभा सीटों की मांग भी की गई थी, लेकिन ई. पलानीस्वामी सिर्फ एक और वह भी कोयंबटूर नॉर्थ सीट के लिए ही राजी हुए.
सिंगनल्लूर और कवुंडमपलायम को अन्नामलाई की पसंदीदा सीटें बताया जा रहा है. अन्नामलाई दोनों में से किसी एक सीट पर ही चुनाव लड़ना चाहते थे. ये दोनों विधानसभा सीटें कोयंबटूर लोकसभा में आती हैं. 2024 के आम चुनाव में के. अन्नामलाई बीजेपी के टिकट पर कोयंबटूर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में थे. अन्नामलाई को करीब 4.5 लाख वोट भी मिले थे, लेकिन 11,788 वोटों से डीएमके उम्मीदवार से चुनाव हार गए थे.
2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अन्नामलाई अरावकुरिची सीट से भी चुनाव लड़े थे, लेकिन हार का ही मुंह देखना पड़ा था. चुनावी हार के बावजूद अन्नामलाई के आक्रामक रुख से बीजेपी के लिए तमिलनाडु में जगह बनने लगी थी. आखिर कोयंबटूर में साढ़े चार लाख वोट बीजेपी को सिर्फ अपनी वजह से तो मिला नहीं होगा, अन्नामलाई का व्यक्तिगत आकर्षण तो होगा ही.
AIADMK के साथ सीटों का बंटवारा हो जाने के बाद भी, बीजेपी अपने हिस्से दो सीटों पर अदला बदली की संभावना तलाश रही है. ये सीटें हैं, थंजावुर और गंदर्वकोट्टई. थंजावुर सीट को लेकर AIADMK ने भी दिलचस्पी दिखाई है. गंडर्वकोट्टई के बारे में सुनने में आ रहा है कि बीजेपी को कोई जाना-पहचाना चेहरा नहीं मिल रहा है. बीजेपी को गठबंधन में कुल 27 सीटें मिली हैं, और उनमें से सिर्फ कोयंबटूर नॉर्थ ही कोयंबटूर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले छह विधानसभा क्षेत्रों में शामिल है.
चुनावी तैयारियों को लेकर चेन्नई स्थित बीजेपी मुख्यालय में राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी. बैठक में गठबंधन में बीजेपी को मिली सीटों, संभावित उम्मीदवारों और चुनाव से जुड़े कई मसलों पर चर्चा भी हुई. बैठक में बीजेपी की सीनियर नेता तमिलिसाई सौंदरराजन और कोयंबटूर साउथ विधायक वनथी श्रीनिवासन तो शामिल हुईं, लेकिन अन्नामलाई मौजूद नहीं थे.
फरवरी में जब बीजेपी पूरे राज्य में विधानसभाओं के लिए कैंपेन मैनेजर की नियुक्ति कर रही थी, तब अन्नामलाई ने अपने पिता की सेहत का हवाला देते हुए जिम्मेदारी न दिए जाने की गुजारिश की थी.
वनथी श्रीनिवासन इस बार कोयंबटूर नॉर्थ से बीजेपी उम्मीदवार हो सकती हैं, और तमिलिसाई सौन्दर्यराजन को मिलापुर से उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना है.
बताते हैं कि बीजेपी जल्दी ही अपने हिस्से की सभी सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी करने वाली है - मीडिया से बातचीत में वनथी श्रीनिवासन का कहना था, उम्मीद है कि अन्नामलाई चुनाव लड़ेंगे और विधानसभा जाएंगे.
पलानीस्वामी क्या अब भी अन्नामलाई से चिढ़े हुए हैं?
पुलिस सेवा छोड़ते वक्त अन्नामलाई ने कहा था कि पुलिस अफसर के रूप में जो कुछ करना था, कर लिया है. अब आगे का काम करने का तरीका दूसरा होगा. अन्नामलाई को बीजेपी ने 2021 में तमिलनाडु की कमान सौंप दी थी. अन्नामलाई भी AIADMK के खिलाफ वैसे ही हमलावर थे, जैसे अन्य राज्यों में बीजेपी नेता अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ होते हैं - लेकिन AIADMK से गठबंधन की बीजेपी की तलब ने हथियार डाल देने के लिए मजबूर कर दिया.
लंदन से लौटने के बाद अन्नामलाई काफी शांत नजर आ रहे थे. राजनीतिक हमलों का निशाना भी AIADMK से डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन की ओर शिफ्ट हो गया था, लेकिन ई. पलानीस्वामी तो पहले से ही खार खाए बैठे थे - AIADMK के साथ साथ खुद पर निजी हमले बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे.
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले AIADMK ने बीजेपी से गठबंधन तोड़ लिया था. वजह अन्नामलाई को ही बताया गया. पलानीस्वामी को अन्नामलाई के हाथ में राज्य बीजेपी की कमान भी नहीं सुहा रही थी. पलानीस्वामी को बीजेपी की गठबंधन में दिलचस्पी और कमजोरी समझ में आ गई थी. पहले अन्नामलाई को तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष पद से हटवाया, और पलानीस्वामी ने अब बीजेपी को वे सीटें भी नहीं दीं, जहां से अन्नामलाई को बीजेपी चुनाव लड़ने के लिए टिकट देना चाहती थी.
1. अन्नामलाई ने AIADMK को भ्रष्ट बताया था, और उनके खिलाफ पलानीस्वामी ने इसी बात को मुद्दा बनाया. अन्नामलाई ने AIADMK नेता जयललिता के शासन के भ्रष्टाचार का भी मुद्दा उठाया था. चूंकि पलानीस्वामी खुद को जयललिता की राजनीति का वारिस मानते हैं, इसलिए अन्नामलाई के बयानों को निजी अपमान के तौर पर पेश किया.
लेकिन निजी अपमान तो अलग ही था. अन्नामलाई ने पलानीस्वामी पर सबसे ऊंची बोली लगाकर मुख्यमंत्री बनने का इल्जाम लगाया था - साथ ही, पलानीस्वामी को 'अनपढ़' और 'ट्रेटर' तक करार दिया था. निश्चित तौर पर पलानीस्वामी के लिए ये सब सुनना अपमानजनक था. अगर बीजेपी को गठबंधन नहीं करना होता तो चल भी जाता, जैसे दूसरे राज्यों में पूरे बारह महीने ऐसी बातें सुनने को मिलती रहती हैं.
जवाबी हमले में AIADMK ने अन्नामलाई को भी अनपढ़ बता डाला. आरोप यह भी लगाया कि बीजेपी अध्यक्ष के तीन साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद पद पर बने रहने के लिए बकवास कर रहे हैं. AIADMK ने अन्नामलाई को मानसिक तौर पर बीमार बताते हुए मेडिकल जांच की भी मांग कर डाली थी.
अन्नामलाई के कारण ही 2023 में AIADMK के साथ गठबंधन टूटने का भी जिम्मेदार माना गया. कहा गया कि अन्नामलाई की तीखी आलोचना के कारण AIADMK के कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी बढ़ी, जिससे बीजेपी के साथ गठबंधन टूट गया - और नए सिरे से गठबंधन के लिए बीजेपी को अन्नामलाई की ही कुर्बानी देनी पड़ी.
2. अन्नामलाई से पलानीस्वामी की चिढ़ की बड़ी वजह दोनों का एक ही समुदाय से होना भी है. असल में, अन्नामलाई और पलानीस्वामी दोनों ही तमिलनाडु के गुंडर समुदाय से आते हैं, जो ओबीसी कैटेगरी में आता है. EPS के नाम से लोकप्रिय पलानीस्वामी को गुंडर समुदाय का बड़ा नेता माना जाता है.
युवाओं, खासकर गुंडर वोटर के बीच, अन्नामलाई की बढ़ती लोकप्रियता को पलानीस्वामी अपनी राजनीतिक राह में खतरा मानते हैं. पलानीस्वामी को लगता है कि अन्नामलाई के जरिए बीजेपी AIADMK के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, जो खुद उनका मूल जनाधार है.
पलानीस्वामी का डर भी स्वाभाविक है. भला अपने सामने पलानीस्वामी अपने ही वोटर के बीच किसी और, और वह भी तेज तर्रार अपने से कम उम्र के नेता को उभरता हुआ कैसे बर्दाश्त करें. यह सही है कि बीजेपी ने बैकफुट पर आकर, और अन्नामलाई को हाशिए पर भेजकर AIADMK के साथ गठबंधन को तरजीह दी है, लेकिन ये सब तमिलनाडु में बीजेपी की राजनीति का अस्थायी भाव ही लगता है.
मृगांक शेखर