विशेष संसद सत्र का एजेंडा आने के बाद अब विपक्ष का 'सरप्राइज' तैयार है!

संसद के विशेष सत्र के एजेंडे को लेकर लोक सभा सचिवालय की तरफ से जारी बुलेटिन सरप्राइज ही है. पहले ये बताया जाये कि एजेंडा बताने जैसी कोई परंपरा नहीं है, और फिर अचानक एक बुलेटिन जारी कर एजेंडा बता दिया जाये - ये भी तो सरप्राइज ही है. लेकिन, विपक्ष कहां मानने वाला है. उसकी भी तो अपनी तैयारी होगी ही.

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विपक्ष को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद के विशेष सत्र में सरप्राइज का इंतजार है विपक्ष को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद के विशेष सत्र में सरप्राइज का इंतजार है

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 8:42 PM IST

लोक सभा सचिवालय की तरफ से जो एजेंडा बताया गया है, उसमें सिर्फ एक ही चीज ऐसी है जिस पर विपक्ष की तरफ से आपत्ति भी दर्ज करायी जा चुकी है - चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित सेवा शर्त विधेयक 2023. बाकी सब तो ऐसे हैं जिन पर चाह कर भी आपत्ति जताने से विपक्ष को कोई फायदा नहीं मिलने वाला है. ये ऐसी चीजें हैं जिनका विरोध करना विपक्ष के लिए कुल्हाणी पर पैर मारने जैसा हो सकता है. ये बात अलग है कि विपक्ष विरोध का अपना कोई एंगल तो खोज ही लेगा. कुछ बोल कर या कुछ करके या फिर कोई तात्कालिक बहाना बना कर सदन के बहिष्कार का स्कोप तो हमेशा ही रहता है.

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश एजेंडा जारी किये जाने का श्रेय तो ले रहे हैं, लेकिन ये भी आशंका जता रहे हैं कि आखिरी वक्त में कोई सरप्राइज देखने को भी मिल सकता है. कांग्रेस नेता को आशंका है, आखिरी क्षण में सरकार की तरफ से कोई हथगोला फोड़ा जा सकता है. और ये भी बता देते हैं कि INDIA के घटक दल सीईसी विधेयक का डट कर विरोध करेंगे.

विपक्षी गठबंधन INDIA के साथियों का मनोबन न गिरे इसलिए जयराम रमेश दावा करते हैं कि ये सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी गयी सोनिया गांधी की चिट्ठी का नतीजा है, और एजेंडा उसी दबाव में जारी किया गया है. 

ये एजेंडा भी तो सरप्राइज ही है

लोक सभा सचिवालय की तरफ से जारी बुलेटिन भी सरप्राइज ही है. संसद के विशेष सत्र को लेकर पहले अगर ये बताया जाये कि ऐसी कोई परंपरा नहीं है, और फिर अचानक एक बुलेटिन जारी कर एजेंडा बता दिया जाये तो क्या सरप्राइज नहीं कहा जाएगा? 

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एजेंडा को लेकर जारी बुलेटिन के अनुसार, संसद के विशेष सत्र में संविधान सभा से लेकर आज तक संसद की 75 वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों, अनुभवों, स्मृतियों और सीख पर चर्चा होगी. साथ ही, एडवोकेट संशोधन विधेयक - 2023, प्रेस और आवधिक पंजीकरण विधेयक - 2023 पेश किया जा सकता है. ये दोनों ही विधेयक राज्य सभा से पास हो चुके हैं, लेकिन लोक सभा से पारित होना बाकी है. इस सूची में डाकघर विधेयक - 2023 भी शामिल किया गया है. 

बस एक बिल ऐसा है जिस पर विपक्ष को आपत्ति हो सकती है - चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा सेवा शर्त विधेयक - 2023. ये विधेयक मानसून सत्र में राज्य सभा में पेश किया जा चुका है. 

अब भला संसद की अब तक की यात्रा का विपक्ष क्या विरोध करेगा. वैसे ही अगर सदन में चंद्रयान 3 की सफलता और G20 सम्मेलन में दिल्ली घोषणा पत्र की कामयाबी को भी सरकार की उपलब्धियों के तौर पर पेश किया जाये तो विरोध रस्मअदायगी से ज्यादा तो हो भी नहीं सकता.

सचिवालय सूत्रों के हवाले से इस बीच ये भी खबर आयी है कि ससंद के विशेष सत्र के दौरान दोनों ही सदनों में प्रश्नकाल और गैर-सरकारी कामकाज नहीं होगा. यहां तक तो विपक्ष का खेल खत्म करने का पूरा इंतजाम किया जा चुका है - लेकिन सरप्राइज एलिमेंट तो और भी हो सकते हैं. 

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विशेष सत्र के कुछ संभावित सरप्राइज 

सनातन धर्म के मुद्दे पर तो डीएमके नेता एमके स्टालिन पहले ही बैकफुट पर चले गये हैं. उदयनिधि स्टालिन जरूर अपनी जिद पकड़े हुए हैं, और आरजेडी जैसी पार्टियां सपोर्ट में खड़ी भी हैं, लेकिन कुछ नेताओं को छोड़ कर कांग्रेस भी साथ नहीं दे रही है. 

फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनातन धर्म के मुद्दे पर अलख जगा रखा है. खबर तो पहले मंत्रियों की बैठक से ही आयी थी, अब तो पब्लिक रैली में ही बोल दिये. ऐसे में संसद में इस मुद्दे का इस्तेमाल मोदी सरकार देश की जनता को अपनी बात समझाने के लिए कर सकती है - और विपक्ष कोई बखेड़ा करे तो चुप कराने के लिए भी.

1. भारत बनाम इंडिया: ये बहस भी करीब करीब थम चुकी है. सरकार की तरफ से ये भी बताया जा चुका है कि देश का नाम बदलने का कोई इरादा नहीं है. मतलब, जहां जहां इस्तेमाल करना है, पहले से ही होने लगा है.

हाल ही में बीएसपी नेता मायावती ने एक बयान जारी कर विपक्षी गठबंधन का नाम INDIA रखे जाने पर ही आपत्ति जतायी थी. मायावती ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि वो स्वतः संज्ञान लेकर देश के नाम पर बने राजनीतिक दलों, संगठनों और गठबंधनों पर रोक लगाये.

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यूं ही तो नहीं, लेकिन अगर बीएसपी की तरफ से कोई सुप्रीम कोर्ट चला जाये तो हो सकता है याचिका पर सुनवाई भी हो. एक बयान जारी कर अपील कर देना तो बस राजनीतिक हाजिरी लगाने जैसा ही माना जाएगा.

हां अगर मायावती की अपील पर मोदी सरकार स्वतः संज्ञान लेकर संसद सत्र में कोई सरप्राइज दे दे तो बात अलग है.

2. जातीय जनगणना: जातीय जनगणना धीरे धीरे केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी के लिए मुसीबत बनती जा रही है - अगर सत्ता पक्ष ने विपक्ष की इस पहल का काउंटर करने का कोई तरीका खोज लिया हो, तो वो भी सरप्राइज हो सकता है. लेकिन, फिलहाल तो इस मामले विपक्ष ज्‍यादा आक्रामक रणनीति के साथ चल रहा है.

3. महिला आरक्षण बिल: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा है, 'जब महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं... चाहे वो विज्ञान और प्रौद्योगिकी हो... रक्षा या खेल हो... तो राजनीति में भी उनका प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए.'

जैसे संघ प्रमुख मोहन भागवत की एक सार्वजनिक सलाहियत के बाद इंडिया की जगह सरकारी कामकाज में भारत का इस्तेमाल होने लगा, क्या ये माना जा सकता है कि राष्ट्रपति की सलाह से प्रेरित होकर मोदी सरकार विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल ला सकती है. 

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कांग्रेस महिला आरक्षण बिल के सपोर्ट में पहले से ही है, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों को बिल के कुछ हिस्सों पर आपत्ति है - ये बिल लाकर सरकार चाहे तो विपक्षी गठबंधन INDIA के घटक दलों में फूट डालने की कोशिश कर सकती है. लेकिन, समाजवादी पार्टी और आरजेडी इस पर अपना सख्त ऐतराज कायम रखेंगी. इन पार्टियों का मानना है कि पहले सरकारों को पिछड़े और कमजोर तबकों को आरक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए, खासतौर पर प्राइवेट सेक्टर में.

4. वन नेशन, वन इलेक्शन: जिस तरह से पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के नेतृत्व में बनी वन नेशन, वन इलेक्शन कमेटी सक्रियता दिखा रही है, कुछ मजबूत संकेत मिल तो रहे हैं - लेकिन ये मुद्दा स्किप करके भी तो सरकार सरप्राइज दे सकती है. फिलहाल सरकार के पास इसे मूर्त रूप देने का फॉर्मूला नहीं है. विपक्ष इसके विरोध में पहले ही एकजुटता दिखा सकता है.

5. कोई सरप्राइज नहीं: ये भी तो हो सकता है, संसद के विशेष सत्र में कोई सरप्राइज ही न हो - वैसे ये भी तो सरप्राइज ही समझा जाएगा.

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