राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं, फिर भी INDIA ब्लॉक में सहयोगी दल उनके नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं. लेकिन, ताजा सर्वे बता रहा है कि विपक्षी खेमे के सारे नेता अब भी मुकाबले में राहुल गांधी से काफी पीछे हैं - और लोगों का मानना है कि विपक्ष की राजनीति अब भी पूरी तरह कांग्रेस के ही इर्द गिर्द घूम रही है.
ये बातें मालूम हुई हैं, इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे में. इंडिया ब्लॉक में राहुल गांधी को सबसे ज्यादा चैलेंज करते देखा गया है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से. वैसे तो चुनावों के दौरान यूपी में समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी राहुल गांधी के नेतृत्व को चुनौती देते आए हैं - लेकिन सर्वे बता रहा है कि तीनों का लेवल बराबर ही है.
देश का राजनीतिक मिजाज जानने के लिए किए गए सर्वे का सैंपल साइज 36 हजार से ज्यादा है. और, ये सर्वे 8 दिसंबर 2025 से लेकर 21 जनवरी 2026 तक हुआ है.
विपक्षी खेमे में राहुल गांधी की बराबरी में तो कोई भी नहीं
इंडिया टुडे–सी वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में लोगों से पूछा गया था कि INDIA ब्लॉक का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त कौन है - राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल या अखिलेश यादव?
जनवरी, 2026 के MOTN सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, 29 फीसदी लोगों की पहली पसंद राहुल गांधी बने हैं. राहुल गांधी के बाद दूसरे नंबर पर ममता बनर्जी सर्वे में शामिल लोगों की पसंद बनी हैं. अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव को ममता बनर्जी से थोड़े कम लोगों ने अपनी पसंद बताया है.
आंकड़ों के हिसाब से देखें तो राहुल गांधी के बाद 7 फीसदी लोग ममता बनर्जी को विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व के लिए उपयुक्त मानते हैं. और, वैसे ही 6 फीसदी लोग अरविंद केजरीवाल को, और 6 फीसदी ही अखिलेश यादव को भी इंडिया ब्लॉक के नेता के तौर पर देखना चाहते हैं.
इससे पहले, अगस्त 2025 में राहुल गांधी विपक्ष के नेता के तौर पर 28 फीसदी लोगों की पसंद पाए गए थे. उस वक्त भी राहुल गांधी के बाद ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव का नंबर आया था. लेकिन, पिछले साल के मुकाबले राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन के नेता के रूप में पसंद करने वाले लोगों की संख्या कुछ कम हुई है. अगस्त, 2024 के सर्वे में 32 फीसदी लोग राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन के लिए बढ़िया नेता बता रहे थे.
अगर बीते छह महीने के आंकड़ों से तुलना करें तो राहुल गांधी की रेटिंग थोड़ी गिरावट पर दर्ज की गई है - लेकिन, ध्यान देने वाली बात ये भी है कि राहुल गांधी और विपक्षी दलों के अन्य नेताओं के बीच लंबा फासला बरकरार है.
अगस्त 2024 के सर्वे में लोकसभा चुनाव के नतीजों का असर महसूस किया गया था. क्योंकि 2014 से लेकर तब तक कांग्रेस की सबसे ज्यादा सीटें 2024 में आई थीं. लोकसभा चुनाव के बाद हुए सभी चुनावों में कांग्रेस को लगातार नुकसान हुआ.
कांग्रेस के लिए तो दिल्ली और बिहार चुनाव के नतीजे भी बेहद निराश करने वाले रहे, लेकिन सवाल तो हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद ही उठने लगे थे. पहले तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने सवाल उठाया, और बाद में ममता बनर्जी खुद कहने लगीं कि वह इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व के लिए तैयार हैं. उनका कहना था कि वह कोलकाता से ही विपक्षी गठबंधन को मजबूत नेतृत्व दे सकती हैं.
ममता बनर्जी को इंडिया ब्लॉक का नेता बनाने का तब लालू यादव सहित विपक्ष के कई नेताओं ने सपोर्ट किया था. कुछ दिनों के लिए तो ऐसा लगने लगा था कि इंडिया ब्लॉक अंतिम सांसे गिन रहा है. एक्सपर्ट तो यहां तक लिखने लगे थे कि दिल्ली चुनाव के बाद इंडिया ब्लॉक का अस्तित्व खत्म हो जाएगा. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इंडिया ब्लॉक के होने पर ही सवाल उठा चुके हैं.
बिहार चुनाव के दौरान राहुल गांधी को भरपूर इज्जत बख्शी गई. वोटर अधिकार यात्रा के दौरान तेजस्वी यादव ने तो प्रधानमंत्री पद का दावेदार बता डाला था, लेकिन राहुल गांधी उनको मुख्यमंत्री चेहरा बताने से परहेज करते रहे. हो सकता है, इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व को लेकर लालू यादव के सवाल उठाए जाने का गुस्सा तब तक बना हुआ हो.
पश्चिम बंगाल चुनाव को देखते हुए ममता बनर्जी ने खामोशी अख्तियार कर ली है. लेकिन, सिर्फ इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व के मामले में, पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ तो दीवार बनकर खड़ी हो गई हैं. ममता बनर्जी की तरह अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव भी व्यवहार कर रहे हैं, क्योंकि पंजाब और यूपी में भी अगले साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं - और वैसे भी सर्वे तो यही बता रहा है कि राहुल गांधी को सीधे सीधे चैलेंज करने की स्थिति में तीनों में से कोई भी नहीं है.
कांग्रेस के मामले में TINA फैक्टर लागू है
तस्वीर का एक और पहलू भी है. वैसे भी राहुल गांधी और कांग्रेस की स्थिति एक दूसरे की पूरक ही है. कांग्रेस की वजह से राहुल गांधी मैदान में डटे हैं, और राहुल गांधी की वजह से कांग्रेस. ये राहुल के गांधी परिवार के होने की वजह से है.
MOTN सर्वे में कांग्रेस को लोगों ने इंडिया ब्लॉक की सबसे कमजोर कड़ी बताया है. और, ऐसा बताने वाले भी सर्वे में शामिल 62 फीसदी लोग हैं. हालांकि, सर्वे में शामिल 29 फीसदी ऐसे भी हैं जो कांग्रेस के कमजोर कड़ी होने की बात से इत्तफाक नहीं रखते. हालांकि, 29 प्रतिशत लोग इस आकलन से सहमत नहीं हैं, क्योंकि विपक्षी गठबंधन के भीतर कांग्रेस की भूमिका और उसकी ताकत को लेकर देश का जनमत अब भी काफी हद तक क्रिटिकल रुख अपनाए हुए है.
एक दिलचस्प बात यह भी है कि सर्वे में शामिल 55 फीसदी लोग मानकर चल रहे हैं कि वास्तविकत यही है कि कांग्रेस ही देश की असली विपक्षी पार्टी है - क्योंकि सत्ताधारी बीजेपी को सामने से चैलेंज करने की स्थिति में कांग्रेस ही है - TINA (There Is No Alternative) फैक्टर भी तो इसी को कहते हैं.
मृगांक शेखर