अजित पवार के बिना NCP विलय? बारामती की सबसे बड़ी पॉलिटिकल ‘सुलह‘ पर कई सवाल

अजित पवार के विमान हादसे में हुए निधन के बाद से महाराष्ट्र डिप्टी सीएम पद और उनकी पार्टी एनसीपी के उत्तराधिकारी को लेकर कयास चल ही रहे थे. तभी अचानक चर्चा उस सुलह की होने लगी जो एक बार फिर शरद पवार और अजित पवार को साथ ला सकती थी. दोनों पवार अपनी पार्टियों का विलय करना चाहते थे. सब तय था. 8 फरवरी की तारीख भी. लेकिन, अब सिर्फ सवाल है.

Advertisement
अजित पवार-शरद पवार... जो दो हाथ मिलने वाले थे, उनमें से एक हमेशा के लिए चला गया. अजित पवार-शरद पवार... जो दो हाथ मिलने वाले थे, उनमें से एक हमेशा के लिए चला गया.

धीरेंद्र राय

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:33 PM IST

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्य की डिप्टी सीएम बन सकती हैं. गुरुवार को प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे ने सुनेत्रा से मुलाकात की. इस एक्टिविटी के बीच एक खबर यह भी आई कि 8 फरवरी को शरद पवार और अजित पवार अपनी अपनी NCP का विलय करना चाहते थे. और यह भी कि शरद पवार भी महाराष्ट्र की महायुति सरकार को ज्वाइन करने वाले थे. लेकिन, अब अजित पवार के अचानक चले जाने से इन दोनों खबरों का जुड़ाव कुछ अजीबोगरीब समीकरण पैदा कर रहा है.

Advertisement

‘अगर हम एक साथ आते हैं तो इससे कुछ लोगों को परेशानी क्यों होती है?' अजित पवार हाल ही में हुए महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव के दौरान कई सभाओं में ऐसा कहते सुने गए. यानी, दोनों NCP के विलय को लेकर कम से कम अजित पवार तो बेहद उत्साहित थे. ‘आजतक‘ के मैनेजिंग एडिटर और महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार साहिल जोशी अपने सूत्रों के हवाले से खबर दे रहे हैं कि सुनेत्रा को डिप्टी सीएम बनाए जाने का प्रस्ताव दिया जाएगा. सुनेत्रा पवार अपने दिवंगत पति अजित पवार की सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. यह भी खबर है कि प्रफुल्ल पटेल एनसीपी के अध्यक्ष बन सकते हैं. इन  प्रस्तावों पर चर्चा के लिए वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलेंगे. और इस दौरान एनसीपी (एसपी) के विलय पर भी बात हो सकती है.

Advertisement

अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर एनसीपी नेता नरहरि जिरवाल ने कहा कि लोग ‘वहिनी‘ (भाभी, यहां आशय सुनेत्रा पवार से है) को मंत्रिमंडल में शामिल करने की इच्छा जता रहे हैं. सुनेत्रा अभी राज्यसभा सांसद हैं. एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ विधायक जयंत पाटिल और महाराष्ट्र एनसीपी (एसपी) प्रमुख शशिकांत शिंदे ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पुष्टि की कि विलय पर चर्चा अंतिम चरण में थी. बातचीत इस स्तर तक पहुंच चुकी थी कि संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को शामिल करने जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जा रहा था. पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के अहम नागरिक निकाय चुनाव दोनों एनसीपी गुटों ने साथ मिलकर लड़े थे. इसके बाद ही दोनों खेमों के बीच नरमी के संकेत मिले थे. नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से अपने रुख नरम किए थे, जिससे संकेत मिला कि आंतरिक मतभेद सुलझाए जा रहे हैं.

दोनों एनसीपी को क्यों थी विलय की जरूरत

-बंटवारे के बाद पिछले चुनावों में शरद पवार की एनसीपी का बुरा प्रदर्शन. बाकी सहयोगी दल कांग्रेस और उद्धव ठाकरे भी संघर्ष कर रहे थे. उद्धव ने भी अपने सर्वाइवल के लिए 20 साल से बिछड़े चचेरे भाई राज ठाकरे को गले लगाया.

Advertisement

-अजित पवार को चुनावी कामयाबी तो मिली. सत्ता में भागीदारी भी. लेकिन महायुति में वैल्यू बीजेपी और शिवसेना के बाद आखिरी क्रम पर ही रही. शरद पवार यदि साथ आ जाते तो संयुक्त एनसीपी न सिर्फ महाराष्ट्र में बल्कि केंद्र में भी मजबूत होती.

-शरद पवार और अजित पवार का मिलन महाराष्ट्र के पावर बैलेंस को नई दिशा देता. खासतौर पर यह मर्जर एकनाथ शिंदे के उभार को बैलेंस करता. 

-पिछले कुछ अरसे से महाराष्ट्र में मराठा पॉलिटिक्स की जमीन तैयार हुई है. शरद पवार इसके पुराने खिलाड़ी रहे हैं. संयुक्त एनसीपी इस राजनीति को नई दिशा देती.

-अजित पवार के पास तेजतर्रार फैसले लेने का कौशल था, लेकिन शरद पवार की ब्रांड इमेज की कमी खल रही थी. इसीलिए अजित भले चुनावी राजनीति और सत्ता की रेस में तो शरद पवार से आगे निकल गए थे, लेकिन अंतिम क्षणों तक वे उन्हें आदर देते रहे. 

क्या अजित पवार के चले जाने से प्रभावित होगा NCP का विलय?

1. यदि शरद पवार अपनी पार्टी को अज‍ित पवार की एनसीपी में मर्ज करने जा रहे थे, मतलब पवार पर‍िवार की राजनीत‍िक व‍िरासत तय हो रही थी. विलय की खबरें सच्‍ची हैं तो शरद पवार को अज‍ित पवार का नेतृत्‍व मंजूर हो गया था, लेक‍िन अब उनके न‍िधन के बाद क्‍या?

Advertisement

2. खबरें हैं क‍ि सुनेत्रा पवार को ड‍िप्‍टी सीएम पद और प्रफुल्‍ल पटेल को एनसीपी का मुख‍िया बनाया जा सकता है. अज‍ित पवार की पत्‍नी होने के नाते सुनेत्रा पवार को ड‍िप्‍टी सीएम बनाना ज्‍यादा परेशानी नहीं पैदा करेगा, लेक‍िन दोनों NCP अब तक पवार पर‍िवार के पास रही, क्‍या वो प्रफुल्‍ल पटेल को सौंपी जा सकती है?

3. सबसे बड़ा सवाल तो यह है क‍ि दोनों एनसीपी का जो मर्जर अज‍ित पवार के रहते हो सकता था, क्‍या वो उनके बिना संभव है? और यदि है तो उसकी नई शर्तें क्या होंगी?

4. एनसीपी के पास सत्‍ता है लेक‍िन अज‍ित पवार नहीं, जबक‍ि दूसरे खेमे में शरद पवार है लेक‍िन उनकी पार्टी सत्‍ता समीकरण के हिसाब से हाश‍िये पर है. एक वक्‍त था जब दोनों पवार म‍िलकर अपनी अपनी एनसीपी का भविष्‍य तय कर सकते थे, लेक‍िन अब जब अज‍ित पवार नहीं हैं तो कई बाहरी फैक्‍टर भी रोल प्‍ले करेंगे. ज‍िसमें बीजेपी भी शाम‍िल है.

5. अज‍ित पवार के चले जाने से दोनों एनसीपी के भव‍िष्‍य पर सवाल है. या तो जैसा चल रहा है वैसा ही चलता रहे. लेक‍िन बारामती की राजनीति रुके हुए पानी की तरह नहीं है. वे उत्‍तरोत्‍तर आगे बढ़ती है. अजित पवार के निधन के बाद पत्नी सुनेत्रा, बेटे जय और पार्थ पवार स्वाभाविक उत्तराधिकारी माने जाएंगे, लेकिन उन्हें खुद को साबित भी करना होगा. दूसरी ओर शरद पवार बहुत बुजुर्ग हैं. लेकिन, उनके खेमे में रोहित पवार पहले से ही एक सक्रिय और जमीनी चेहरा हैं. सुप्रिया सुले की राष्ट्रीय स्वीकार्यता अलग है. यानी बारामती की विरासत अब एक ही धुरी पर नहीं, कई धुरियों पर बंट चुकी है.

Advertisement

कुल मिलाकर, अजित पवार का अचानक चले जाना मानवीय क्षति है और एक परिवार और पार्टी का नुकसान भी. लेकिन, इस एक हादसे ने बारामती और महाराष्ट्र की सियासत के लिए ऐसा वैक्यूम बना दिया है, जिसके दबाव से मुक्त होने में वक्त लगेगा. जो बड़ा सवाल है वो यह कि पवार परिवार अब तक अपने राजनीतिक खजाने की रखवाली का जिम्मा किसी को भी सौंपे, चाबी अपने ही पास रखता था. चाहे शरद पवार हों या अजित पवार. लेकिन, बारामती में हुए विमान हादसे ने कई सियासी आशंकाओं को जन्म दे दिया है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement