हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोप लगाने के बाद बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की, और विस्तार से सफाई दी. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह तो माना कि वह जेफ्री एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे, लेकिन कहा कि मुलाकात पूरी तरह प्रोफेशनल थी. हरदीप सिंह पुरी ने एपस्टीन के आपराधिक मामलों से किसी तरह का संबंध होने के आरोपों को बेबुनियाद बताया है.
लोकसभा में केंद्रीय मंत्री पर आरोप लगाने के बाद बाहर आकर भी राहुल गांधी का कहना था, 'मैंने कहा है कि मैं दावे को साबित करूंगा... अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट के पास एपस्टीन मामलों से संबंधित फाइलें हैं, जिनमें हरदीप पुरी और अनिल अंबानी के नाम हैं.'
राहुल गांधी के आरोपों को काउंटर करने के लिए हरदीप सिंह पुरी ने कांग्रेस के 'वोट-चोरी' कैंपेन की याद दिलाई कि कैसे एक गलत जानकारी पर युवा नेता ने एक ब्राजीली मॉडल के हरियाणा में कई बार वोट डालने का दावा कर डाला था, और बाद में शर्मिंदगी उठानी पड़ी.
आठ साल तक संयुक्त राष्ट्र में बतौर राजदूत अपने काम का हवाला देते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एपस्टीन फाइल्स से जुड़े करीब 30 लाख ईमेल पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, और उनके नाम का जिक्र महज कुछ ईमेल में हुआ है.
एक वाकये का उल्लेख करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा, पिछले साल संविधान दिवस समारोह के दौरान राहुल गांधी ने 'आंख मारी' और कहा कि उनका नाम 'दिलचस्प जगहों पर' है. हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि राहुल गांधी को उसके बारे में वह एक नोट भी भेज चुके हैं. संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है.
एपस्टीन से संपर्कों पर हरदीप पुरी की सफाई
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा एपस्टीन फाइल्स में हरदीप सिंह पुरी का नाम होने के आरोपों को केंद्रीय मंत्री ने बेबुनियाद और बदनाम करने की मुहिम करार दिया है. हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, आरोप लगाने की यह कवायद कुछ और नहीं बल्कि मसखरेपन की मिसाल है.
1. हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि जब पब्लिक डोमेन में उनके नाम वाले दो ईमेल आए, तो कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने पूछा कि एपस्टीन से उन्हें किसने मिलवाया था? हरदीप सिंह के मुताबिक, मई 2009 में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में नियुक्त हुए, और तब से लेकर 2017 में केंद्रीय मंत्री बनने तक 8 साल तक वो अमेरिका में रहे.
हरदीप सिंह पुरी कहते हैं, आठ वर्षों के दौरान, लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन से परिचय के बाद हुए आदान-प्रदान में आए संदर्भ और एक ईमेल शामिल है. उनका कहना है कि पूरे आठ साल में दो या तीन बैठकों का संदर्भ है.
2. हरदीप सिंह पुरी बताते हैं, उस नोट में मैंने उन्हें बताया कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत पद से सेवानिवृत्त होने के कुछ महीनों बाद मुझे इंटरनेशनल पीस इंस्टिट्यूट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया. यह संस्था कई साल पहले संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना के उद्देश्य से स्थापित की गई थी - लेकिन मैं आईपीआई का हिस्सा नहीं था, मैं इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म महासचिव था.
3. केंद्रीय मंत्री का कहना है, आईपीआई के तहत आईसीएम एक प्रोजेक्ट के रूप में ये आयोग बनाया गया था ताकि यह देखा जा सके कि संयुक्त राष्ट्र अपनी 75वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने मकसद के हिसाब से कायम है या नहीं. कमीशन के अध्यक्ष ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री थे. आईपीआई में मेरे बॉस टेर्जे रोड लार्सन उस कुख्यात व्यक्ति एपस्टीन को जानते थे, और आईपीआई या आईसीएम के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में ही मेरी एपस्टीन से कुछ मौकों पर, तीन या ज्यादा से ज्यादा चार बार, मुलाकात हुई.
4. हरदीप सिंह पुरी मानते हैं कि एपस्टीन फाइल्स 'गलत और आपराधिक कामों' से संबंधित थीं. और उनमें, पुरी का कहना है, ऐसे द्वीप के आरोप भी शामिल थे, जहां वह लोगों को उनकी यौन फैंटेसी में लिप्त होने के लिए ले जाता था, जिनमें पीडोफीलिया और उसके पीड़ित शामिल थे.
5. हरदीप सिंह पुरी बताते हैं, 'पीड़ितों ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं,' और कहते हैं, 'मेरे संपर्क का उससे कोई संबंध नहीं है.'
6. हरदीप सिंह पुरी का कहना है, 'यह एक पेशेवर मामला था. उस समय मैं सरकार का हिस्सा भी नहीं था. नवंबर, 2014 में मैं प्राइवेट सिटिजन था... किसी ने कहा कि वो भारत में काम के मौके देखना चाहते हैं, हमने लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन के साथ बैठक की, और यह सलाह दी कि वो भारत आएं, और यहां हो रहे बदलावों को देखें.
7. लार्सन और एपस्टीन के बीच हुए ईमेल के आदान-प्रदान का भी जिक्र करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने, जिसमें उन्हें 'दो चेहरे वाला' बताया गया था, कहा कि उनकी उन चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं थी, और न ही उन्होंने जाहिर की, जो काम वे लोग कर रहे थे.
सवाल जो प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भी पूछे जा रहे हैं
प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करने के बाद भी, विपक्ष की तरफ से हरदीप सिंह पुरी से अलग अलग कई सवाल पूछे जा रहे हैं. कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी हरदीप सिंह पुरी से अलग अलग सवाल पूछे हैं.
महुआ मोइत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरदीप सिंह पुरी की बातों का हवाला देते हुए सवाल पूछा है. हरदीप सिंह पुरी का कहना है, एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल 'कुछ मौकों' पर, वो भी एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थी, और उनके साथ सिर्फ एक ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल साइट X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए कहा है कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी झूठ बोल रहे हैं. कुछ ईमेल के स्क्रीनशॉट्स शेयर करते हुए महुआ मोइत्रा ने भी सवाल पूछे हैं.
1. एक मेल के आधार पर महुआ मोइत्रा पूछती हैं, 24 दिसंबर, 2014 को एपस्टीन से हरदीप पुरी कहते हैं कि वो 'बातचीत के लिए आना चाहते हैं' - क्या यह किसी प्रतिनिधिमंडल जैसा लगता है?
2. वैसे ही 15 मई, 2017 के ईमेल दिखाकर, महुआ मोइत्रा कह रही हैं, 19 मई को होने वाली बैठक की पुष्टि की गई है... केवल एपस्टीन और पुरी - कोई प्रतिनिधिमंडल नहीं.
3. और, 25 दिसंबर, 2015 को एपस्टीन से पुरी पूछते हैं कि क्या वो शहर में हैं, और कॉफी के लिए उपलब्ध हैं - क्या यह किसी प्रतिनिधिमंडल जैसा लगता है?
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के प्रेस कॉन्फ्रेंस और ईमेल को जोड़कर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सोशल मीडिया पर कुछ सवाल पूछे हैं -
1. एपस्टीन को रीड हॉफमैन के साथ हरदीप पुरी की मुलाकात से पहले ही उसके बारे में कैसे मालूम था?
2. क्या एपस्टीन वही कॉन्टैक्ट था जिसने रीड हॉफमैन के साथ बैठक तय कराई थी?
3. हरदीप पुरी उनके साथ मुलाकात की जानकारी आखिर क्यों शेयर कर रहे थे?
4. एपस्टीन को 'मित्र' कहकर क्यों संबोधित किया जा रहा था?
5. हरदीप पुरी के लिए एपस्टीन क्या व्यवस्था कर रहे थे?
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