कन्‍फ्यूज, थके ट्रंप... ईरान जंग से मांग रहे 'सेफ एग्‍ज‍िट' की मोहलत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर दी स्पीच में उनकी थकान और रणनीति की कमी साफ नजर आई. उन्होंने अगले 2-3 हफ्तों में युद्ध खत्म करने का संकेत देते हुए अमेरिका की मिडिल ईस्ट से वापसी की तैयारी की बात कही. ट्रंप ने पुराने दावों को दोहराया और युद्ध को शॉर्ट टर्म बताया और घरेलू आर्थिक दबावों का जिक्र किया.

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ईरान युद्ध को लेकर व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप की स्पीच. (Alex Brandon/Pool via REUTERS) ईरान युद्ध को लेकर व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप की स्पीच. (Alex Brandon/Pool via REUTERS)

धीरेंद्र राय

  • वॉशिंगटन,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:52 AM IST

गुरुवार सुबह जब अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप भाषण देने आए, तो दुन‍िया सांस रोके देख रही थी. उत्‍सुकता थी क‍ि ईरान युद्ध को लेकर वे न जाने कौन सी आर-पार वाली बात कह जाएं. लेक‍िन, 20 म‍िनट के भाषण में द‍िखी उनकी उनकी थकान, जंग से छुटकारा पाने की छटपटाहट. ट्रंप की बातों में रणनीति नदारद थी, वे स‍िर्फ राजनीत‍ि कर रहे थे. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के एक महीने पूरे होने पर दिया गया यह भाषण आत्ममुग्धता और पुरानी चेतावनियों का एक ऐसा घालमेल है, जो अब ग्‍लोबल फोरम पर अपना असर खोता जा रहा है.

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वही पुराने दावे: 'ट्रुथ सोशल' की गूंज

इस भाषण में ट्रंप ने जिन बातों को 'नई उपलब्धियों' के रूप में पेश किया, वे वास्तव में नई नहीं थीं. ईरानी नेतृत्व के सफाए का दावा हो, 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के जरिए परमाणु ठिकानों को तबाह करने की बात हो, या ईरान के बिजली घरों को उड़ाने की धमकी- ये सब ट्रंप हफ्तों से अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर दोहराते रहे हैं.

जब कोई राष्ट्राध्यक्ष अपनी सैन्य धमकियों को सोशल मीडिया पर इतनी बार रगड़ देता है, तो वे अपनी 'शॉक वैल्यू' खो देती हैं. ट्रंप के ये दावे अब इतने घिस चुके हैं कि इन्हें 'प्रोपेगेंडा' से अधिक कुछ नहीं माना जा रहा. परमाणु ठिकानों के 'नष्ट होने' और 'ईरानी नौसेना के खात्मे' की बातें अब एक ऐसी रिकॉर्डिंग की तरह लगती हैं जिसे ट्रंप अपनी सुविधा के अनुसार बार-बार बजाते हैं. वास्तविकता यह है कि इन दावों का दोहराव द‍िखाता है कि ट्रंप के पास अब कहने को कुछ नया नहीं बचा है.

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ईरान युद्ध की थकान: शब्दों की आड़ में छिपा सच

भाषण के बीच में ट्रंप द्वारा वियतनाम, इराक और अफगान युद्धों की समय-सीमा की तुलना करना सबसे बड़ा संकेत है कि वे अब इस युद्ध से बुरी तरह थक चुके हैं. 32 दिनों के इस अभियान को वे इतिहास की 'सबसे बड़ी सैन्य जीत' बताकर असल में अमेरिकी जनता को यह मानसिक संदेश दे रहे हैं कि 'अब बहुत हो गया.'

ट्रंप अच्छी तरह जानते हैं कि म‍िड‍िल-ईस्‍ट में एक और लंबा युद्ध उनकी घरेलू अर्थव्यवस्था और 'अमेरिका फर्स्ट' की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है. तेल की बढ़ती कीमतें और घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव ने उनकी चिंता बढ़ा दी है. इसल‍िये वे अपने लोगों का ढांढस बंधाने के ल‍िए इसे 'शॉर्ट टर्म' कह रहे हैं. वे बार-बार यह साबित करने की भी कोशिश कर रहे हैं कि ईरान अब 'कोई खतरा नहीं बचा' और उसका 'विनाश हो चुका है.' यह किसी विजेता का आत्मविश्वास नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता की दलील है जो अपनी सेना को वापस बुलाने के लिए बहाना तलाश रहा है.

2-3 हफ्तों की मोहलत: 'फेस-सेविंग' और एग्जिट की रणनीति

भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह था जहां ट्रंप ने ईरान जंग के ल‍िए 'अगले दो से तीन हफ्तों' का समय मांगा. उन्होंने कहा कि इन हफ्तों में अमेरिका ईरान पर 'अब तक का सबसे भीषण प्रहार' करेगा. सैन्य दृष्टि से देखें तो यह कोई रणनीतिक योजना नहीं, बल्कि एक 'फेस-सेविंग' (सम्मानजनक विदाई) का रास्ता तैयार करना है. इस दो-तीन हफ्ते की समय-सीमा के पीछे के असल मायने ये हैं:

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अंतिम दिखावा: ट्रंप एक आखिरी बड़ा धमाका या हवाई हमला करके दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि उन्होंने अपनी शर्तों पर युद्ध समाप्त किया है.

सम्मानजनक निकास: वे इस समय का उपयोग करके एक ऐसी 'जीत' की पटकथा लिखना चाहते हैं, जिससे वे बिना किसी 'हार' के ठप्पे के अपनी सेना को वापस बुला सकें.

बातचीत का बहाना: उन्होंने नए ईरानी नेतृत्व को 'लॉज‍िकल' बताकर पहले ही समझौते की खिड़की खोल दी है. वे अगले कुछ हफ्तों में एक 'कागजी समझौते' के जरिए खुद को एक शांतिदूत, डीलमेकर और विजेता तीनों साबित करना चाहते हैं.

होर्मुज से पल्ला झाड़ने की तैयारी

ट्रंप का यह कहना कि 'होर्मुज स्‍ट्रेट की रक्षा अब दूसरे देशों को खुद करनी चाहिए,' उनके एग्जिट (Exit) का सबसे स्पष्ट प्रमाण है. वे अब मध्य पूर्व की सुरक्षा का बोझ उठाने के मूड में नहीं हैं. उन्होंने साफ संकेत दे दिया है कि अमेरिका ने अपना काम (ईरान को कमजोर करना) कर दिया है और अब वह इस खर्चीले लफड़े से बाहर निकलना चाहता है.

ट्रंप की धमकियां अब अपनी धार खो चुकी हैं क्योंकि वे एक्‍शन से ज्यादा रिपीटीशन वाली हैं. उनका यह भाषण क‍िसी अटैक की नहीं, बल्कि युद्ध समाप्ति का सधा हुआ  संकेत दे रहा था. हां, इसमें ट्रंप की च‍िरपर‍िच‍ित नाटकीयता जरूर थी. अगले 15-20 दिनों में ट्रंप एक आर्ट‍िफ‍िश‍ियल 'कम्‍प्‍लीट व‍िक्‍ट्री' की घोषणा करके इस युद्ध से पीछे हट जाएंगे. उन्‍हें स‍िर्फ अपनी 'स्‍ट्रांग इमेज' को बचाना है, जबकि जमीन पर वे केवल फारस की खाड़ी ओर ईरान के आसमान से सम्मानजनक विदाई चाहते हैं.

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